नई दिल्ली के न्यू सीलमपुर स्थित मकतब हज़रत अली के तत्वावधान में मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित करने के लिए एक शानदार कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हज़रत मौलाना मोहम्मद मूसा कासमी की सरपरस्ती और मुफ़्ती मोहम्मद हारून कासमी की निगरानी में मकतब के बच्चों ने रंगारंग शैक्षिक व धार्मिक कार्यक्रम पेश किए, जिनमें नात-ए-नबी की प्रभावशाली प्रस्तुति ने सभी का दिल जीत लिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथियों में हकीम अताउर्ररहमान अजमली (एमडी, ए एंड एस फार्मेसी दिल्ली), क़ारी मोहम्मद अफ़्फान अजमली, हाफ़िज़ मोहम्मद समर और चौधरी मोहम्मद अयान सहित कई गणमान्य लोग शामिल रहे। इस मौके पर बच्चों की हौसला-अफजाई करते हुए हकीम अताउर्रहमान अजमली ने कहा, “इल्म हासिल करने के लिए चाहे चीन भी जाना पड़े, लेकिन शिक्षा अवश्य हासिल करनी चाहिए।” उनके इस संदेश ने विद्यार्थियों को ज्ञान की अहमियत समझने और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
समारोह में छात्र-छात्राओं मोहम्मद शारिक, मोहम्मद अहमद, मामून अकबर, रुकैया, सालिहा और फ़ाइज़ा को उत्कृष्ट प्रदर्शन पर ट्रॉफी और नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
विशेष रूप से मौलाना मोहम्मद राग़िब कासमी और मौलाना मोहम्मद अहमद कासमी ने अपनी ओर से बच्चों को इनाम देकर उनका उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करना, दीन के साथ आधुनिक तालीम के महत्व को समझाना और उन्हें बेहतर भविष्य के लिए प्रेरित करना रहा।
“इल्म की राह में मेहनत ही असली कामयाबी”
मकतब हज़रत अली न्यू सीलमपुर में आयोजित सम्मान समारोह केवल इनाम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह बच्चों के लिए प्रेरणा का मंच भी बना। कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं ने तालीम की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि आज के दौर में दीन और दुनियावी शिक्षा दोनों का साथ-साथ होना बेहद ज़रूरी है।
हकीम अता उर्राहमान अजमली ने अपने संबोधन में कहा, “इल्म हासिल करने के लिए चाहे चीन भी जाना पड़े, लेकिन शिक्षा जरूर हासिल करनी चाहिए।” उनके इस बयान ने बच्चों और अभिभावकों को खास संदेश दिया कि मेहनत और लगन से ही भविष्य संवरता है।
कार्यक्रम में बच्चों ने नात-ए-नबी समेत कई प्रस्तुतियां देकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। अंत में मेधावी छात्र-छात्राओं को ट्रॉफी और नकद इनाम देकर सम्मानित किया गया, जिससे बच्चों में पढ़ाई के प्रति नया उत्साह देखने को मिला।
इस तरह यह आयोजन केवल पुरस्कार वितरण ही नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कार और आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला यादगार समारोह बन गया।















