देश के जाने माने कवि डॉ. कुंवर बैचैन की कोरोना से मौत, साहित्य जगत शोक में डूबा

देश के जाने-माने कवि व मूल रूप से यू पी के मुरादाबाद के निवासी डॉ. कुंअर बेचैन का गुरुवार को निधन हो गया. वह 78 साल के थे. बीते दिनों कुंअर बेचैन और उनकी पत्नी कोरोना संक्रमित हुए थे. उनका नोएडा स्थित कैलाश हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था. मशहूर कवि कुमार विश्‍वास ने अपने ट्विटर हैंडल से इस बात की जानकारी दी।

कोरोना ने मेरे मन का एक कोना मार दिया
कवि कुमार विश्‍वास ने ट्वीट में लिखा, ‘कोरोना से चल रहे युद्धक्षेत्र में भीषण दुःखद समाचार मिला है. मेरे कक्षा-गुरु, मेरे शोध आचार्य, मेरे चाचाजी, हिंदी गीत के राजकुमार, अनगिनत शिष्यों के जीवन में प्रकाश भरने वाले डॉ कुंअर बेचैन ने अभी कुछ मिनट पहले ईश्वर के सुरलोक की ओर प्रस्थान किया. कोरोना ने मेरे मन का एक कोना मार दिया.’

वहीं इससे पहले 15 अप्रैल को भी कुमार विश्‍वास ने एक ट्वीट किया था. जिसमें उन्होंने लिखा था, ”रात 12 बजे तक प्रयास करता रहा, सुबह से प्रत्येक परिचित डॉक्टर को कॉल कर चुका हूं. हिंदी के वरिष्ठ गीतकार गुरुप्रवर डॉ कुंअर बेचैन का कॉसमॉस हॉस्पिटल आनंद विहार दिल्ली में कोविड उपचार चल रहा है. ऑक्सीजन लेवल सत्तर पहुंच गया है. तुरंत वेंटि‍लेटर की आवश्यकता है. कहीं कोई बेड ही नहीं मिल रहा.’ इसके बाद ही उन्‍हें नोएडा के कैलाश अस्‍पताल में शिफ्ट किया गया था।
मुरादाबाद के निवासी थे कुंवर
हिंदी जगत के मशहूर साहित्यकार कुंअर बेचैन यूपी के मुरादाबाद जिले के उमरी गांव के रहने वाले थे. उन्होंने अपनी पढ़ाई चंदौसी के एसएम कॉलेज से की थी. कुंअर बेचैन ने तमाम गीत, गजल और उपन्‍यास लिखे हैं. बेचैन जी गाजियाबाद के एम.एम.एच. महाविद्यालय में हिन्दी विभागाध्यक्ष भी रहे हैं. उनका नाम सबसे बड़े गीतकारों और शायरों में शामिल किया जाता था. आपको बता दें कि उनका पूरा नाम डॉ. कुंअर बहादुर सक्‍सेना था, लेकिन वह ‘बेचैन’ उपनाम से रचनाएं लिखा करते थे. यही कारण है कि पूरे देश में उन्हें डॉ. कुंअर बेचैन के नाम से जाना जाता है।

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