अपना मुज़फ्फरनगर

नाम बदलकर युवती से रेप व धर्म परिवर्तन का मामला फर्जी निकला, FIR दर्ज कराने वाली लड़की पर चलेगा केस

कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में किया बरी,एफआईआर दर्ज कराने वाली युवती पर चलेगा मुकदमा
-गाय का मांस बनवाने का भी लगाया गया था आरोप
-एफआईआर में लगाये गये आरोपों से मुकर गयी थी युवती
मुजफ्फरनगर
एक युवती को अपना नाम बदलकर अपने प्रेम जाल में फंसाने तथा उसका धर्म परिवर्तन कराकर उसके साथ रेप करने के आरोप में कोर्ट ने आरोपी युवक को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। कोर्ट ने मुकदमा दर्ज कराने वाली युवती पर भी मुकदमा चलाने के आदेश दिये हैं।
नई मंडी कोतवाली में एक युवती ने 10 फरवरी 2021 को गांव संधावली निवासी वसीम सक्का उर्फ आकाश पर मुकदमा दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि उसने अपने कमरे पर ले जाकर युवती से रेप किया था। इससे पहले से नशा मिला कोल्ड ड्रिंक पिलाई गई थी, जिसके बाद धोखे से अश्लील फिल्म बनाई और धमकी देकर उसका बार-बार यौन शोषण किया गया। आरोप था कि इसके उपरांत वसीम सक्का ने अपना नाम आकाश बताते हुए 3 जुलाई 2021 को हरिद्वार नारायण मंदिर में ले जाकर हिंदू रीति रिवाज से विवाह किया। युवती ने आरोप लगाया था कि विवाह उपरांत उसको गाय का मांस लाकर बनाने के लिए दिया गया और वसीम ने अपने आपको को मुसलमान बताते हुए धर्म परिवर्तन करने के लिए बाध्य भी किया। युवती की तहरीर पर नई मंडी कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी वसीम सक्का उर्फ आकाश को अरेस्ट कर जेल भेज दिया था। घटना के मुकदमे की विवेचना सीओ नई मंडी हिमांशु गौरव ने की थी और कोर्ट में वसीम के विरुद्ध सह धर्म परिवर्तन, एससीएसटी एक्ट और रेप तथा कई अन्य धाराओं में चार्जशीट बनाकर कोर्ट में दाखिल की थी।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता नवाब अली ने बताया कि घटना के मुकदमे की सुनवाई विशेष एससी-एसटी जज जमशेद अली ने की।उन्होंने बताया कि कोर्ट में तथाकथित पीड़िता सच्चाई बयान करते हुए एफआइआर में लगाए गए आरोपों से मुकर गई। बताया कि वादी मुकदमा ने कोर्ट में साफ कहा कि उससे कुछ लोगों ने लिखी गई तहरीर पर हस्ताक्षर कराए थे। उसे नहीं मालूम उसमें क्या लिखा था। उसने वसीम उर्फ सुक्का पर लगाए गए धर्म परिवर्तन कराने, रेप और अन्य आरोपों से साफ इंकार करते हुए कहा कि ऐसा कुछ नहीं हुआ था। अभियोजन की याचना पर कोर्ट ने वादी मुकदमा और उसके स्वजन को दिये गए बयानों पर पक्षद्रोही करार दिया। बचाव पक्ष के वकील नवाब अली ने बताया कि एससी-एसटी कोर्ट के जज जमशेद अली ने घटना के मुकदमे की सुनवाई की। बताया कि कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद साक्ष्य के अभाव में वसीम उर्फ सक्का को बरी कर दिया और मिथ्या आरोप लगाने व झूठे साक्ष्य प्रस्तुत करने पर वादी मुकदमा यानी तथाकथित पीड़िता के विरुद्ध ही मुकदमे की कार्रवाई शुरू करने के आदेश दिये।

TRUE STORY

TRUE STORY is a Newspaper, Website and web news channal brings the Latest News & Breaking News Headlines from India & around the World. Read Latest News Today on Sports, Business, Health & Fitness, Bollywood & Entertainment, Blogs & Opinions from leading columnists...

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!