True Story Muzaffarnagar …
मुजफ्फरनगर। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में आयोजित निपुण विद्यालय सम्मान समारोह में शिक्षा क्षेत्र की उल्लेखनीय उपलब्धियों का जश्न मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डायट प्राचार्य विश्व दीपक त्रिपाठी ने की, जबकि बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाओं की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष बना दिया।
जनपद मुजफ्फरनगर में जनवरी 2026 में राज्य परियोजना लखनऊ के निर्देश पर समस्त परिषदीय विद्यालयों में निपुण विद्यालय आकलन कराया गया था। यह आकलन डीएलएड प्रशिक्षुओं द्वारा कक्षा 1 और 2 के बच्चों की अधिगम क्षमता को मापने के लिए किया गया। इस प्रक्रिया में जनपद के 129 विद्यालय निपुण घोषित किए गए, जो जिले के लिए गौरव का विषय रहा।
समारोह में इन सभी 129 विद्यालयों के कक्षा 1 एवं 2 के अध्यापकों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। प्राचार्य विश्व दीपक त्रिपाठी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अंतर्गत चलाया जा रहा निपुण भारत अभियान बच्चों की बुनियादी शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
निपुण विद्यालय आकलन में एसआरजी टीम के सदस्य विनीत कुमार, उषा चौहान और रश्मि मिश्रा ने अहम भूमिका निभाई। वहीं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संदीप कुमार चौहान ने सभी विद्यालयों को बधाई देते हुए शिक्षकों के प्रयासों की सराहना की और भविष्य में भी इसी प्रकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के सफल संचालन एवं व्यवस्थाओं में डीसी प्रशिक्षण सुशील कुमार का विशेष योगदान रहा।
समारोह में उपस्थित प्रमुख शिक्षकों में सविंदर, रोहित, अजय, पंखुड़ी गर्ग, कपिल तोमर, ज्योत्सना पुंडीर, अल्पना, मोनिका, विनीता, अंजू गोयल, सुमन सहित अनेक शिक्षक-शिक्षिकाएं शामिल रहीं।
एसआरजी टीम ने लिया गुणवत्ता सुधार का संकल्प

निपुण विद्यालय सम्मान समारोह के दौरान एसआरजी टीम के सदस्यों विनीत कुमार, उषा चौहान और रश्मि मिश्रा ने शिक्षा की गुणवत्ता को और अधिक सुदृढ़ बनाने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि निपुण भारत अभियान के तहत केवल मूल्यांकन ही नहीं, बल्कि बच्चों के समग्र विकास पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
टीम सदस्यों ने बताया कि कक्षा 1 और 2 के बच्चों में बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (FLN) को मजबूत करना ही अभियान का मुख्य उद्देश्य है। इसके लिए शिक्षकों को निरंतर प्रशिक्षण, नवाचारपूर्ण शिक्षण विधियों का प्रयोग और बच्चों की व्यक्तिगत प्रगति पर ध्यान देना आवश्यक है।
उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में विद्यालयों में नियमित मॉनिटरिंग, एक्टिविटी आधारित शिक्षण और कमजोर विद्यार्थियों के लिए विशेष सहयोगात्मक कक्षाएं संचालित की जाएंगी, ताकि कोई भी बच्चा सीखने में पीछे न रह जाए।
एसआरजी टीम ने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य सिर्फ निपुण विद्यालयों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण और व्यवहारिक शिक्षा उपलब्ध कराना है, जिससे वह आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बन सके।
निपुण भारत अभियान क्या है?
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा शुरू किया गया निपुण भारत अभियान (NIPUN Bharat Mission) बच्चों की बुनियादी शिक्षा को मजबूत करने के लिए एक राष्ट्रीय पहल है। इसका पूरा नाम है—
National Initiative for Proficiency in Reading with Understanding and Numeracy
🔹 मुख्य उद्देश्य
इस अभियान का लक्ष्य है कि
👉 कक्षा 3 तक के सभी बच्चे पढ़ना, लिखना और गणित की बुनियादी समझ (FLN – Foundational Literacy & Numeracy) हासिल कर लें।
🔹 क्यों जरूरी है?
अगर शुरुआती कक्षाओं में बच्चों की नींव कमजोर रह जाती है, तो आगे की पढ़ाई में दिक्कत होती है
इसलिए कक्षा 1 से 3 तक की शिक्षा को सबसे अहम माना गया है
🔹 क्या-क्या किया जाता है?
बच्चों की पढ़ने की क्षमता (Reading Skills) विकसित करना
लिखने और समझने की क्षमता बढ़ाना
बुनियादी गणित (जोड़, घटाव, संख्या पहचान) सिखाना
खेल-खेल और गतिविधि आधारित पढ़ाई (Activity-Based Learning)
शिक्षकों का प्रशिक्षण और लगातार मूल्यांकन
🔹 स्कूलों में कैसे लागू होता है?
कक्षा 1 और 2 के बच्चों का नियमित आकलन (Assessment)
कमजोर बच्चों के लिए विशेष कक्षाएं
टीचिंग-लर्निंग मैटेरियल (TLM) का उपयोग
डीएलएड प्रशिक्षुओं और शिक्षकों की मदद से सर्वे
🔹 लक्ष्य वर्ष
👉 सरकार का लक्ष्य है कि 2026-27 तक सभी बच्चे FLN में दक्ष (निपुण) हो जाएं।
🔹 निपुण विद्यालय क्या होता है?
जिस विद्यालय के अधिकांश बच्चे पढ़ने-लिखने और गणित में तय स्तर हासिल कर लेते हैं, उसे “निपुण विद्यालय” घोषित किया जाता है।
👉 सरल शब्दों में:
निपुण भारत अभियान का मतलब है—हर बच्चे को शुरुआती कक्षाओं में इतना मजबूत बनाना कि वह आगे की पढ़ाई आसानी से समझ सके।












