पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी की मौत: पार्टी कार्यालय में मिला शव, सुसाइड नोट बरामद

बीरभूम। पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधानसभा डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी की रविवार को मौत हो गई। उनका शव रामपुरहाट स्थित पार्टी कार्यालय में मिला। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और घटनास्थल से मिले कथित हस्तलिखित नोट समेत अन्य साक्ष्यों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक, मौत की परिस्थितियों और कारण की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

25 साल तक रामपुरहाट से रहे विधायक..

आशीष बनर्जी रामपुरहाट विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक रहे। वर्ष 2001 से 2026 तक उन्होंने इस सीट का प्रतिनिधित्व किया। हालांकि, 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्हें भाजपा प्रत्याशी ध्रुब साहा के हाथों हार का सामना करना पड़ा। निर्वाचन आयोग के परिणामों में ध्रुब साहा को 1,10,241 और आशीष बनर्जी को 86,691 वोट मिले।
लगातार करीब ढाई दशक तक विधानसभा में रहने के कारण वह बीरभूम की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में गिने जाते थे।

ममता सरकार में संभालीं कई जिम्मेदारियां..

आशीष बनर्जी ने ममता बनर्जी सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वह कृषि मंत्री रहे और विधानसभा के डिप्टी स्पीकर का पद भी संभाला। 2021 में उन्हें पश्चिम बंगाल विधानसभा का डिप्टी स्पीकर चुना गया था। 17वीं विधानसभा का कार्यकाल 7 मई 2026 को समाप्त हुआ।
उनका राजनीतिक सफर केवल विधायक तक सीमित नहीं रहा। लंबे समय तक सरकार और संगठन में सक्रिय रहने के कारण बीरभूम में उनकी मजबूत राजनीतिक पहचान थी।

चुनाव हारने के बाद बदला राजनीतिक समीकरण..

2026 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका में बड़ा बदलाव आया। जून 2026 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की बीरभूम जिला इकाई के अध्यक्ष और जिला कोर कमेटी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने खुद को पार्टी का सामान्य सदस्य बनाए रखने की बात कही थी।
इस्तीफे के समय उन्होंने बीरभूम जिला कोर कमेटी के कामकाज पर असंतोष जताया था। उन्होंने कहा था कि कमेटी प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रही थी और 2026 के चुनाव में पार्टी को जिले की 11 विधानसभा सीटों में से छह पर हार मिली।
यही वजह है कि उनकी मौत के बाद उनके हालिया राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इन घटनाक्रमों को मौत की वजह मानना अभी जल्दबाजी होगी।

कथित नोट में राजनीति को लेकर निराशा..

घटनास्थल से एक कथित हस्तलिखित नोट मिलने की बात सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इसमें आशीष बनर्जी ने भ्रष्टाचार में शामिल नहीं होने और किसी से अनुचित तरीके से पैसे नहीं लेने का दावा किया है।
रिपोर्टों के मुताबिक, नोट में उन्होंने राजनीति में आने को अपनी जिंदगी की बड़ी भूल बताया और परिवार की अगली पीढ़ी को राजनीति से दूर रहने की सलाह देने जैसी बातें लिखीं। नोट में कुछ राजनीतिक और प्रशासनिक मामलों से खुद को अलग बताते हुए अपनी भूमिका स्पष्ट करने का भी दावा किया गया है।
हालांकि, पुलिस अभी इस नोट की प्रामाणिकता और यह पता लगाने की प्रक्रिया में है कि इसे वास्तव में आशीष बनर्जी ने ही लिखा था या नहीं। इसलिए नोट में लिखी बातों को फिलहाल अंतिम तथ्य के तौर पर नहीं माना जा सकता।
भ्रष्टाचार के आरोपों पर भी सफाई का दावा
कथित नोट में भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों को लेकर भी सफाई दिए जाने की खबर है। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने दावा किया कि उन्होंने कभी भ्रष्टाचार को बढ़ावा नहीं दिया और किसी काम के बदले पैसे नहीं लिए।
एक रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उन्होंने बीरभूम से जुड़े एक वित्तीय विवाद में अपनी भूमिका से इनकार किया और कहा कि वह टेंडर अथवा मंजूरी से संबंधित जिम्मेदारियों में नहीं थे। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच का विषय है।
राजनीति में आने से पहले थे प्रोफेसर
आशीष बनर्जी का राजनीतिक जीवन शुरू होने से पहले शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ा था। उपलब्ध चुनावी प्रोफाइल के अनुसार, वह रामपुरहाट कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर रहे और उनके पास बर्दवान विश्वविद्यालय से बीए, एमए और पीएचडी की डिग्री थी।
वर्ष 2001 के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया और रामपुरहाट से लगातार चुनाव जीतते रहे।
2021 में बने थे विधानसभा के डिप्टी स्पीकर
2021 के विधानसभा चुनाव के बाद आशीष बनर्जी को पश्चिम बंगाल विधानसभा का डिप्टी स्पीकर चुना गया था। वह 17वीं विधानसभा के कार्यकाल के दौरान इस पद पर रहे।
इससे पहले और बाद में भी वह राज्य सरकार और तृणमूल कांग्रेस संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे।
मौत के बाद कई सवाल, पुलिस जांच में जुटी
रविवार सुबह पार्टी कार्यालय में उनका शव मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर हड़कंप मच गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
घटनास्थल से मिले कथित नोट और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि घटना से पहले उनकी मानसिक और राजनीतिक स्थिति क्या थी, किन लोगों से उनकी बातचीत हुई थी और मौत से जुड़े हालिया घटनाक्रम क्या रहे।
फिलहाल पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। मौत की अंतिम वजह और परिस्थितियों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जांच पूरी होने के बाद ही संभव होगा।
राजनीतिक सफर एक नजर में
2001: रामपुरहाट से पहली बार विधायक बने।
2001-2026: रामपुरहाट का लगातार प्रतिनिधित्व किया।
ममता सरकार: राज्य सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारियां संभालीं।
2021: पश्चिम बंगाल विधानसभा के डिप्टी स्पीकर बने।
2026: विधानसभा चुनाव में भाजपा के ध्रुब साहा से हार गए।
जून 2026: बीरभूम जिला संगठन के प्रमुख पदों से इस्तीफा देकर खुद को सामान्य पार्टी सदस्य बताया।
16 अगस्त 2026: रामपुरहाट स्थित पार्टी कार्यालय में मृत पाए गए। पुलिस ने जांच शुरू की।