यू०डी०ओ०की मासिक बैठक में URDU भाषा के विकास पर हुई चर्चा


उर्दू एक खालिस हिंदुस्तानी भाषा है, जिसने जंगे आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई : कलीम त्यागी

मुजफ्फरनगर के ग्राम कुटेसरा में उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन की मासिक बैठक मास्टर ख़लील अहमद के आवास पर सफलतापूर्वक आयोजित की गई। इस बैठक में संगठन के ओहदेदारान, कारकुनान तथा गांव के गणमान्य व्यक्तियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
बैठक की अध्यक्षता हाजी सलामत राही ने की, जबकि संचालन डॉ० सलीम अहमद सलमानी ने किया।
सभा को संबोधित करते हुए ज़िला अध्यक्ष कलीम त्यागी ने कहा कि उर्दू हमारी मादरी ज़बान है और इसकी हिफाज़त व तरक़्क़ी हम सभी की ज़िम्मेदारी है। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि बच्चों की उर्दू तालीम का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। यदि विद्यालयों में उर्दू शिक्षा उपलब्ध नहीं है, तो घर पर इसके प्रबंध किए जाने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उर्दू एक खालिस हिंदुस्तानी भाषा है, जिसने जंगे आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन आज सियासी कारणों से इसे कमज़ोर करने की कोशिशें की जा रही हैं।
इस अवसर पर मौलाना मूसा कासमी, तहसीन अली असारवी, डॉ० फर्रुख हसन तथा असद फारूकी ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
असद फारूक़ी ने कहा कि हिंदी सिनेमा की तरक़्क़ी में उर्दू का अहम योगदान है। संसद से लेकर छोटे मंचों तक उर्दू शायरी का इस्तेमाल होता है, लेकिन इसके बावजूद इसके रसमुलख़त को ख़त्म करने की कोशिशें हो रही हैं।
तहसीन अली असारवी ने कहा कि किसी भी भाषा की पहचान उसके रसमुलख़त से होती है, और इसके बिना भाषा का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। उन्होंने उर्दू के अख़बारों की घटती संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हमारी लापरवाही के कारण ही “राष्ट्रीय सहारा” जैसा बड़ा उर्दू अखबार बंद हो गया।
डॉ० सलीम सलमानी ने अपने संबोधन में कहा कि घरों में उर्दू बोलने का माहौल बनाना बेहद ज़रूरी है, क्योंकि यह भाषा तहज़ीब और अच्छे अख़लाक़ सिखाती है।
अध्यक्षीय भाषण में हाजी सलामत राही ने ग्राम कुटेसरा वासियों का आभार व्यक्त करते हुए मास्टर खलील अहमद की विशेष सराहना की। उन्होंने सभी से अपील की कि उर्दू की हिफ़ाज़त के लिए संगठन के साथ जुड़कर काम करें और गांव-गांव में कमेटियों का गठन कर उर्दू के माहौल को फिर से जीवित करें।
बैठक में हाजी सलामत राही, असद फारूक़ी, तहसीन अली असारवी, कलीम त्यागी, डॉ० सलीम अहमद सलमानी, मौलाना मूसा क़ासमी, डॉ० फर्रुख़ हसन, मास्टर नदीम मलिक, मास्टर इम्तियाज़ अली, मास्टर ख़लील अहमद, बाबू शमीम अहमद, मास्टर शरीफ़ अहमद, माहिर अली त्यागी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। अंत में मेज़बान मास्टर ख़लील अहमद ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
प्रोग्राम का आग़ाज़ मास्टर खलील के मकतब की बच्चियों ने कुरान की तिलावत, नाते पाक और उर्दू के तराने पेश करके खूबसूरत तरीके से किया।