‘समाज के आईने में महिला सशक्तिकरण’

(हिमाद्रि मिश्रा एडवोकेट)

नारीवाद/स्त्रीवाद-स्त्री को सशक्त बनाना मात्र नहीं है। क्यूं की स्त्री तो जन्म से ही सशक्त है । अपितु समाज में यह बतलाना है की नारी की सशक्तता को कितनी सहजता के साथ स्वीकार किया जाए।क्यू की वह स्त्री,मां ,बेटी, बहन, पत्नी होने से पहले एक मनुषी है। आज कोविड़ 19 महामारी की लड़ाई में महिलाओं ने पुरुषो के साथ कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया है और फिर से साबित किया है की वह किसी भी क्षेत्र में कमजोर नहीं है। जब स्वयं ईश्वर ने अपनी इस रचना को इतना सशक्त रूप दिया है तो समाज क्यू नही इसे सहजता से स्वीकारता, क्यू उसके अधिकारों का हनन करता है और कमतर समझता है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर सही मायने में समाज को जागरूक करने की आवश्यकता है जहां नारी की सशक्तता को सहजता से स्वीकार किया जाए तथा उनके जीवन में बदलाव लाया जाए। तो आइए हम सब इसकी शुरुवात अपने घरों से करें। नारी कभी अबला नहीं रही सिर्फ़ अपनी ताकत पहचान ने में देर कर देती है।।

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2 thoughts on “‘समाज के आईने में महिला सशक्तिकरण’

  1. कभी न हारी………नारी
    नारी यह शब्द अपने आप मे अपार शक्ति समेटे हुए हैं। यह नाम शक्ति काई जीता जागता रूप है। सूर्योदय से पहले जागने की शक्ति समय से आगे अनवरत भागने की शक्ति। नारी की अनेक भुजाएं-
    किसी भुजा में धर्म कर्म है, तो किसी मे सन्तान के माथे पर प्यार भरी थपथपाहट, किसी मे अपार ममत्व भरी महिला है।
    हर रूप में सम्मानीय, वंदनीय है नारी.

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