ख्वाजा खुशहाल मियाँ की चिल्लागाह पर गरजा बुलडोजर, प्रशासन ने लिया कब्जा

मोरना/मुज़फ्फरनगर।भोपा थाना क्षेत्र के गाँव बिहारगढ़ मे स्थित हज़रत ख़्वाजा खुशहाल मियां की चिल्लाहगाह पर बुधवार को प्रशासन ने कार्रवाई शुरू करते हुवे पुरानी इमारत को गिराने का कार्य शुरू कर दिया।

प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी प्रभाग मुज़फ्फरनगर सूरज सिंह के निर्देशन में हज़रत ख़्वाजा खुशहाल मियां की चिल्लाहगाह की इमारत को जे सी बी मशीन द्वारा गिराने का कार्य भारी पुलिस बल के बीच गिराने का कार्य आरंभ किया गया।वन विभाग द्वारा चिल्लाहगाह को वन भूमि में बताते हुवे वर्षों से कार्रवाई जारी है बुधवार को चिल्लाहगाह पर कार्रवाई की गयी वहीं चिल्लाहगाह के प्रबंधक सज्जादा सूफी जव्वाद ने बिल्डिंग पर स्टे होने की जानकारी दी है वहीं पिरानी नाज़िया आफरीदी ने मौके पर उपस्थित अधिकारियों से बिल्डिंग तोड़ने का विरोध किया व धार्मिक स्थल को तोड़ना गैर कानूनी बताते हुवे बल पूर्वक अनुचित कार्रवाई करने की बात बताई है ।।
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बिहारगढ स्थित हजरत ख्वाजा खुशहाल मियां की चिल्लागाह पर बुधवार को प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए बुलडोजर द्वारा भवन गिराने का कार्य शुरू कर दिया है। वहीं चिल्लागाह को तोडने को लेकर क्षेत्र में सनसनी फैल गयी है। चिल्लागाह के प्रबन्धन ने प्रशासन की कार्रवाई को अनुचित बताते हुए कार्रवाई का विरोध किया। वहीं देर शाम चिल्लागाह पर सेवकों, अनुयायियों तथा साधु संतों ने कार्रवाई का विरोध करते हुए इंसाफ की मांग सरकार से की।
भोपा थाना क्षेत्र के ग्राम बिहारगढ में स्थित हजरत ख्वाजा खुशहाल मियां की चिल्लागाह पर भारी पुलिस बल के बीच ध्वस्त करने का कार्य शुरू किया गया। पुराने भवन को चिन्हित कर तीन बुलडोजर द्वारा ध्वस्त करने का कार्य शुरू हुआ। डेढ घंटे चली कार्रवाई में कुछ पिलरों को तोडने का प्रयास किया व भवन की खिडकियां तोड दी गयी। इसके पूर्व क्षेत्राधिकारी भोपा सोमेन्द्र नेगी व थानाध्यक्ष भोपा सूबेसिंह यादव द्वारा भवन से सामान निकलवाया गया तथा माईक द्वारा भवन को पूर्ण रूप से खाली कर देने की घोषणा की गयी। इसके उपरान्त कमरे के ताले तोडकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गयी। भवन के ध्वस्तीकरण के दौरान पीरानी नाजिया आफरीदी द्वारा ध्वस्तीकरण को कानूनी प्रक्रिया के विरूद्ध बताया गया व कार्रवाई को रोकने की गुहार लगाई गयी व स्टे होने की बात बताकर अधिकारियों से कार्रवाई के आदेश दिखाने को भी कहा गया। कार्रवाई के दौरान चिल्लागाह के आसपास पुलिस द्वारा नाकेबन्दी की गयी तथा बाहर से आने वालों को चिल्लागाह में प्रवेश करने से रोक दिया गया। इस अवसर पर एसडीएम जानसठ अजय अम्बस्ट, एसपी देहात नेपाल सिंह, वन क्षेत्राधिकारी सिंहराज पुण्डीर, एक एक कम्पनी आरआरएफ व पीएसी बल के अतिरिक्त भारी पुलिस फोर्स उपस्थित रही। देर शाम चिल्लागाह पर पहुंचे सेवक, अनुयायी व साधु संतों ने कार्रवाई को असंवैधानिक बताया।

पिरानी गुहार लगाती रही, चलता रहा बुलडोजर
चिल्लागाह के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से खिन्न पीरानी नाजिया आफरीदी अपर जिलाधिकारी प्रशासन अमित कुमार व डी.एफ.ओ. सूरज सिंह से गुहार लगाती रही तथा माननीय न्यायालय द्वारा जारी स्टे व अन्य कागजात को दिखाती रही किन्तु अधिकारी जवाबों से कन्नी काटते नजर आये। अंत में पीरानी ने बुलडोजर के सामने खडे होकर मर जाने की चेतावनी भी दी तथा पूरी कार्रवाई को कानून के विरूद्ध बताया।
पुरानी है वन विभाग की दावेदारी
बिहारगढ चिल्लागाह पर वन विभाग की दावेदारी काफी पुरानी है। डी.एफ.ओ. सूरज सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि पूर्व में वन भूमि को तीस साल के पट्टे पर लिया गया था। 2005 में पट्टे की सीमा समाप्त होने पर नोटिस तामील किये गये, जिनका कोई संतुष्ट जवान चिल्लागाह प्रबन्धन द्वारा प्रस्तुत नहीं किया गया। जिस प्रकार भूमि का कोई कोई नवीनीकरण न हुआ। वन विभाग की 6.5 हेक्टेयर से अधिक भूमि को खाली कर देने के नोटिस चिल्लागाह प्रबन्धन को भेजे जाते रहे हैं। 2016 व गत अगस्त माह में नोटिस को तामील कर भवन को खाली कर देने को कहा गया था तथा वन विभाग द्वारा भूमि को वन विभाग की दर्शाकर बोर्ड लगाया गया था। उच्च न्यायालय के आदेश पर बुधवार को भवन गिराने का कार्य आरम्भ किया गया, जिसमें धार्मिक स्थल व आवास से अलग निर्मित भवन के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की गयी है। कार्रवाई वाले स्थान की रेड टेपिंग कर भवन को खाली करा लिया गया था।

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