UAE से भारत लाई गई विशाखा…लविश क़े सताए लोगो को ED से उम्मीदें

CBI की बड़ी कार्रवाई के बाद बढ़ीं उम्मीदें, क्या अब दुबई में मौजूद लविश चौधरी की भी भारत वापसी होगी?

विदेश भाग चुके आर्थिक अपराधियों के खिलाफ भारत की कार्रवाई लगातार तेज होती दिखाई दे रही है। हाल ही में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने रेड कॉर्नर नोटिस की आरोपी विशाखा राठौड़ को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से भारत डिपोर्ट कराकर एक बड़ी सफलता हासिल की। इस घटनाक्रम के बाद मुज़फ्फरनगर के चर्चित करोड़ों रुपये की ठगी क़े मामले में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।

चर्चित मामले में नामज़द YFX – QFQ आदि छदम नामो से कम्पनी बनाने वाले मुज़फ्फरनगर क़े लविश चौधरी और कंपनी के कुछ अन्य नामज़द पार्टनरों के दुबई में होने की बात जांच के दौरान सामने आती रही है। मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अन्य संबंधित एजेंसियां कर रही हैं। ऐसे में विशाखा राठौड़ की भारत वापसी को कई लोग इस तरह के मामलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ने का संकेत मान रहे हैं।

बताया जा रहा है कि जांच एजेंसियां मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत अपनी कार्रवाई आगे बढ़ा रही हैं। यदि आवश्यक कानूनी शर्तें पूरी होती हैं और संबंधित देशों का सहयोग मिलता है, तो विदेश में मौजूद आरोपियों को भी भारत लाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

कौन है विशाखा राठौड़..

विशाखा राठौड़ एक बड़े वित्तीय धोखाधड़ी मामले में वांछित थी. जांच में सामने आया कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर कई निवेश योजनाएं चलाईं. इन योजनाओं में निवेशकों को हर महीने निश्चित और आकर्षक रिटर्न देने का झूठा वादा किया गया. इसी लालच में बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी रकम निवेश कर दी. लेकिन निवेश मिलने के बाद आरोपियों ने पैसे वापस करने के बजाय उनका गबन कर लिया और निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की।

जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों ने ठगी से हासिल रकम को छिपाने के लिए कई बैंक खातों और डीमैट खातों का इस्तेमाल किया. अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर कर पैसों के स्रोत को छिपाने की कोशिश की गई. सीबीआई का कहना है कि यह पूरा खेल आपराधिक साजिश के तहत किया गया था. इसी वजह से मामले को गंभीर आर्थिक अपराध मानते हुए जांच आगे बढ़ाई गई और आरोपी के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई शुरू की गई।

भारत से फरार होने के बाद विशाखा राठौड़ के खिलाफ इंटरपोल के माध्यम से रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराया गया था. रेड कॉर्नर नोटिस किसी आरोपी की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान और गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए जारी किया जाता है. इसके बाद सीबीआई ने इंटरपोल और यूएई की संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखा. इसी प्रक्रिया के तहत आरोपी को हिरासत में लेकर भारत भेजने की कार्रवाई पूरी की गई।

सीबीआई की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, 3 अगस्त 2026 को विशाखा राठौड़ को यूएई से भारत लाया गया. पुणे एयरपोर्ट पहुंचने के बाद महाराष्ट्र पुलिस की विशेष टीम ने उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया. अब उससे पूछताछ की जाएगी ताकि इस वित्तीय घोटाले में शामिल अन्य आरोपियों, ठगी की कुल रकम और पैसों के नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटाई जा सके. जांच एजेंसियां मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही हैं।

मुज़फ्फरनगर क़े लविश पर लटकी अरेस्टिंग की तलवार..

सोशल मीडिया और बड़े मुनाफे के दावों के जरिए निवेशकों को आकर्षित करने वाले कथित निवेश नेटवर्क का नाम सामने आने के बाद लविश चौधरी चर्चा में आया। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच और विभिन्न राज्यों में दर्ज मुकदमों के अनुसार, लविश चौधरी और उसके सहयोगियों पर लोगों से करोड़ों रुपये का निवेश कराने और बाद में भुगतान बंद होने के आरोप हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, निवेशकों को फॉरेक्स ट्रेडिंग और ऑनलाइन निवेश के नाम पर हर महीने निश्चित मुनाफे का भरोसा दिलाया जाता था। शुरुआत में कुछ लोगों को भुगतान मिलने से बड़ी संख्या में निवेशक इस नेटवर्क से जुड़ते चले गए। बाद में कथित तौर पर भुगतान रुकने पर कई राज्यों में शिकायतें दर्ज कराई गईं।
ED के अनुसार, मामला QFX Trade Ltd, YFX, YorkerFX और BotBro जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़ा है। एजेंसी का आरोप है कि हजारों निवेशकों से बड़ी रकम जुटाई गई और इस धन का इस्तेमाल विभिन्न संपत्तियां खरीदने में किया गया। मामले में कई संपत्तियां भी अटैच की जा चुकी हैं।
UP, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट् सहित देश क़े विभिन्न हिस्सों में इस नेटवर्क से जुड़े कथित निवेश धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं। जांच एजेंसियां वित्तीय लेन-देन और विदेशों में मौजूद आरोपियों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार, लविश चौधरी के दुबई में होने की बात सामने आती रही है और उसे भारत लाने के लिए कानूनी प्रक्रिया पर संबंधित एजेंसियां काम कर रही हैं।
हालांकि, लविश चौधरी की गिरफ्तारी, भारत वापसी या प्रत्यर्पण को लेकर अब तक किसी केंद्रीय एजेंसी की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।