विश्व उर्दू दिवस की तैयारियों में जुटी उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन

बैठक में कार्यक्रम की रूपरेखा पर चर्चा, दो साहित्यिक व शैक्षिक हस्तियों के निधन पर जताया शोक

मुजफ्फरनगर। विश्व उर्दू दिवस के आयोजन को लेकर उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। नौ नवंबर को आयोजित होने वाले कार्यक्रम को यादगार बनाने के लिए संगठन के पदाधिकारियों और सदस्यों की बैठक संयोजक तहसीन अली असारवी के आवास पर हुई। इसमें कार्यक्रम की रूपरेखा और तैयारियों पर चर्चा की गई। यहाँ उर्दू शिक्षको व मेधावी छात्रों के साथ उर्दू भाषा के विकास मे जुटे लोगो को 9 नवम्बर के उर्दू डे प्रोग्राम मे सम्मानित किये जाने का ऐलान किया गया।
बैठक की अध्यक्षता संगठन के संरक्षक डॉ. शमीमुल हसन ने की। संचालन सचिव शमीम क़स्सार ने किया। सदस्यों ने उर्दू भाषा के प्रचार-प्रसार और नई पीढ़ी को उर्दू से जोड़ने के लिए सुझाव रखे।
बैठक में कहा गया कि उर्दू की सेवा के लिए केवल भाषण और लेख ही पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए जमीनी स्तर पर लगातार काम करना होगा। पदाधिकारियों से अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता और लगन से निभाने की अपील की गई। साथ ही तय किया गया कि विश्व उर्दू दिवस के कार्यक्रम की तैयारियों में जो भी कमियां होंगी, उन्हें समय रहते दूर किया जाएगा।

हज़रत उस्मान आदिल के निधन पर शोक..

बैठक में मुजफ्फरनगर के शायर और वरिष्ठ साहित्यकार हज़रत उस्मान आदिल के निधन पर शोक प्रस्ताव पारित किया गया। सदस्यों ने कहा कि उनके निधन से उर्दू साहित्य को बड़ी क्षति हुई है।
पदाधिकारियों के अनुसार हज़रत उस्मान आदिल ने करीब छह दशक तक उर्दू शायरी और साहित्य की सेवा की। उन्होंने अनेक शिष्य तैयार किए, जो आज शिक्षक और साहित्यकार के रूप में उर्दू भाषा और साहित्य की सेवा कर रहे हैं।

वक्ता डॉ. शमीमुल हसन और तहसीन अली असारवी ने कहा कि शिक्षक की सबसे बड़ी पहचान उसके शिष्य होते हैं। हज़रत उस्मान आदिल के शिष्य उनकी साहित्यिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके निधन से साहित्यिक जगत में जो कमी आई है, उसे पूरा करना आसान नहीं होगा।संगठन की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि दी गई और दुआ-ए-मगफिरत की गई।

मास्टर तकरीम के निधन पर भी जताया दुख..

बैठक में इस्लामिया इंटर कॉलेज के सेवानिवृत्त लेक्चरर मास्टर तकरीम के निधन पर भी दुख व्यक्त किया गया। सदस्यों ने उनकी शैक्षिक, बौद्धिक और सामाजिक सेवाओं को याद किया।
कहा कि मास्टर तकरीम ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा शिक्षा और विद्यार्थियों के मार्गदर्शन के लिए समर्पित किया। उनके निधन को शिक्षा जगत के लिए भी बड़ी क्षति बताया गया।बैठक में दोनों दिवंगत हस्तियों के लिए सामूहिक रूप से दुआ की गई।

उर्दू की सेवा के लिए एकजुट होकर काम करने का आह्वान

बैठक के अंत में हाजी सलामत राही और असद फारूकी ने कहा कि उर्दू भाषा और साहित्य की सेवा सभी की साझा जिम्मेदारी है। इसके प्रचार-प्रसार के लिए संगठित होकर लगातार काम करने की जरूरत है।
डॉ. फर्रुख हसन और मास्टर खलील अहमद ने कहा कि बैठक में बड़ी संख्या में सदस्यों की भागीदारी उर्दू की सेवा के प्रति लोगों के उत्साह को दर्शाती है। सभी लोग मिलकर काम करेंगे तो उर्दू के प्रचार-प्रसार को और मजबूती मिलेगी।बैठक के मेजबान तहसीन अली असारवी की मेजबानी के लिए भी आभार जताया गया।

उर्दू भाषा के विकास मे योगदान पर तहसीन अली को सम्मानित करते हलीमा सादिया एजुकेशनल एंड ट्रस्ट पदाधिकारी


बैठक में डॉ. शमीमुल हसन, हाजी सलामत राही, असद फारूकी, कलीम त्यागी, तहसीन अली असारवी, शमीम कस्सार, मौलाना मूसा कासमी, डॉ. सलीम सलमानी, बदरुज्जमां खान, डॉ. फर्रुख हसन, नदीम मलिक, कारी तौहीद अजीज, गुलफाम अहमद, मास्टर खलील अहमद, साजिद खान, इम्तियाज अली, इंजीनियर गुलफाम अहमद और डॉ. अकील अहमद मौजूद रहे।