ऐसी देसी फ़िल्म, जिसे देख लोग रो पड़े! यूट्यूब पर धमाल मचा रही ‘लफड़ा’

(फ़िल्म समीक्षा: लफड़ा (देहाती फ़िल्म)

बहुप्रतीक्षित फिल्म “लफड़ा” आखिरकार यूट्यूब पर प्रदर्शित हुई और आते ही उसने दर्शकों को मनोरंजन के साथ-साथ कहानी से ऐसा जोड़ा के कई लोग फिल्म देखकर भावुक ही नही हुए बल्कि कई तो रोने भी लगे।फिल्म को लेकर आ रहे कमेंट में इसे आसानी से देखा समझा जा सकता है।
जी हां! लफड़ा फिल्म का हरियाणवी-देहाती फिल्म धाकड़ वर्ल्ड प्रोडक्शन से जुड़े लोगों ने काफी प्रचार प्रसार किया था और कई मंत्रियों ने भी इसके पोस्टर को लांच किया था।

यह फिल्म राजलक्ष्मी बैनर तले बनी और यूट्यूब के धाकड़ वर्ल्ड चैनल पर रिलीज की गई। फिल्म में धाकड़ छोरा उत्तर कुमार का हालांकि रोल कम है और वह मेहमान कलाकर के तौर पर दिखाई दिए परंतु फिल्म का ताना बाना उन्ही के इर्द गिर्द है हैं।

अब तक प्रोडक्शन देखने वाले मोनू धनकड़ ने बहुत ही शानदार अभिनय किया है। उनके द्वारा की गई पागल की भूमिका बिल्कुल जीवंत है। उनके चेहरे के हाव भाव संवाद से दशक कई बार हिल जाता है।फिल्म में मुजफ्फरनगर के विकास बालियान एक बार फिर अपनी दमदार और धाकड़ पिता की भूमिका में अपने किरदार से न्याय करते नजर आए हैं। राजीव सिरोही ने एक कट्टर मुस्लिम जमालुद्दीन की भूमिका को जबरदस्त तरीके से जिया। उन्होंने जमालुद्दीन के किरदार को इस तरह उभरा के दर्शक सहभ से गए। सुरजीत सिरोही प्रिंसिपल के किरदार में जमे तो वही राजेंद्र कश्यप हमेशा की तरह दर्शकों को गुदगुदाने में कामयाब रहे। वही हीरो के दोस्त की भूमिका में दिखे अमित सहोता ने दिखा दिया कि वह अभिनय की दुनिया में बहुत आगे तक जाएंगे। वही रतन लाल ‘जानू’, रवि मलिक, शिवांक बालियान भी फ़िल्म में दिखाई दिये।

फिल्म में मां की भूमिका में संतोष जांगरा ने जबरदस्त कमाल किया खासकर पति की मृत्यु के बाद गुमसुम सी महिला की भूमिका में तो उन्होंने लोगों को रोने को मजबूर कर दिया।फिल्म अभिनेत्री और हरियाणा की जानी-मानी कलाकार आरजू ढिल्लों को भी पसंद किया गया, प्रिया सिंधु, सपना चौधरी, ज़िया चौधरी, वर्षा उपाध्याय सारिका भी फिल्म में अपनी अपनी भूमिका को अच्छी तरह निभाने में सफल रहे। बिजेंद्र सिंह, जेके माहुर आदि भी नजर आए। निर्देशन प्रताप धामा और विवेक शर्मा ने किया। प्रताप धामा ने साबित किया कि वह एक सफल हीरो के साथ साथ निर्देशन के क्षेत्र में भी अलग ही टैलेंट रखते हैं।

फिल्म की एडिटिंग हरीश चन्द्रा ने की। फिल्म के लोगों की जुबान पर चढ़ चुके एक मात्र गीत ‘तेरे सिवा रब से दुआ क्या मांगू… तू ही ना मिले तो बता क्या मांगू…’ को राजू मलिक ने अपने स्वर दिए।कहानीकार विवेक शर्मा रहे। गीतों के बोल राजीव अजनबक ने लिखे। कैमरामैन रवि कुमार और पंकज तेजा थे। मेकअप मैन लकी अली रहे। यह फिल्म कई प्रकार से दर्शकों को रोमांचित करती रही। फ़िल्म ने कभी गुदगुदाया गया तो कई बार गिलम देखते दर्शकों की आंखे गीली भी हुई।

फिल्म में जहां “ऑनर किलिंग” को दिखाया गया तो वही जल्दबाजी में लिए गए निर्णय से परिवार किस तरह खत्म हो जाते हैं यह भी प्रदर्शित किया गया। जल्दबाजी में कोई भी निर्णय लेना गलत है और से कितना नुकसान होता है यह फिल्म का एक बड़ा संदेश था।

वहीं यह भी दिखाया गया के पिता पुत्र का रिश्ता ऐसा है जिसमें दिखावट नहीं होती, दोनों एक दूसरे के प्रति समर्पित तो होते हैं परन्तु अपने भावो को कभी ना पुत्र दर्शा पाता कि वह अपने पिता से बहुत प्यार करता है और ना ही पिता यह प्रदर्शित कर पाता है कि उसका पुत्र उसके लिए सब कुछ है।

कुल मिलाकर 2 घंटे की यह फिल्म दर्शकों को बहुत पसंद आ रही है और एक बार फिर देहाती फिल्म अपनी कहानी को लेकर दर्शकों में अपना स्थान बनाए हुए हैं।

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