अब कहाँ रहेगी गौरय्या..??

छतों के पक्की बनाने के बाद अब ज़िम्मेदारी गौरय्या के आशियाँ बनाने की

(काज़ी अमजद अली)

विश्व गौरय्या दिवस पर विशेष… ✍️
बढ़ती इन्सानी ज़रूरतों के कारण प्रकृति का दोहन लगातार जारी है दिनप्रतिदिन इंसानो के दायरे बढ़ने से पक्षियों का सँसार सिकुड़ रहा है जिनमे गौरय्या पक्षी प्रमुख हैं जो इंसानो के ज़्यादा नज़दीक रहते आये हैं बस्तियों में इन्सानों के बीच आबाद पक्षी गौरय्या की सुखद अनुभूति को हम सबने महसूस किया है कंक्रीट की छतों ने गौरय्या के जीवन को खतरे में डाल दिया है भारी खर्च कर आलीशान इमारतों को खड़ा करने वाले एक छोटी सी पहल इस नन्हे पक्षी के लिये करें तो ये प्रकृति और इस चिड़िया पर परोपकार होगा अपने मकानों के छज्जों आदि में कृत्रिम घोंसलों को लगाकर गौरय्या को भी आप अपने साथ रख सकते हैं आपकी शानदार इमारत भले वैभवता के प्रदर्शन करती हो लेकिन ये केवल खुदगर्ज़ी मात्र ही होगी गौरय्या का इतना अधिकार तो इंसानो पर बनता है।

विश्व गौरैया दिवस को गौरैया के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। इसके अलावा ये शहरी वातावरण में रहने वाले आम पक्षियों के प्रति जागरूकता लाने हेतु भी मनाया जाता है। इसे हर साल 20 मार्च के दिन मनाया जाता है। ये नेचर फोरेवर सोसाइटी (भारत) और इको-सिस एक्शन फ़ाउंडेशन (फ्रांस) के मिले जुले प्रयास के कारण मनाया जाता है।नासिक निवासी मोहम्मद दिलावर ने घरेलू गौरैया पक्षियों की सहायता हेतु नेचर फोरेवर सोसाइटी की स्थापना की थी। इनके इस कार्य को देखते हुए टाइम ने 2008 में इन्हें हिरोज ऑफ दी एनवायरमेंट नाम दिया था। विश्व गौरैया दिवस मनाने की योजना भी इन्हीं के कार्यालय में एक सामान्य चर्चा के दौरान बनी।

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