दारा के विचारों को दुनिया के सामने लाने का प्रयास कर रही केंद्र सरकार

धर्मद्रोह के अभियान में दारा शिकोह को औरंगजेब द्वारा सुनाई गयी थी मौत की सजा
-भारतीय संस्कृति से बहुत प्रभावित था दारा, किया था श्रीमद्भगवद्गीता का फारसी में अनुवाद

लियाकत मंसूरी
मेरठ। दारा शिकोह भारतीय संस्कृति से बहुत प्रभावित था। श्रीमद्भगवद्गीता का फारसी में अनुवाद किया था। 52 उपनिषदों का भी अनुवाद किया था। सभी धर्म और मजहबों का आदर करता था। हिन्दू धर्म, दर्शन व ईसाई धर्म में विशेष दिलचस्पी रखता था। उसके इन उदार विचारों से कुपित होकर कट्टरपंथियों ने उस पर इस्लाम के प्रति अनास्था फैलाने का आरोप लगाया। इस परिस्थिति का दारा के तीसरे भाई औरंगजेब ने खूब फायदा उठाया। धर्मद्रोह के अभियोग में दारा को मौत की सजा दी गई थी। 9 सितम्बर 1659 को इस सजा के तहत दारा शिकोह का सिर काट लिया गया। दारा जब तक जिंदा रहा, भारतीय दर्शन और हिंदुत्व को पश्चिमी दुनिया के सामने रखने का काम किया। अब केंद्र सरकार दारा शिकोह की कब्र खोज रही है। दरअस्ल, भाजपा को लगता है कि दारा शिकोह जैसे चेहरे भारतीय संस्कृति की उसी सोच को आगे बढ़ाते थे, जिसमें संघ और बीजेपी यकीन रखती है। बीजेपी सरकार साल 2017 में दिल्ली के डलहौजी सड़क का नाम बदलकर दारा शिकोह मार्ग कर चुकी है।दारा शिकोह की कब्र की तलाश हो रही है। यह तलाश कोई और नहीं बल्कि भारत सरकार करा रही है। दिल्ली स्थित हुमायूं के मकबरा में दारा शिकोह दफन तो हैं लेकिन, उसकी कब्र कौन सी है यह पता नहीं। इस मकबरे में जो कब्र हैं, उसमें हुमायूं को छोड़कर किसी अन्य पर कोई शिलालेख नहीं है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने पिछले साल पुरातत्व और इतिहासकारों की एक सात सदस्यीय कमेटी बनाई थी, जिसके जिम्मे दारा शिकोह की कब्र की पहचान करने का काम सौंपा गया था। कोरोना की वजह से वह अपने काम की शुरूआत ही नहीं कर पायी, लेकिन अब यह कमेटी हुमायूं के मकबरे में पहुंच रही है। एएसआई के निदेशक टीजे अलोने की अध्यक्षता में बनी इस कमेटी में जाने-माने पुरातत्ववेत्ता आरएस बिष्ट, सैयद जमाल हसन, केएन दीक्षित, बीआर मणि, केके मुहम्मद, सतीश चंद्रा और बीएम पांडे शामिल हैं। दारा शिकोह शाहजहां के बड़े पुत्र थे, इस नाते वह उनके बाद राजगद्दी के स्वाभाविक दावेदार भी थे लेकिन, उनके छोटे भाई औरंगजेब ने उनका सिर कलम करवाकर भारत के सिंघासन पर अपना अधिकार जमाया था। धर्मद्रोह के अभियोग में दारा को मौत की सजा दी गई थी। 9 सितम्बर 1659 को इस सजा के तहत दारा शिकोह का सिर काट लिया गया। उसका बड़ा पुत्र सुलेमान पहले से ही औरंगजेब का बंदी था। 1662 ईसवी में औरंगजेब ने जेल में उसकी भी हत्या कर दी। दारा के दूसरे पुत्र सेपरहर शिकोह को बख़्श दिया गया, जिसकी शादी बाद में औरंगजेब की तीसरी लड़की से हुई।
इंजिनियर संजीव कुमार कर चुके हैं कोशिश
भले ही इस बार दारा शिकोह की कब्र खोजने में सरकार की कमेटी जुटी हो लेकिन, इससे पहले एक कोशिश दिल्ली म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के इंजिनियर संजीव कुमार कर चुके हैं। तमाम एतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर उन्होंने एक रिपोर्ट तैयार भी की है जोकि अब उन्होंने सरकारी कमेटी को सौंप दी है। हुमायूं का मकबरा परिसर मुगलिया खानदान की शाही कब्रगाह हुआ करता था।
औरंगजेब ने बड़ी क्रूरता के साथ किया था सिर कलम
120 कक्षों में 140 कब्रों वाले इस परिसर से दारा की कब्र ढूंढ निकालना अपने आप में मुश्किल काम है। शाहजहांनामा में उल्लेख मिलता है कि औरंगजेब ने दारा शिकोह को शिकस्त देकर उसे बंदी बना लिया था। बाद में उसे बेड़ियों में कैद कर दिल्ली लाया गया था। जहां बड़ी क्रूरता से उसका सिर कलम कर औरंगजेब ने उसे तोहफे के तौर पर अपने पिता के पास आगरा भेज दिया, जबकि बाकी शरीर को हुमायूं का मकबरा परिसर में दफना दिया गया। कहा जाता है कि औरंगजेब ने दारा का अंतिम संस्कार तक ढंग से नहीं करवाया।

कमेटी के सदस्य केके मुहम्मद

कब्र खोज रही सरकारी कमेटी के सदस्य केके मुहम्मद का कहना है कि मुगल परपंरा में अकबर के बाद दारा शिकोह ही ऐसा व्यक्तित्व है, जो सही मायनों में न सिर्फ धर्म निरपेक्ष है, बल्कि सभी धर्मों का आदर करता है। इसके अलावा दारा शिकोह ने भारतीय दर्शन और हिंदुत्व को पश्चिमी दुनिया के सामने रखने का काम किया। उसने अपने समय में पश्चिमी दुनिया से आए विद्धान यात्रियों की मदद से हिंदुत्व और इस्लाम को दुनिया के सामने रखने का काम किया।
संघ कर चुका है संगोष्ठी का आयोजन
अगर सियासी नजरिये से देखा जाए तो संघ और बीजेपी को लगता है कि दारा शिकोह जैसे चेहरे भारतीय संस्कृति की उसी सोच को आगे बढ़ाते थे, जिसमें संघ और बीजेपी यकीन रखती है। बीजेपी सरकार साल 2017 में दिल्ली के डलहौजी सड़क का नाम बदलकर दारा शिकोह मार्ग कर चुकी है। सितंबर 2019 में संघ ने दारा की आध्यात्मिक विरासत को सामने लाने के लिए एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन भी किया। माना जाता है कि दारा जैसे किरदारों के योगदान को रेखांकित कर बीजेपी और संघ कहीं न कहीं अपनी मुस्लिम विरोधी छवि को भी कम करना चाहते हैं। कब्र की अगर पहचान हो जाती है तो इस तरह के संकेत है कि उसे सरकार के स्तर से खास तवज्जोह दी जाएगी, ताकि लोग उनकी विचारों से अवगत हो सकें।

भारतीय जनता पार्टी का मानना है कि राष्ट्रवाद के साथ सबका साथ-सबको विकास हो। असली सेकुलर के नाम पर विभिन्न राजनीतिक पार्टियों ने रोटी सेंकने का काम किया है। दारा शिकोह के बारे में ऐतिहासिक तौर पर कहा जाता है कि वह सभी धर्मों का सम्मान करता था, हम भी राष्ट्रवाद के साथ उसका सम्मान करते हैं।

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