जानलेवा काली राख से मिला छुटकारा, कानपुर भेजी जा रहा मौत का सामान

मुज़फ्फरनगर :–देर से दुरुस्त आये नवयुवक की मौत के बाद जागे प्रशासन ने जौली गंग नहर पटरी पर अवैध रूप से डाली गई कैमिकल युक्त काली राख को वहाँ से हटाने की कार्रवाई को शुरू कर दिया है।

 

मुज़फ्फरनगर जनपद की जौली गंग नहर पटरी पर सिंचाई विभाग की भूमि पर फैक्ट्रियों से निकलने वाली राख को अवैध रूप से डाला जाता रहा है । तथा माफियाओ द्वारा राख को गंग नहर में फेंक देने को लेकर भी कार्रवाई प्रशासन द्वारा पूर्व में की गई है । गत 9 जुलाई को गंग नहर पटरी पर पत्ते बीनने गया किशोर मौ. नबी राख में झुलस कर घायल हो गया था जिसकी उपचार के दौरान मौत हो गई थी तथा सिखेड़ा थाना क्षेत्र के गाँव भिक्की निवासी मोमीन व उसका भतीजा सैफ इसी राख में धँसकर झुलस गए थे। लागातार मानवीय क्षति के अलावा पर्यावरण को पहुँच रहे नुकसान को लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष व वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ.वीरपाल निर्वाल ने गंग नहर पटरी पर जाकर अवैध रूप से डाली गई राख पर रोष प्रकट करते हुए अधिकारियों को लताड़ा था।जिसके बाद जागे प्रशासन ने काली राख के सेम्पल लेकर प्रयोगशाला में भेजे थे। जिसमें राख में केमिकल होने की रिपोर्ट दी गई। इसी दरम्यान भोपा थाना पर नगला बुज़ुर्ग निवासी ठेकेदार इरफान उर्फ भूरा व उसके दो पुत्रों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया व भूरा ठेकेदार जिसपर पीड़ितों ने काली राख डालने के आरोप लगाए थे को पुलिस द्वारा जेल भेजा गया था।गत 31 जुलाई को लखनऊ से इंडियन इंस्टीट्यूट आफ टोक्सिकालाजी रिसर्च कें वैज्ञानिकों की टीम ने गांव बुजुर्ग क्षेत्र में जेसीबी से खुदाई कराकर राख के सैम्पल लिए थे। जिसमें केमिकल होना पाया गया। गुरुवार को भारत आयल एंड वैस्ट मैनेजमेंट लिमिटेड कंपनी कानपुर के सुपरवाइजर मौहम्मद इमरान गंग नहर पटरी पर पहुंचे जेसीबी मंगवाकर केमिकल युक्त काली राख को जेसीबी से काली राख को ट्रक में डलवा लिया। तथा कानपुर भेजे जाने की बात अधिकारियों ने बताई है। इस दौरान प्रदूषण विभाग के सहायक पर्यावरण अभियंता विपुल कुमार व मौहम्मद इमरान मौजूद रहे।

 

काज़ी अमजद अली की रिपोर्ट