27 GIRLS सहित 119 लोग गिरफ्तार… लखनऊ से चलता था विदेशियों को लूटने का ‘हाईटेक अड्डा’

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के ऐसे हाईटेक गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने अमेरिका समेत कई देशों के लोगों को करोड़ों रुपये का चूना लगाया। गोमती नगर स्थित समिट बिल्डिंग की 11वीं मंजिल पर चल रहे इस फर्जी कॉल सेंटर पर छापेमारी के दौरान पुलिस ने 92 लड़कों और 27 लड़कियों समेत कुल 119 लोगों को हिरासत में लिया।


पुलिस के मुताबिक, यह कॉल सेंटर दिन में शांत रहता था, लेकिन रात होते ही ‘ठगी की फैक्ट्री’ बन जाता था। यहां काम करने वाले युवक-युवतियों को अमेरिकी लहजे में अंग्रेजी बोलने की ट्रेनिंग दी गई थी। फोन पर ये खुद को एफबीआई अधिकारी, बैंक अधिकारी या सरकारी एजेंसी का अफसर बताकर विदेशी नागरिकों को डराते और फिर लाखों-करोड़ों रुपये ठग लेते थे।
जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क करीब 18 महीने से सक्रिय था और अब तक 250 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी को अंजाम दे चुका है। ठगी की रकम पहले अमेरिका के बैंक खातों में मंगाई जाती थी, फिर ARQ (पूर्व नाम: DolarApp) के जरिए उसे क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर गिरोह के सदस्यों में बांट दिया जाता था।
पुलिस का दावा है कि यह पूरा रैकेट बेहद संगठित तरीके से चलाया जा रहा था। राजस्थान, झारखंड, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों से अंग्रेजी बोलने वाले युवक-युवतियों को 30 से 35 हजार रुपये की नौकरी का लालच देकर भर्ती किया जाता था। उन्हें स्क्रिप्ट याद कराई जाती थी और लोगों को डराकर पैसे निकलवाने की खास ट्रेनिंग दी जाती थी।
इस गिरोह के कथित ऑपरेशन मैनेजर ललित खैराजानी और विक्रम सिंह परमार से पुलिस पूछताछ कर रही है। माना जा रहा है कि जांच आगे बढ़ने पर इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
इस कार्रवाई का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें पुलिस बड़ी संख्या में पकड़े गए युवक-युवतियों को थाने ले जाती दिखाई दे रही है। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क, बैंक खातों और क्रिप्टो लेनदेन की गहन जांच में जुटी हुई है।

रात में खुलती थी ‘ठगी की कंपनी’, सुबह होते ही सब हो जाता था बंद!

लखनऊ के गोमती नगर स्थित समिट बिल्डिंग की 11वीं मंजिल पर चल रहा यह फर्जी कॉल सेंटर बाहर से बिल्कुल एक सामान्य कंपनी जैसा दिखाई देता था। लेकिन जैसे ही रात होती, यहां से विदेशियों को ठगने का खेल शुरू हो जाता था।
यहां काम करने वाले युवक-युवतियों को अमेरिकी लहजे में अंग्रेजी बोलने की ट्रेनिंग दी गई थी। वे खुद को एफबीआई, बैंक या सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर विदेशी नागरिकों को डराते और उनसे लाखों-करोड़ों रुपये ऐंठ लेते थे।
पुलिस की छापेमारी में 92 लड़के और 27 लड़कियां पकड़ी गईं। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम पहले विदेशी बैंक खातों में पहुंचाई जाती थी, फिर उसे क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर गिरोह के सदस्यों में बांट दिया जाता था।
अब पुलिस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड, फंडिंग और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जांच में जुटी है।

पकडे गए लोग

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