स्टेडियम और नियमित कोचिंग से बदलेगी ग्रामीण क्षेत्र की खेल प्रतिभाओं की दिशा व दशा
काज़ी अमजद अली
मुज़फ्फरनगर। एक दौर था जब खेलों को केवल मनोरंजन और शारीरिक फिटनेस तक सीमित माना जाता था, लेकिन बदलते समय के साथ खेल अब आजीविका और सम्मानजनक करियर का मजबूत माध्यम बन चुके हैं। सरकार की खेलो इंडिया जैसी योजनाओं और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय खिलाड़ियों की बढ़ती भागीदारी ने ग्रामीण युवाओं को भी खेल के मैदान की ओर आकर्षित किया है। मुज़फ्फरनगर जनपद का मोरना क्षेत्र इसका जीवंत उदाहरण है, जहां प्रतिभा की कोई कमी नहीं, लेकिन संसाधनों का अभाव आज भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

मोरना, भोपा और ककरौली क्षेत्र के गांवों में बड़ी संख्या में ऐसे युवक हैं जो फुटबॉल, बॉक्सिंग, कबड्डी, कुश्ती, वॉलीबॉल, एथलेटिक्स और निशानेबाजी जैसे खेलों में असाधारण शारीरिक क्षमता रखते हैं। इन युवाओं में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने की पूरी क्षमता है, लेकिन अभ्यास के लिए मानक खेल मैदान, प्रशिक्षित कोच और आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं की कमी उनकी प्रगति को सीमित कर देती है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंची क्षेत्र की प्रतिभाएं
भोपा निवासी फुटबॉल खिलाड़ी नीशू कुमार ने सीमित संसाधनों के बावजूद कठिन परिश्रम, अनुशासन और संघर्ष के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। इसी तरह भोकरहेड़ी के सूर्यवीर सहरावत और हर्षप्रीत सहरावत ने बॉक्सिंग में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेकर न केवल क्षेत्र बल्कि पूरे जनपद को गौरवान्वित किया है। इनके अलावा कई युवा वॉलीबॉल, कुश्ती और एथलेटिक्स में प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक जीत चुके हैं।
पारंपरिक खेलों में लौटता उत्साह
ग्रामीण अंचलों में पारंपरिक खेल कबड्डी के प्रति युवाओं का बढ़ता रुझान एक सकारात्मक संकेत है। मिट्टी से जुड़े इस खेल में युवाओं की दिलचस्पी बढ़ी है, लेकिन उचित प्रशिक्षण और सुरक्षित मैदानों के अभाव में प्रतिभाएं अक्सर शुरुआती दौर में ही दम तोड़ देती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, तो यही ग्रामीण युवा प्रो-कबड्डी जैसी बड़ी प्रतियोगिताओं तक पहुंच सकते हैं।
स्टेडियम और कोचिंग की उठती मांग
अब क्षेत्र में युवाओं और खेल प्रेमियों द्वारा स्टेडियम, खेल मैदान और नियमित कोचिंग की मांग जोर पकड़ रही है। युवाओं का कहना है कि यदि प्रत्येक ब्लॉक में कम से कम एक बहुउद्देशीय स्टेडियम और प्रशिक्षित कोच की नियुक्ति कर दी जाए, तो ग्रामीण प्रतिभाएं शहरों की ओर पलायन करने के बजाय अपने क्षेत्र में ही बेहतर प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगी।
जनप्रतिनिधियों के प्रयास
युवा भाजपा नेता अमित राठी ने बताया कि शुकतीर्थ में एक खेल अकादमी शुरू की गई है, जहां कुश्ती, कबड्डी और वॉलीबॉल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे क्षेत्र के युवाओं को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन यह व्यवस्था पूरे ब्लॉक के लिए अपर्याप्त है।
जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. वीरपाल निर्वाल ने बताया कि क्षेत्र में खेल सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भोकरहेड़ी में एक आधुनिक स्टेडियम प्रस्तावित है, जिससे आसपास के गांवों के युवाओं को लाभ मिलेगा। शासन स्तर पर प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं और स्वीकृति मिलने के बाद कार्य शुरू किया जाएगा।
स्थानीय लोगों की मांग
भोकरहेड़ी निवासी सतीश सहरावत, जो वर्षों से खेल सुविधाओं की मांग करते आ रहे हैं, ने कहा कि प्रत्येक इंटर कॉलेज में खेल मैदान और खेल प्रशिक्षक की नियुक्ति अनिवार्य होनी चाहिए। इसके साथ ही मोरना ब्लॉक के अधिक जनसंख्या वाले गांवों—मोरना, भोपा और ककरौली—में अलग-अलग स्टेडियम बनाए जाने चाहिए।
स्थानीय युवाओं का कहना है कि यदि उन्हें सही मार्गदर्शन, आधुनिक उपकरण और नियमित अभ्यास का अवसर मिले, तो वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने में सक्षम हैं। ग्रामीण अंचलों की प्रतिभा को यदि समय रहते तराशा गया, तो यह क्षेत्र खेल मानचित्र पर एक नई पहचान बना सकता है।
मोरना क्षेत्र के युवाओं में प्रतिभा, मेहनत और जुनून की कोई कमी नहीं है। जरूरत है तो केवल मजबूत खेल ढांचे, प्रशिक्षित कोच और सरकारी सहयोग की। यदि इन बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा किया जाए, तो ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाएं न केवल अपनी दिशा बदलेंगी, बल्कि क्षेत्र और देश का नाम भी रोशन करेंगी।















