केक लगाने की छोटी-सी बात पर चली गोलियां, एक ही परिवार के तीन युवकों की मौत
शब्बीर अहमद
बुलंदशहर (खुर्जा)। बीती रात खुशियों का एक छोटा-सा जश्न पल भर में चीखों और सन्नाटे में बदल गया। नेहरू चुंगी क्षेत्र स्थित एक जिम में मनाई जा रही जन्मदिन की पार्टी में ऐसा खूनी खेल हुआ कि एक ही परिवार के तीन युवकों की जिंदगी हमेशा के लिए थम गई।
जिस केक को मुस्कान बांटनी थी, वही तीन घरों में हमेशा का दर्द छोड़ गया।
मामूली मजाक बना जानलेवा विवाद
जानकारी के अनुसार, जिम में जीतू सैनी का जन्मदिन मनाया जा रहा था। दोस्तों के बीच हंसी-मजाक का माहौल था। इसी दौरान किसी ने प्यार और अपनापन जताने के अंदाज में उसके चेहरे पर केक लगा दिया।
लेकिन यह मामूली-सा मजाक अचानक गुस्से की चिंगारी बन गया। बातों-बातों में कहासुनी शुरू हुई और देखते ही देखते माहौल तनाव में बदल गया। किसी ने नहीं सोचा था कि कुछ मिनटों की तकरार इतनी बड़ी त्रासदी का रूप ले लेगी।
ताबड़तोड़ फायरिंग, तीन जिंदगियां थमीं
आरोप है कि गुस्से में आकर आरोपी ने अपने साथियों के साथ मिलकर अंधाधुंध फायरिंग कर दी।
गोलियां लगने से—
मनीष सैनी (30)
अमरदीप सैनी (32)
आकाश सैनी (19)
तीनों की मौके पर ही मौत हो गई।
मनीष, भाजपा सभासद संजय सैनी के छोटे भाई थे। आकाश उनका भतीजा था और अमरदीप परिवार के चचेरे सदस्य बताए जाते हैं। एक ही परिवार के तीन युवकों की एक साथ मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है।
जिम में मचा हड़कंप, लोग भागे बाहर
फायरिंग होते ही जिम के अंदर अफरा-तफरी मच गई। जो जहां था, जान बचाने के लिए वहीं से भाग निकला। कुछ लोग सहमे हुए कोनों में छिप गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ ही सेकंड में हंसी-ठिठोली का माहौल खामोशी और डर में बदल गया।
आरोप है कि आरोपी फरार होने से पहले जिम में लगे सीसीटीवी का डीवीआर भी उखाड़कर साथ ले गए, ताकि घटना के सबूत मिटाए जा सकें।
पुलिस-प्रशासन अलर्ट, कई टीमें गठित
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। वरिष्ठ अधिकारी भी घटनास्थल पर डटे रहे। फोरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए हैं।
शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पूरे क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है, ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति न बने।
एसपी देहात अंतरिक्ष जैन ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें लगाई गई हैं और जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
“तीन घरों के चिराग एक साथ बुझ गए”
इस घटना ने सिर्फ तीन जिंदगियां नहीं छीनीं, बल्कि तीन परिवारों की पूरी दुनिया उजाड़ दी।
किसी घर का बेटा, किसी का भाई और किसी का भतीजा—तीनों एक साथ चले गए।
जिन घरों में कल तक हंसी गूंजती थी, वहां अब सन्नाटा है। मातम ऐसा कि शब्द भी कम पड़ जाएं।
खुर्जा की यह घटना समाज के लिए एक गहरी सीख है। छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा और हिंसा का रास्ता चुनना न सिर्फ कानून के खिलाफ है, बल्कि इंसानियत के भी खिलाफ है।














