ठुकरा के मेरा प्यार ‘बुलेट’ झेलेगी… ग़ाज़ियाबाद में सिरफिरे आशिक़ ने छात्रा पर झोंकी गोलियां
5 साल के रिश्ते पर भारी पड़ा ग़ुस्सा, प्रेमिका की शादी तय होते ही जानलेवा हमला
ग़ाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश।
एकतरफा मोहब्बत, टूटा भरोसा और सिर पर सवार जुनून ने एक बार फिर कानूनी दहलीज़ से आगे बढ़कर खूनी शक्ल ले ली। यूपी के ग़ाज़ियाबाद में पाँच साल तक रिश्ते में रही 22 वर्षीय M.Sc की छात्रा की शादी जब किसी और से तय हुई, तो प्रेमी प्रदीप कुमार (28) के भीतर ग़ुस्सा इस कदर उबल पड़ा कि उसने युवती के घर में जबरन घुसकर उस पर गोलियां बरसा दीं।
पुलिस के अनुसार, हमले में एक गोली युवती के कान के पास हड्डी में फंस गई, जिसका पता एक्स–रे जांच में चला है। छात्रा की स्थिति नाज़ुक और गंभीर बनी हुई है और डॉक्टर उसे बचाने की पुरज़ोर कोशिश में लगे हैं। वारदात के तुरंत बाद आरोपी प्रदीप मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश में पुलिस की कई टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
प्यार नहीं, पागलपन था… रिश्ते की हर किस्त अब दर्द में बदल गई
स्थानीय सूत्रों और पड़ोसियों के मुताबिक, युवती और प्रदीप का रिश्ता शुरू में मधुर और सामान्य रहा। दोनों के बीच भरोसा इतना गहरा था कि पढ़ाई के दौरान युवती के कमरे में लगे एसी की ईएमआई का भुगतान भी प्रदीप ही किया करता था।
समय के साथ जब परिवारों तक बात पहुंची और जाति, भविष्य तथा पारिवारिक दबाव के बीच शादी किसी और से तय कर दी गई, तो प्रदीप इसे प्रेमिका का फैसला नहीं, अपमान समझ बैठा।
“जिसके लिए उसने रात–दिन कमाया, वही किसी और की होने जा रही थी… उसका दिल टूटा, पर दिमाग़ भी साथ छोड़ गया।”
यह कहना था एक स्थानीय निवासी का, जिनकी ज़ुबान कांप रही थी, पर शब्दों में सच्चाई की तीखी कसक थी।
घटना उस वक्त हुई जब घर में आम दिनों की चहल–पहल थी। अचानक गोलियों की आवाज़ ने पूरे मोहल्ले को दहशत में डाल दिया। खिड़कियों के पीछे से झांकते लोग जब बाहर निकले, तो देखा एक बेटी तड़प रही थी और प्यार का दावा करने वाला शख्स, उसकी साँसें छीनने की कोशिश कर चुका था।
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पुलिस का बयान: “आरोपी भागा है, बच नहीं पाएगा”
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया—
“आरोपी के खिलाफ हत्या के प्रयास, अवैध हथियार के उपयोग, घर में घुसकर जानलेवा हमला करने समेत कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया जा चुका है। उसकी तलाश जारी है। कानून को हाथ में लेने वाले को बख्शा नहीं जाएगा.”
मां–पिता के आंसू और समाज के लिए सवाल
अस्पताल के बाहर माता–पिता की आंखों में सिर्फ पीड़ा थी, कोई नफ़रत नहीं।
उनके मौन में वही सवाल तैर रहा था—
क्या प्रेम ग़ुस्से से बड़ा नहीं होना चाहिए था?
क्या साथ बिताए 5 साल एक पल की जिद के आगे इतने बेमानी हो सकते हैं?
मार्मिक संदेश
यह घटना एक कड़वी सीख दे गई—
“जहाँ प्यार खत्म हो जाए, वहाँ विदाई दो… गोली नहीं.
EMI रिश्तों की मज़बूती का सबूत हो सकती है,
पर सहमति के बिना वही रिश्ता बोझ भी बन सकता है।
मोहब्बत ज़िंदगी देती है, ज़िंदगी लेती नहीं… और जो ले, वह मोहब्बत नहीं.”













