मुज़फ्फरनगर। फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज़ ऑफ इंडिया (FOGSI) द्वारा संचालित प्रोजेक्ट ADHUNA CPD 2.0 के अंतर्गत गुरुवार को मुज़फ्फरनगर में समयपूर्व जन्म (Preterm Birth) देखभाल को लेकर एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन पलासा होटल एंड रिजॉर्ट में किया गया, जिसमें जिले एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों, डॉक्टरों, नर्सों तथा स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य समयपूर्व जन्म लेने वाले नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल, मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना तथा स्वास्थ्य कर्मियों को आधुनिक चिकित्सा तकनीकों एवं साक्ष्य आधारित उपचार पद्धतियों से प्रशिक्षित करना रहा। कार्यक्रम के माध्यम से चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों को प्री-टर्म डिलीवरी से जुड़े जोखिमों की पहचान, रोकथाम एवं उपचार के नवीनतम तरीकों की जानकारी दी गई।
प्रोजेक्ट ADHUNA CPD 2.0 का राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व FOGSI अध्यक्ष डॉ. भास्कर पाल एवं प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. जयदीप टैंक द्वारा किया जा रहा है। कार्यक्रम का आयोजन मुज़फ्फरनगर ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी के सहयोग से सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम में डॉ. मंजू प्रभाकर, डॉ. माया चौधरी, डॉ. पूर्णिमा गौतम सहित कई वरिष्ठ विशेषज्ञ चिकित्सकों ने अपने अनुभव साझा किए और प्रशिक्षण सत्रों का संचालन किया। वहीं अधुना प्रोजेक्ट के जिला समन्वयक फैसल अनवर भी कार्यक्रम में मौजूद रहे और उन्होंने प्रोजेक्ट के उद्देश्यों एवं स्वास्थ्य सेवाओं में इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान समयपूर्व प्रसव की रोकथाम, गर्भावस्था के दौरान जोखिम की पहचान, लेबर मैनेजमेंट, नवजात शिशुओं की विशेष देखभाल, कंगारू मदर केयर (KMC), स्तनपान को बढ़ावा देने, संक्रमण से बचाव तथा नवजात पुनर्जीवन (Neonatal Resuscitation) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि समयपूर्व जन्म लेने वाले बच्चों की देखभाल में शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं और सही उपचार एवं निगरानी से नवजात मृत्यु दर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
कार्यक्रम में मौजूद स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाने के लिए इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम बेहद आवश्यक हैं। इससे डॉक्टरों, नर्सों एवं पैरामेडिकल स्टाफ की कार्यक्षमता बढ़ती है और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।













