विदेश भेजने के नाम पर डेढ़ लाख की ठगी… जमीन गिरवी रखकर दिए थे पैसे

फर्जी लाइसेंस दिखाकर रचा पूरा जाल, मेडिकल कराकर भी नहीं दिया वीज़ा–टिकट; झारखंड के युवक ने पुलिस से लगाई न्याय की गुहार

मुजफ्फरनगर। जिले में विदेश भेजने के नाम पर बड़े पैमाने पर ठगी का एक और मामला सामने आया है। झारखंड के रहने वाले एक युवक ने आरोप लगाया है कि दो कथित एजेंटों ने उसे सऊदी अरब का वर्क वीज़ा दिलाने का झांसा देकर डेढ़ लाख रुपये हड़प लिए और अब फोन बंद कर फरार हो गए हैं। युवक ने मंगलवार को SSP कार्यालय पहुंचकर विस्तृत शिकायत दर्ज कराई है।

रिश्तेदारी में आया युवक ठगी का शिकार

पीड़ित तैयब, जो झारखंड के जिला लोहड़दगा का रहने वाला है, कुछ समय पहले अपनी रिश्तेदारी में ग्राम खेड़ी दूधाधारी आया हुआ था। वहीं उसकी मुलाकात गांव के ही मकबूल और उसके साथी शादाब उर्फ सोनू (निवासी कसौली) से हुई। दोनों ने खुद को सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त रजिस्टर्ड एजेंट बताकर तैयब और उसके रिश्तेदारों का विश्वास जीत लिया।

हमने अब तक कई लोगों को विदेश भेजा है…’ कहकर फंसाया

तैयब के अनुसार, दोनों एजेंट रिश्तेदार शौकिन के घर आए और बातचीत के दौरान दावा किया कि उन्होंने अब तक कई दर्जन लोगों को देश–विदेश में जॉब लगवाई है।
उन्होंने एक फर्जी विदेशी भर्ती लाइसेंस भी दिखाया, जिस पर सरकारी मोहर और हस्ताक्षर का नकली प्रिंट लगा हुआ था। इन्हीं दस्तावेजों को देखकर पीड़ित को उन पर भरोसा हो गया।

सऊदी अरब की ड्राइविंग जॉब का लालच

एजेंटों ने तैयब को बताया कि उनके पास सऊदी अरब का ड्राइविंग वीज़ा उपलब्ध है जिसमें—

1500 रियाल (करीब ₹35,000) मासिक वेतन,

रहने–खाने की पूरी सुविधा,

और मालिक की तरफ से मेडिकल व इंश्योरेंस शामिल होगा।

उन्होंने यह भी दावा किया कि यह कन्फर्म वीज़ा है और उम्मीदवार को केवल
₹2 लाख रुपये और ओरिजिनल पासपोर्ट देना होगा।

फोन-पे के जरिए 1.5 लाख रुपये ट्रांसफर

एजेंटों के झांसे में आकर तैयब ने फोन-पे ट्रांजेक्शन के माध्यम से
1,50,000 रुपये भेज दिए। इसके बाद दोनों एजेंट उसे दिल्ली ले गए और वहाँ मेडिकल टेस्ट भी कराया। मेडिकल का ₹9000 भी उसने अपनी जेब से दिया।

तैयब का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद एजेंटों ने कहा कि “एक सप्ताह में टिकट और वीज़ा मिल जाएगा।”

महीनों तक टालमटोल, फिर अचानक पासपोर्ट डाक से भेज दिया

लेकिन कई सप्ताह बीत गए और टिकट की कोई सूचना नहीं मिली।
जब भी तैयब एजेंटों से संपर्क करता, वे नए-नए बहाने बनाते—

“फाइल एम्बेसी में रुकी है”

“वीज़ा अपॉइंटमेंट नहीं मिल रहा”

“RT-PCR या वैक्सीन अपडेट चाहिए”

धीरे–धीरे दोनों एजेंटों ने फोन उठाना बंद कर दिया।
कुछ समय बाद उन्होंने तैयब का पासपोर्ट डाक से वापस भेज दिया, और उसके बाद से पूरी तरह गायब हो गए।

जमीन गिरवी रखकर चुकाया था पैसा, अब परिवार तंगहाल

तैयब ने बताया कि विदेश जाने के लिए उसने और उसके परिवार ने अपनी जमीन गिरवी रखकर पैसे जुटाए थे। ठगी का शिकार होने के बाद घर की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई है कि खाने तक के लाले पड़ गए हैं।

तैयब का आरोप है कि जब उसने पैसे वापस मांगे तो एजेंटों ने उसे धमकाना शुरू कर दिया।

ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के सबूत लेकर SSP के पास पहुँचा पीड़ित

तैयब ने SSP कार्यालय में लिखित शिकायत दी है। उसके पास—

फोन-पे ट्रांजेक्शन की फोटो कॉपी,

मेडिकल बिल,

चैट रिकॉर्ड,

और एजेंटों के फर्जी लाइसेंस की तस्वीरें

मौजूद हैं। उसने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है ताकि उसकी रकम वापस मिल सके और आरोपियों को गिरफ्तार किया जा सके।

पीड़ित की गुहार — “पुलिस और सरकार ही अब सहारा हैं”

तैयब का कहना है..

> “हमने जमीन गिरवी रखकर पैसे दिए थे। अब घर में खाने तक के लिए भी पैसा नहीं बचा। एजेंट फोन उठाना बंद कर गए हैं और धमकी दे रहे हैं। अब पुलिस और सरकार ही हमारी आखिरी उम्मीद हैं।”

पुलिस मामले की जांच में जुटी

SSP कार्यालय के अधिकारियों ने शिकायत प्राप्त होने की पुष्टि करते हुए कहा है कि दस्तावेजों की जांच की जा रही है। जल्द ही मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी।