बालिका को पोर्न दिखा 14 वर्ष के किशोर ने कर दिया रेप

9 वर्ष की बालिका को मोबाइल में पोर्न वीडियो दिखाकर किया रेप, आरोपी किशोर की उम्र निकली 14 साल

उत्तराखंड के जिला उत्तरकाशी के पुरोला में मंदिर के पिछले हिस्से में 9 वर्ष की बालिका के साथ किशोर ने रेप किया। किशोर की आयु 14 वर्ष बताई गई है। बालिका घर पहुंची तो उसके कपडे ख़ून में सने थे। फैमिली के पूछने पर बच्ची ने पूरी बात बताई। बालिका का मेडिकल परीक्षण कराया गया।

रेप से पहले मोबाइल पर दोनों ने देखी थीं पोर्न

किशोर मोबाइल लेकर खेलने आया था। जहाँ उसने मोबाइल पर लड़की को भी सेक्सी वीडियो दिखाई। इसके बाद यह कांड हो गया। किशोर को पुलिस ने अभिरक्षा में लेकर बाल न्यायालय में पेश किया। जहाँ से उसे किशोर सुधार गृह भेजा गया।

बच्चों के हाथ में बिना निगरानी
मोबाइल बना चिंता का विषय

उत्तरकाशी के पुरोला में सामने आए इस मामले ने एक बार फिर बच्चों के बीच बढ़ते मोबाइल और इंटरनेट इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र में बिना निगरानी स्मार्टफोन का इस्तेमाल बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अश्लील एवं हिंसक सामग्री तक आसान पहुंच बच्चों के व्यवहार को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में अभिभावकों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वे बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें और उन्हें सुरक्षित इंटरनेट उपयोग के बारे में जागरूक करें।

विशेषज्ञों की सलाह…
बच्चों को उम्र के अनुसार ही मोबाइल फोन उपलब्ध कराएं।

स्मार्टफोन में पैरेंटल कंट्रोल और सेफ सर्च फीचर सक्रिय रखें।

बच्चों के स्क्रीन टाइम की समय-सीमा तय करें।

बच्चों से नियमित रूप से बातचीत करें और उन्हें अच्छे-बुरे स्पर्श के बारे में समझाएं।

किसी भी संदिग्ध या असामान्य व्यवहार पर तुरंत ध्यान दें।

बच्चों को यह भरोसा दिलाएं कि वे किसी भी परेशानी या डर की स्थिति में परिवार से खुलकर बात कर सकते हैं।

बाल अधिकार विशेषज्ञों के अनुसार, केवल तकनीकी नियंत्रण ही पर्याप्त नहीं है। परिवार, स्कूल और समाज को मिलकर बच्चों के लिए सुरक्षित डिजिटल वातावरण तैयार करना होगा।

भारत में नाबालिगों द्वारा किए गए अपराधों की सुनवाई वयस्क अदालतों में नहीं, बल्कि किशोर न्याय बोर्ड के माध्यम से की जाती है। ऐसे मामलों में सजा का निर्धारण आरोपी की उम्र, अपराध की प्रकृति और उसकी मानसिक स्थिति को ध्यान में रखकर किया जाता है।

18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए क्या हैं नियम?

भारत में किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 लागू है। इस कानून के तहत 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति को किशोर माना जाता है।

1. सात से 16 वर्ष तक के किशोर..

यदि आरोपी की उम्र 16 वर्ष से कम है, तो उसे किसी भी परिस्थिति में वयस्क के रूप में मुकदमे का सामना नहीं करना पड़ता। ऐसे मामलों में सुधारात्मक और पुनर्वास संबंधी उपायों को प्राथमिकता दी जाती है।

2. 16 से 18 वर्ष के किशोर..

यदि आरोपी की उम्र 16 से 18 वर्ष के बीच है और उस पर हत्या, दुष्कर्म या अन्य जघन्य अपराध का आरोप है, तो किशोर न्याय बोर्ड प्रारंभिक आकलन करता है। बोर्ड यह जांचता है कि आरोपी अपराध के परिणाम समझने की मानसिक क्षमता रखता था या नहीं।