गन्ने का घटा उत्पादन बनी चिंता, सरसों के पीले रंग से आई रंगत
नकली पेस्टीसाइड के कारण घट रही भूमि की उर्वरा क्षमता
काज़ी अमजद अली
कृषि क्षेत्र मे आर्थिक रीढ़ माने जाने वाली गन्ने की फ़सल का उत्पादन इस वर्ष आधे मे सिमट गया है। घटते उत्पादन से चिंतित किसान की उम्मीदें अब सरसों के उत्पादन पर टिकी हैं। सरसों की फ़सल के अच्छे उत्पादन की आशा किसानो ने जताई है तो वहीं गन्ने की फ़सल के उत्पादन को लेकर उपाय करने की मांग सरकार से की है।
मुज़फ्फरनगर जिले के मोरना क्षेत्र मे कृषि को रोजगार और आर्थिक सक्षमता का साधन माना जाता है। फसलों का उत्पादन व भाव तथा उनका उचित निस्तारण किसान की आमदनी को प्रभावित करता है।किसान की आमदनी बढ़ने पर क्षेत्र मे विकास को गति मिलती है। तो वहीं किसान की आमदनी घटने पर विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना निश्चित है।आधुनिक तरीको ने फसलों के उत्पादन मे इजाफा ज़रूर किया।किन्तु लगातार बढ़ती लागत चिंता का विषय है।बड़ी लागत के बाद उगाई गयी फ़सल का उत्पादन अगर किसी कारण कम हो जाये अथवा किसी प्राकृतिक आपदा से फ़सल के नुकसान के बाद किसान घाटे मे चला जाता है। इस वर्ष गन्ने का घटा हुआ उत्पादन किसान को चिंता मे डाले हुए है तो वहीं सरसों के अच्छे उत्पादन से किसानो को कुछ आस जगी है।
मोरना -शुक्रताल मार्ग किनारे स्थित कृषि फार्म के मालिक प्रगतिशील किसान बृजवीर सिंह राठी ने बताया की दो स्थानों पर वह लगभग 270 बीघा भूमि पर खेती करते हैं।प्रतिवर्ष लगभग 17000 सतरह हज़ार कुंतल गन्ने का उत्पादन करते हैं। इस वर्ष गन्ने की पैदावार बहुत कम हुई है।एक बीघा मे 70 -80 क्विंटल गन्ना पैदा हो रहा था इस वर्ष घटकर 35-40 क्विंटल रह गया है। चौधरी बृजवीर सिंह ने बताया की मौसम की नमी भी एक वजह है। किन्तु इसका मुख्य कारण नकली पेस्टीसाइड हैं।जो धड़ल्ले से बिक रहे हैं। जिससे गन्ने की फ़सल का उत्पादन आधा रह गया है। सरसों की पैदावार अच्छी है।गन्ने की फ़सल मुख्य है सरसों की खेती कम भूमि पर की जाती है। किसान को इस वर्ष बड़ा घाटा है। सरकार नकली पेस्टीसाइड पर रोक लगाये अन्यथा स्थिति और भी खराब होगी।गांव करहेड़ा निवासी किसान चौधरी मनोज उर्फ़ बिन्नू राठी ने बताया की क्षेत्र मे भूमि का वर्गीकरण चार भागो मे किया जाता है। आबादी के निकट की पक्की उर्वरक भूमि,आबादी से दूर दोमट हल्की उपजाऊ भूमि, रेत वाली खोला के जंगल की भूमि,गंगा व सोलानी की डेल्टाई खादर भूमि सभी के लिए एक जैसी तकनीक नहीं होनी चाहिए। समय समय पर भूमि की नि:शुल्क जांच की व्यवस्था होनी चाहिए। नकली पेस्टीसाइड भूमि की उर्वरा क्षमता को तेजी से कम कर रहे हैं ।नकली पेस्टीसाइड बेचने वाले व उसे बनाने वालों पर तुरंत कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए।सरसों की पैदावार अच्छी है जो ख़ुशी की बात है।किन्तु बेस गन्ने की फ़सल ही है।
गांव रहमतपुर निवासी किसान चौधरी राजीव सिंह ने बताया की गन्ने का घटा उत्पादन आर्थिक स्थिति को बड़े स्तर प्रभावित करेगा। किसान पर कर्ज का बोझ बढ़ना निश्चित है।कर्ज बढ़ेगा तो तनाव भी बढ़ेगा। सरकार ने गन्ने के भाव बढ़ाये जो स्वागत योग्य है किन्तु फ़सलो का उत्पादन बढ़ना तथा लागत नियंत्रण मे रहना भी ज़रूरी है। सरकार इस और गंभीरता से ध्यान दे।सरसों सहायक फ़सल जिसकी उपज अच्छी है। गन्ने की फसल आर्थिक रीढ़ है। उसका उत्पादन बढ़ना ज़रूरी है।












