ईदगाह-कब्रिस्तान कमैटी पर भड़के सभासद, गबन के आरोप के साथ आंदोलन का ऐलान

मुजफ्फरनगर के शामली रोड स्थित ईदगाह एवं कब्रिस्तान ऐसी वक्फ संपत्ति है, जिसकी आमदनी वर्ष में लाखों में है। जिसमें 50 से ज्यादा दुकानें हैं, जिनका किराया आता है। मगर इसके तहत आने वाले कब्रिस्तान के हालात इतने खस्ता है कि यहां देखकर नहीं लगता कि यहां पर कोई कमेटी भी काम कर रही है या फ़िर कुछ आमदनी भी है। इन सभी सवालों को नगरपालिका के सभासद सत्तार मंसूरी ने उठाया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके ईदगाह व कब्रिस्तान कमेटी से सालाना आमदनी का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि यह हिसाब सार्वजनिक नहीं किया जाता, तो लाॅकडाउन के बाद एक बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने सवाल खड़ा किया कि ईदगाह-कब्रिस्तान कमेटी के पास सैंकड़ों दुकानों का किराया प्रतिमाह आ रहा है, जिसके हिसाब से कमैटी के पास कई करोड़ रुपए जमा होने चाहिए, लेकिन वकफ कमैटी के जिम्मेदार इस हिसाब को सार्वजनिक करने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि खालापार स्थित कब्रिस्तान गोरे गरीबा की कोई आमदनी नहीं है। इसके बावजूद भी हर रोज सफाई व निर्माण कार्य चलता रहता है। कब्र खोदने का मेहनताना 700 रुपए निर्धरित है, लेकिन यहां करोड़ों काफंड होने के बाद भी कब्र खुदाई के 1200 रुपए लिए जा रहे हैं, जो कि नाजायज है। उन्होंने कहा कि मिट्टी भराव की यहां सख्त जरूरत है। कब्रिस्तान में गड्ढे हो चुके हैं। हल्की सी बारिश होते ही यहां तालाब बन जाता है। सभासद ने कहा कि इस मुद्दे पर वे समाज के सभी छोटे-बडे लोगों को साथ लेकर बड़ा आंदोलन करेंगे।

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