अपना मुज़फ्फरनगर

सभासदों की गुटबाज़ी के भेंट चढ़े 5 करोड़ के टेंडर.. तिथि निकलने के बाद भी नहीं खुले

50-50 समझौते पर चहेते ठेकेदारों से मिलकर कराया पूल

मुजफ्फरनगर नगर पालिका में हावी हुई सभासदों के दो गुटों के वर्चस्व की जंग में सिस्टम को हाईजैक करने की नई बुनियाद रखी जा रही है। अपने अपने चहेतों के नाम टेंडर स्वीकृत करने के लिए सेटिंग का ऐसा खेल चला कि मांगी गई निविदाओं में फिफ्टी फिफ्टी पर समझौता करते हुए तीन प्रतिशत तक का बिलों कराकर टेंडर स्वीकृत करने की तैयारी शुरू कर दी। इसी बीच एक अन्य फर्म ने दस प्रतिशत के बिलों पर अपना टेंडर डाला तो इसकी भनक नगर पालिका सिस्टम को हाईजैक करने वाले इन लोगों को लगी निर्माण विभाग के एक अफसर और बाबू का संरक्षण प्राप्त इन लोगों ने विभागीय अफसर और बाबू से साठ गांठ कर निविदा बॉक्स को ही खोल लिया और डाली गई निविदा को रुकवा दिया। यही वजह है कि अभी तक भी निविदा खोलने की तिथि गुजर जाने के बाद भी टेंडर नहीं खोले गए हैं। दरअसल नगर पालिका में 15 वें वित्त के अंतर्गत लगभग 5 करोड रुपए के डेंस कार्यों के लिए टेंडर डाले गए थे। जिसमें सभासदों के दो गुट एक बार फिर हावी हैं। टेंडर अपने अपने चहेतों के नाम स्वीकृत कराने के लिए नियमों को दरकिनार करते हुए भारी पूल कराकर छिड़ी वर्चस्व की जंग में फिफ्टी फिफ्टी पर समझौता कर लिया। सूत्रों के मुताबिक अपने चहेतों से पूल कराकर जो टेंडर डाले गए थे उनमें तीन प्रतिशत तक का बिलों था। एक अन्य ठेकेदार द्वारा डाले गए टेंडर में दस प्रतिशत पाए जाने पर यह खेल बिगड़ा इन्होंने इन टेंडर में भारी अनियमितता मिलने का हवाला देते हुए रोक लिया। इससे पूर्व भी कुछ ठेकेदारों ने स्थानीय निकाय प्रभारी की देखरेख में टेंडर बॉक्स रखवा कर निविदा डलवाने की मांग की थी, लेकिन इनके द्वारा हाईजैक की गई नगर पालिका मशीनरी से पालिका प्रशासन बेबस नजर आ रहा है। ऐसे में सवाल उठा रहा है कि जब तक जिले के आला अधिकारी इस मामले में संज्ञान नहीं लेंगे तब तक नगर पालिका की यही स्थिति रहेगी और शहरी क्षेत्र में गुणवत्तापरक विकास कार्य नहीं हो सकेंगे।

बोर्ड को गुमराह करके कर दिया ठेकेदार का निष्कासन…

अपने-अपने चहेतों को टेंडर दिलाने के लिए हावी दो गुटों की राजनीति के बीच फंसे ठेकेदार को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ा है। हाल ही में 29 जनवरी को हुई बोर्ड बैठक में पालिका की व्यवस्था को हाईजैक करने वाले इन लोगों ने अन्य प्रस्ताव के नाम पर बैठक में प्रस्ताव शामिल कराकर दस प्रतिशत बिलों पर टेंडर डालने वाले ठेकेदार की एम वायर कंस्ट्रक्शन कंपनी को 6 माह के लिए निर्माण कार्यों की निविदा से निष्कासित करने का प्रस्ताव पास करा दिया। दो गुटों के हावी होने से जहां नगर पालिका के राजस्व को तो हानि हो ही रही है वहीं टेंडर निष्पक्ष नहीं हो सकेंगे जिससे होने वाले विकास कार्यों में गुणवत्ता नहीं आएगी।

पहले से ही उठ रही मांग

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