मुस्लिम बहुल सीटों को आरक्षित न करने का सुझाव दिया था सच्चर कमेटी ने.. साप्ताहिक स्पीक अप कार्यक्रम की 244 वीं कड़ी में बोले कांग्रेस नेता शाहनवाज़ आलम
लखनऊ। सीटों के परिसीमन में मुस्लिमों के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए. सेक्युलर पार्टियों और मुस्लिम समाज को सच्चर कमेटी की सिफारिशों के अनुरूप परिसीमन किए जाने की मांग करनी चाहिए।
ये बातें कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज़ आलम ने साप्ताहिक स्पीक अप कार्यक्रम की 244 वीं कड़ी में कहीं।
शाहनवाज़ आलम ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में मुसलमानों के सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक पिछड़ेपन के अध्ययन के लिए नियुक्त सच्चर कमेटी ने 2006 में जारी अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया था कि चुनाव क्षेत्र के परिसीमन प्रक्रिया में इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि अल्पसंख्यक बहुल इलाकों को अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित न किया जाए. इसलिए सच्चर कमेटी के सिफारिशों की समर्थक पार्टियों को प्रस्तावित परिसीमन पर इस नज़रिये से स्टैंड लेना चाहिए. अगर अभी इसपर चुप्पी साधी गई तो मुस्लिमों के लिए विधानसभा और लोकसभा में पहुँच पाना मुश्किल हो जाएगा.
कांग्रेस नेता ने कहा कि सच्चर कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में यह तथ्य रखा था कि मुस्लिम बहुल सीटों को अनुसूचित वर्ग के लिए सुरक्षित करके मुसलमानों के जनप्रतिनिधि बनने के अवसरों को बाधित कर दिया जाता है. जिसके कारण वो अपनी आबादी के अनुपात में सदन में नहीं पहुंच पाते और देश और प्रदेश के निर्णय प्रक्रिया से बाहर रह जाते हैं. उन्होंने कहा कि उदाहरण के तौर पर नगीना सुरक्षित सीट को देखा जा सकता है. जहाँ दलितों की आबादी 22 प्रतिशत और मुसलमानों की आबादी 46 प्रतिशत है. लेकिन दलितों के लिए सुरक्षित हो जाने के कारण इस सीट पर संख्या में दलितों से दोगुना होने के बावजूद वो अपने वर्ग से अपना जनप्रतिनिधि नहीं चुन सकते।
शाहनवाज़ आलम ने कहा कि इसकी भी संभावना है कि परिसीमन के बहाने भाजपा उत्तराखंड और हरियाणा से सटे यूपी के मुस्लिम बहुल सीटों के कुछ हिस्सों को काटकर इन पड़ोसी राज्यों से जोड़ दे। ताकि इन सीटों से मुस्लिम जन प्रतिनिधि न बन सकें. इसलिए सरकार द्वारा प्रस्तावित परिसीमन को सच्चर कमेटी की सिफारिशों के अनुरूप करने की मांग सेक्युलर दलों और मुसलमानों को करनी चाहिए।












