2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को छूट देने की मांग, सेवा लाभों की सुरक्षा का उठाया मुद्दा
मुजफ्फरनगर। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता को लेकर देशभर में बढ़ती चिंता के बीच राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश की मुजफ्फरनगर इकाई ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन भेजा है। संगठन ने मांग की है कि 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों तथा उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त किया जाए।
महासंघ का कहना है कि हाल ही में आए न्यायिक निर्णय के बाद हजारों शिक्षकों में भविष्य को लेकर असमंजस और चिंता की स्थिति बनी हुई है। संगठन ने सरकार से इस मामले में जल्द हस्तक्षेप कर शिक्षकों के हितों की रक्षा करने की अपील की है।
क्या है पूरा मामला?
राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने 23 अगस्त 2010 को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) संबंधी अधिसूचना जारी की थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 23(2) के तहत 9 अगस्त 2017 को आदेश जारी किया।
महासंघ का कहना है कि इन नियमों को पूर्व प्रभाव (रेट्रोस्पेक्टिव इफेक्ट) से लागू नहीं किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों की भर्ती उस समय लागू नियमों, योग्यता मानकों और चयन प्रक्रिया के आधार पर हुई थी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ी चिंता
ज्ञापन के अनुसार, 29 मई 2026 को आए सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद देश के विभिन्न राज्यों में वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों और उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के सेवा अधिकारों को लेकर संशय की स्थिति पैदा हो गई है।
संगठन का कहना है कि इस फैसले का असर शिक्षकों की नौकरी, वरिष्ठता, पेंशन और अन्य सेवा लाभों पर पड़ सकता है। इससे वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के सामने भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
‘विधिक निश्चितता’ का दिया हवाला
महासंघ ने अपने ज्ञापन में कहा है कि भारतीय विधिक व्यवस्था का मूल सिद्धांत है कि कोई भी नया नियम या नीति सामान्यतः उसके लागू होने की तिथि से प्रभावी होती है। पहले से नियुक्त कर्मचारियों पर बाद में निर्धारित पात्रता मानकों को लागू करना ‘विधिक निश्चितता’ और ‘वैध अपेक्षा’ के सिद्धांतों के विपरीत है।
संगठन का कहना है कि शिक्षकों ने वर्षों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे में नए मानकों को पूर्व प्रभाव से लागू करना न्यायोचित नहीं होगा।
महासंघ की प्रमुख मांगें
23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट दी जाए।
उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को भी टीईटी से मुक्त किया जाए।
शिक्षकों की सेवा, वरिष्ठता, पेंशन और अन्य सेवा लाभों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
आवश्यकता पड़ने पर केंद्र सरकार विधायी या नीतिगत हस्तक्षेप करे।
सभी राज्यों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर शिक्षकों में व्याप्त असमंजस दूर किया जाए।
जिलाधिकारी के माध्यम से भेजा गया ज्ञापन
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश, मुजफ्फरनगर इकाई की ओर से जिलाध्यक्ष अरविंद मलिक और अन्य पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन भेजा। संगठन ने उम्मीद जताई है कि सरकार शिक्षकों की चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द उचित निर्णय लेगी।












