नई दिल्ली। उर्दू भाषा के विकास के लिए कार्यरत संस्था Urdu Development Organization (यूडीओ) ने प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र भेजकर National Council for Promotion of Urdu Language (एनसीपीयूएल) में जारी प्रशासनिक ठहराव को दूर कराने की मांग की है। संगठन का आरोप है कि परिषद के पुनर्गठन के बावजूद संस्थान पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाया है, जिससे उर्दू भाषा के प्रचार-प्रसार से जुड़े कई कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
यूडीओ के अध्यक्ष डॉ. सैयद अहमद खान ने 23 फरवरी 2026 को भेजे पत्र में कहा कि परिषद का पुनर्गठन 8 फरवरी 2024 को हुआ था, लेकिन अब तक कई अहम पद और समितियां सक्रिय नहीं हैं।
उपाध्यक्ष पद रिक्त, वित्त समिति का गठन लंबित
पत्र में कहा गया है कि परिषद में उपाध्यक्ष का पद अब भी रिक्त है, जो नीति निर्धारण और प्रशासनिक निगरानी के लिए महत्वपूर्ण है। साथ ही अनिवार्य वित्त समिति का गठन और अधिसूचना नहीं होने से अनुदान और वित्तीय स्वीकृतियां लंबित हैं। इससे विकास और प्रचार-प्रसार की योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
बैठकें नहीं, प्रस्ताव अटके
संगठन का आरोप है कि कार्यकारिणी बोर्ड और सामान्य निकाय के गठन के बावजूद नियमित बैठकें नहीं हो रहीं। देशभर से लेखकों, प्रकाशकों, शिक्षण संस्थानों और स्वयंसेवी संगठनों के प्रस्ताव महीनों से लंबित पड़े हैं, जिससे लाभार्थियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
एनसीपीयूएल के प्रमुख कार्य
National Council for Promotion of Urdu Language केंद्र सरकार के अधीन एक स्वायत्त संस्था है, जिसका उद्देश्य उर्दू भाषा का संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार करना है।
परिषद के प्रमुख कार्यों में शामिल हैं—
उर्दू भाषा के अध्ययन और शिक्षण को बढ़ावा देना।
उर्दू में किताबों, पत्र-पत्रिकाओं और शैक्षणिक सामग्री के प्रकाशन को प्रोत्साहन देना।
लेखकों, अनुवादकों और प्रकाशकों को आर्थिक सहायता व अनुदान उपलब्ध कराना।
कंप्यूटर शिक्षा के माध्यम से उर्दू को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ावा देना।
उर्दू से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं और सेमिनार आयोजित करना।Home | National Council for Promotion of Urdu Language https://share.google/jF0puA0REk2t8lbLA
मदरसों और शैक्षणिक संस्थानों में आधुनिक विषयों के साथ उर्दू शिक्षा को प्रोत्साहित करना।
यूडीओ का कहना है कि यदि परिषद की प्रशासनिक स्थिति शीघ्र नहीं सुधारी गई तो इन योजनाओं का लाभ छात्रों, शिक्षकों और साहित्यकारों तक समय पर नहीं पहुंच पाएगा।
पीएमओ से हस्तक्षेप की मांग
संगठन ने प्रधानमंत्री कार्यालय से शिक्षा मंत्रालय को निर्देशित कर उपाध्यक्ष पद शीघ्र भरने, वित्त समिति का गठन सुनिश्चित करने और लंबित प्रस्तावों का समयबद्ध निस्तारण कराने की अपील की है।
डॉ. खान ने कहा कि समय पर हस्तक्षेप से ही संस्थान की कार्यक्षमता और सार्वजनिक विश्वास बहाल हो सकेगा। मामले को लेकर उर्दू साहित्य और शिक्षा से जुड़े वर्गों में चिंता देखी जा रही है।














