फर्जी कंपनियां बनाकर जारी कर दिए 3189 करोड़ों के बिल

ड्यूटी मजिस्ट्रेट के समक्ष एसपीपी ने की बहस, 14 दिन के ज्यूडिशियल रिमांड पर भेजा
मेरठ। केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर आसूचना महानिदेशालय की गाजियाबाद क्षेत्रीय इकाई द्वारा फर्जी कंपनियां बनाकर फर्जी इन्वॉयस जारी करने वाले एक गिरोह का पदार्फाश किया गया। यह पूरा सिंडिकेट फर्जी कंपनियां बनाकर फर्जी इन्वॉयस जारी कर निर्यात के माध्यम से रिफंड प्राप्त करता था।
डाटा माइनिंग के उपरांत शक के दायरे में आई दो कंपनियों के ठिकानों पर अधिकारियों द्वारा छापेमारी की गई इस छापेमारी में 200 से अधिक कंपनियों की फाइलें, मोबाइल फोन, डिजिटल सिग्नेचर, डेबिट कार्ड्स, सिम कार्ड्स, आधार कार्ड, पैन कार्ड, पेन ड्राइव, आॅफिसों की चाबियां, चेक बुक, रबर की मोहर और कच्चा रिकॉर्ड प्राप्त हुआ। इसके उपरांत विस्तृत जांच करने पर पता चला, इस नेटवर्क का समस्त डाटा विदेशों में स्थित सर्वर के माध्यम से क्लाउड में सुरक्षित रहता है। डाटा एनालिसिस और साक्ष्यों से पता चला, इस नेटवर्क में 275 अस्तित्वहीन कंपनियां है, जिनका सिर्फ पेपरों में अस्तित्व में है। इन कंपनियों द्वारा कुल 3189 करोड़ों रुपए कि फर्जी बिल जारी किए गए, जिसमें 362 करोड़ रुपए की जीएसटी चोरी सामने आई। इस सिंडिकेट का एक सरगना टिंकू यादव को गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि टिंकू लोगों से फर्जीवाड़ा करके उनके आधार और पैन कार्ड इत्यादि दस्तावेज ले लेता था, उनका प्रयोग करके फर्जी कंपनियां बनाता था। इस गिरोह के दो मास्टरमाइंड विपिन कुमार गुप्ता एवं योगेश मित्तल को भी पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया। यह दोनों मास्टरमाइंड पहले भी डीआरआई द्वारा गिरफ्तार किए जा चुके हैं तथा वर्तमान में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जांच के दायरे में है। ड्यूटी मजिस्ट्रेट के समक्ष बहस के उपरांत एसपीपी लक्ष कुमार सिंह ने बहस की। मजिस्ट्रेट द्वारा 14 दिन का ज्यूडिशियल रिमांड दिया गया।