ऑटो चालक की बेटी निकिता बनी CCS यूनिवर्सिटी टॉपर.. जीता गोल्ड मेडल

अभावों से लड़कर हासिल की बड़ी सफलता, 22 जुलाई को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय करेगा सम्मानित

दनकौर (गौतम बुद्ध नगर)। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बीच पढ़ाई कर दनकौर क्षेत्र की बेटी निकिता ने ऐसी मिसाल पेश की है, जो हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है। श्री द्रोणाचार्य पीजी कॉलेज की बीए की छात्रा निकिता ने 8.83 सीजीपीए हासिल कर चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में टॉप किया है। उनकी इस उपलब्धि पर 22 जुलाई को CCS विश्वविद्यालय में उन्हें गोल्ड मेडल से सम्मानित किया जाएगा।
निकिता गौतम बुद्ध नगर के दनकौर क्षेत्र के अट्टा गुजरान गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता सुंदर ऑटो चालक हैं, जबकि माता गीता गृहिणी हैं। आर्थिक तंगी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद माता-पिता ने बेटी की पढ़ाई में कभी कोई कमी नहीं आने दी। उनके संघर्ष और निकिता की कड़ी मेहनत ने आज पूरे परिवार का सपना साकार कर दिया।
आठ भाई-बहनों में सबसे बड़ी निकिता ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, गुरुजनों और श्री द्रोणाचार्य पीजी कॉलेज के शिक्षकों को दिया। उन्होंने बताया कि उनका सपना भविष्य में एक सफल अध्यापिका बनकर समाज और देश की सेवा करना है।
निकिता की सफलता यह साबित करती है कि आर्थिक अभाव और विपरीत परिस्थितियां कभी भी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के सामने बाधा नहीं बन सकतीं। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और उसे पाने का जुनून हो, तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है। कॉलेज प्रबंधन, प्राचार्य, शिक्षक एवं कर्मचारियों ने निकिता को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि निकिता की यह उपलब्धि कॉलेज ही नहीं, बल्कि पूरे जनपद के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
गौतम बुद्ध नगर की इस होनहार बेटी ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर जिले का नाम रोशन कर यह साबित कर दिया कि सपने वही पूरे होते हैं, जिन्हें पूरा करने का हौसला और मेहनत दोनों हों।

ऑटो चलाकर बेटी को पढ़ाया, अब गोल्ड मेडल से बढ़ेगा परिवार का मान

बेटी की सफलता ने एक साधारण परिवार के संघर्ष को नई पहचान दिला दी है। अट्टा गुजरान गांव निवासी ऑटो चालक सुंदर ने सीमित आय के बावजूद कभी अपनी बेटी निकिता की पढ़ाई नहीं रुकने दी। गृहिणी गीता ने भी परिवार की जिम्मेदारियों के बीच बेटी का हर कदम पर हौसला बढ़ाया।
आठ भाई-बहनों में सबसे बड़ी निकिता ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित रखा। लगातार मेहनत और अनुशासन का ही परिणाम है कि उन्होंने 8.83 सीजीपीए के साथ विश्वविद्यालय में पहला स्थान हासिल किया।
22 जुलाई को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में मिलने वाला गोल्ड मेडल सिर्फ निकिता की उपलब्धि नहीं, बल्कि उन माता-पिता के संघर्ष और विश्वास का भी सम्मान होगा, जिन्होंने आर्थिक तंगी को कभी बेटी के सपनों के आड़े नहीं आने दिया।
निकिता की सफलता अब क्षेत्र के उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है, जो संसाधनों की कमी को अपनी पढ़ाई में बाधा मानते हैं। उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि मेहनत, लगन और परिवार का साथ हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती।