मनमुटाव हुआ ख़त्म.. अब शहर के ‘विकास’ को लगेंगे पँख

विरोध नहीं, अब साथ मिलकर शहर होगा साफ: सुमित खेड़ा

मुज़फ्फरनगर में बीजेपी नेता व चेयर पर्सन मीनाक्षी स्वरूप के पति गौरव स्वरूप व सुमित खेड़ा के बीच चल रहा मन मुटाव अब ख़त्म हो गया है। दोनों ने मिलकर साथ चलने व शहर के विकास में कंधे से कन्धा मिलाकर चलने की बात कही। इसी के साथ शहर की राजनीती की 2 धुरिया अब एक साथ सिर्फ ‘विकास’ के मुद्दे पर काम करेंगी।

मुज़फ्फरनगर शहर की राजनीति में लंबे समय से चली आ रही तल्खियां अब खत्म होती नजर आ रही हैं। भाजपा नेता गौरव स्वरूप और राष्ट्रीय नौजवान जनता दल के अध्यक्ष सुमित खेड़ा के बीच चला आ रहा मनमुटाव अब सुलह में बदल गया है। दोनों नेताओं ने साथ मिलकर शहर के विकास के लिए काम करने का संकल्प लिया है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि अब शहर की राजनीति टकराव से निकलकर विकास के मुद्दों पर केंद्रित होगी।

बताया जा रहा है कि हाल ही में हुई मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने खुलकर बातचीत की और आपसी मतभेदों को किनारे रखते हुए सहयोग की नई शुरुआत करने पर सहमति जताई। इस दौरान सुमित खेड़ा ने शहर की समस्याओं को वार्डवार तरीके से विस्तार से रखा। उन्होंने बताया कि किन इलाकों में सफाई, जलभराव, टूटी सड़कों, स्ट्रीट लाइट और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी लोगों के लिए परेशानी बनी हुई है।
बैठक के दौरान गौरव स्वरूप ने भी गंभीरता दिखाते हुए भरोसा दिलाया कि इन मुद्दों पर प्राथमिकता के आधार पर काम किया जाएगा और एक महीने के भीतर सुधार की ठोस पहल दिखाई देगी। उनका कहना था कि शहर को बेहतर बनाना सिर्फ एक व्यक्ति या पार्टी का काम नहीं, बल्कि सभी के सामूहिक प्रयास से ही संभव है।
मुलाकात के बाद सुमित खेड़ा ने इसे सकारात्मक और जरूरी पहल बताया। उन्होंने कहा कि विरोध की राजनीति से आम जनता को कोई फायदा नहीं होता, इसलिए अब समय है कि सभी लोग मिलकर शहर के विकास के लिए काम करें। उन्होंने यह भी कहा कि आगे भी इस तरह की बैठकों का सिलसिला जारी रहेगा, ताकि समस्याओं का समाधान तेजी से हो सके।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शहर की राजनीति में यह बदलाव अहम मोड़ साबित हो सकता है। अब तक अलग-अलग ध्रुवों में बंटी राजनीति अगर विकास के मुद्दे पर एकजुट होती है, तो इसका सीधा फायदा आम नागरिकों को मिलेगा।

शहर में अब ‘विरोध’ की जगह ‘सहयोग’ की राजनीति आकार लेती दिख रही है। अगर नेताओं के वादे तय समयसीमा में धरातल पर उतरते हैं, तो मुज़फ्फरनगर में सफाई, सुविधाओं और विकास की रफ्तार तेज होना तय है। यह पहल आने वाले समय में शहर की दिशा और दशा दोनों बदल सकती है।


टकराव से तालमेल तक—क्या बदलेगा शहर का मिज़ाज?

विकास पुरुष चितरंजन स्वरुप के देहांत के बाद सिटी की राजनीति चटक गई थीं। उनके परिवार से जुड़े कुछ लोगो ने मनमुटाव हुआ तो यहाँ अलग अलग धुरिया बन गई थीं। अब तक मुज़फ्फरनगर की राजनीति में सुमित खेड़ा और भाजपा नेता गौरव स्वरूप दो अलग-अलग ध्रुव माने जाते रहे हैं। बीते समय में दोनों के बीच बयानबाज़ी और विरोध की राजनीति ने कई बार शहर के मुद्दों को पीछे धकेला। लेकिन अब तस्वीर बदलती दिख रही है—जहां पहले टकराव था, वहीं अब तालमेल की शुरुआत हो गई है।

क्यों अहम है यह सुलह?

शहर की सबसे बड़ी समस्याएं—सफाई व्यवस्था, जलभराव, टूटी सड़कें, स्ट्रीट लाइट और नालों की सफाई—लंबे समय से लोगों के लिए सिरदर्द बनी हुई हैं। राजनीतिक खींचतान के कारण इन मुद्दों पर अपेक्षित गति से काम नहीं हो पा रहा था। ऐसे में दोनों नेताओं का एक मंच पर आना इन समस्याओं के समाधान को रफ्तार दे सकता है।

वार्ड स्तर पर फोकस की रणनीति

इस बार खास बात यह रही कि समस्याओं को सिर्फ सामान्य तौर पर नहीं, बल्कि वार्डवार चिन्हित किया गया। इससे हर इलाके की असली तस्वीर सामने आई। अगर इस रणनीति पर अमल होता है, तो काम ज्यादा व्यवस्थित और असरदार हो सकता है।

जनता की क्या उम्मीदें?

शहरवासी अब केवल बैठकों और वादों से आगे बढ़कर जमीनी बदलाव देखना चाहते हैं। लोगों का कहना है कि अगर एक महीने में वाकई सुधार दिखता है, तो यह पहल भरोसा कायम करेगी, वरना यह भी महज एक राजनीतिक औपचारिकता बनकर रह जाएगी।

राजनीतिक संदेश भी साफ

इस सुलह से एक बड़ा संदेश यह भी जा रहा है कि स्थानीय राजनीति में अब ‘विकास’ ही सबसे बड़ा मुद्दा बनने जा रहा है। आने वाले समय में अन्य नेता भी इसी राह पर चलते नजर आ सकते हैं।

आगे क्या?

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि तय समयसीमा में कितनी समस्याएं हल होती हैं। अगर काम धरातल पर दिखता है, तो यह तालमेल शहर की राजनीति का नया मॉडल बन सकता है—जहां विरोध नहीं, बल्कि सहयोग ही विकास की कुंजी बने।