उर्दू के प्रचार-प्रसार पर मंथन, इफ्तार के साथ हुई यूडीओ की बैठक

नई दिल्ली। उर्दू के प्रचार-प्रसार और उसके संस्थागत विकास को लेकर उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (UDO) दिल्ली प्रदेश की एक अहम बैठक इफ्तार के साथ लाल कुआं स्थित रोडग्रेन में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता डॉ. मुफ्ती जावेद अनवर ने की, जिसमें उर्दू भाषा को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मंथन किया गया।
बैठक में संगठन के महासचिव मास्टर मकसूद अहमद ने कहा कि शिक्षा निदेशालय में पहले शरीफ-उल-हसन नकवी और आर.पी. सिंह नोडल अधिकारी के रूप में कार्य कर चुके हैं। उन्होंने दिल्ली सरकार से मांग की कि उर्दू से जुड़े कार्यों को गति देने के लिए दोनों अधिकारियों को पुनः उसी पद पर नियुक्त किया जाए।

उन्होंने लोगों से अपील की कि मदरसों, मस्जिदों, स्कूलों, मकतबों और गलियों के नाम उर्दू में लिखने की परंपरा को बढ़ावा दिया जाए।उन्होंने नई शिक्षा नीति-2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें बच्चों को मातृभाषा में शिक्षा देने का प्रावधान है। ऐसे में स्कूलों के प्रधानाचार्यों से संपर्क कर यह सुनिश्चित किया जाए कि कम से कम कक्षा आठ तक सभी विषय मातृभाषा में पढ़ाए जाएं।
सामाजिक कार्यकर्ता इकबाल मलिक ने कहा कि वे पिछले 25 वर्षों से उर्दू अखबार पढ़ते आ रहे हैं और अब संगठन से जुड़कर उर्दू के प्रचार-प्रसार के लिए सक्रिय रूप से कार्य करेंगे। डॉ. नज्म-उस-सहर ने जानकारी दी कि उर्दू में साइन बोर्ड लगाने का अभियान दिल्ली के कलां महल स्थित गली मदरसा शाह अब्दुल अजीज देहलवी से शुरू किया जाएगा।
संगठन के संयोजक वसीम अहमद सिद्दीकी ने दिल्ली में तीन-भाषा फार्मूले को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया। अशफाक हुसैन नग़मी ने सुझाव दिया कि उर्दू के प्रचार के लिए मोहल्लों में बैठकों का आयोजन किया जाए और उनके निमंत्रण पत्र भी उर्दू में लिखे जाएं।
ग्रेट एजुकेशन वेलफेयर ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद अशरफ ने संगठन की गतिविधियों में हर संभव सहयोग देने का भरोसा दिलाया।
वरिष्ठ पत्रकार मोहम्मद ओवैस ने कहा कि पिछले 12-13 वर्षों से पोस्ट रजिस्ट्रार कार्यालय में पत्राचार के लिए कोई उर्दू अधिकारी नहीं है। दिल्ली विधानसभा में भी कार्यवाही को उर्दू में दर्ज करने वाला अधिकारी नहीं है, जबकि डीआईपी विभाग की पत्रिका में उर्दू संपादक का पद भी खाली है। उन्होंने कहा कि इन पदों के समाप्त होने से उर्दू के विकास पर असर पड़ा है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में उर्दू को दूसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा प्राप्त है, लेकिन इसके प्रचार-प्रसार के लिए ठोस योजना बनाना जरूरी है।
बैठक में सर्वसम्मति से दिल्ली सरकार से दिल्ली उर्दू अकादमी का जल्द पुनर्गठन करने और खाली पदों को भरने की मांग की गई।

इस अवसर पर संगठन के नए पदाधिकारियों की भी घोषणा की गई। डॉ. मुफ्ती जावेद अनवर को अध्यक्ष, मास्टर मकसूद अहमद को महासचिव और मोहम्मद इमरान कनूजी को कोषाध्यक्ष चुना गया। डॉ. इशरत कफील और डॉ. नज्म-उस-सहर को उपाध्यक्ष बनाया गया, जबकि हकीम मुर्तजा देहलवी और मलिक मोहम्मद नदीम को सचिव नियुक्त किया गया।

बैठक दो सत्रों में आयोजित हुई—पहला सत्र इफ्तार से पहले और दूसरा रात्रिभोज के बाद। इस दौरान शाहिद अंसारी, मोहम्मद आमिर और नदीम मलिक ने भी अपने विचार रखे।