सड़क हादसे में तीन दोस्तों की मौत, गमगीन माहौल में सुपुर्द-ए-खाक

UP के जिला शामली मे देर शाम एक भीषण सड़क हादसे में असारा गांव के तीन युवकों की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद पूरे गांव में मातम छा गया। मंगलवार को नमाज-ए-जनाजा के बाद तीनों को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। रमजान के पाक महीने मे एक ही गांव के 3 युवकों की मौत से मातम पसरा हुआ है।

जानकारी के अनुसार, कांधला क्षेत्र में शामली-दिल्ली हाईवे पर एलम बाईपास के पास शाम करीब 7:30 बजे तेज रफ्तार बोलेरो ने बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक सवार दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीसरे युवक ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। टक्कर के बाद बोलेरो अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट गई।
हादसे में बागपत जनपद के असारा गांव निवासी 25 वर्षीय मोइन पुत्र अब्बास और 27 वर्षीय मोइन खान पुत्र लुकमान की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके साथ मौजूद साहुल की उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। बताया गया है कि तीनों युवक असारा स्थित मुस्लिम इंटर कॉलेज में कक्षा 12वीं के छात्र थे और इन दिनों परीक्षा दे रहे थे। वे कांधला पर सवार होकऱ बाइक से गांव लौट रहे थे, तभी एलम की ओर से तेज गति से आ रही बोलेरो ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी।
वहीं बोलेरो में सवार एलम निवासी प्रदीप पुत्र शशांक (नाला) और बालेंद्र पुत्र विकास (विकास नगर एलम) घायल हो गए। घायलों को कांधला सीएचसी में भर्ती कराया गया है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों क्षतिग्रस्त वाहनों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी।
मंगलवार को मुस्लिम इंटर कॉलेज असारा में नमाज-ए-जनाजा अदा की गई, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण और क्षेत्रीय लोग शामिल हुए। इसके बाद गमगीन माहौल में तीनों युवकों को कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। गांव में शोक की लहर है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

हेलमेट होता तो बच सकती थी जान, फेडरेशन ऑफ मुस्लिम जाट एसोसिएशन की मुहिम के बावजूद नहीं जागे युवा


शामली मे असारा के तीन युवकों की दर्दनाक मौत के बाद एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। हादसे के बाद ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि युवकों ने हेलमेट पहना होता, तो शायद उनकी जान बच सकती थी।
गौरतलब है कि क्षेत्र में सड़क सुरक्षा को लेकर Federation of Muslim Jat Association द्वारा पहले भी जागरूकता अभियान चलाया गया था। संगठन के अध्यक्ष आशु चौधरी और प्रवक्ता साजिद चौधरी के नेतृत्व में टीम ने सड़कों पर उतरकर दोपहिया वाहन चालकों को हेलमेट पहनने के लिए प्रेरित किया था। जगह-जगह रोककर युवाओं को समझाया गया कि हेलमेट केवल चालान से बचने के लिए नहीं, बल्कि जीवन की सुरक्षा के लिए जरूरी है।
इसके बावजूद क्षेत्र में अधिकांश युवा बिना हेलमेट ही बाइक चलाते नजर आते हैं। सोशल मीडिया पर स्टंट, तेज रफ्तार और लापरवाही को बढ़ावा देने की प्रवृत्ति भी हादसों की बड़ी वजह बन रही है।
लगातार बढ़ रहे हादसे
शामली-दिल्ली हाईवे सहित क्षेत्र की अन्य सड़कों पर पिछले कुछ महीनों में कई गंभीर हादसे हो चुके हैं। तेज रफ्तार, नियमों की अनदेखी और हेलमेट न पहनना इन दुर्घटनाओं की प्रमुख वजह मानी जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस द्वारा समय-समय पर अभियान तो चलाए जाते हैं, लेकिन सख्त और नियमित हेलमेट चेकिंग की कमी साफ दिखाई देती है।

सख्ती और जागरूकता दोनों जरूरी
गांव असारा के मूल निवासी व समाजसेवी तहसीन अली का मानना है कि केवल अपील करने से काम नहीं चलेगा। स्कूल-कॉलेज स्तर पर सड़क सुरक्षा की अनिवार्य कक्षाएं, अभिभावकों की जिम्मेदारी और पुलिस की सख्त कार्रवाई—इन तीनों की जरूरत है।
गांव के मुकीम का कहना था की यदि हेलमेट चेकिंग अभियान को नियमित और कठोर बनाया जाए, तो युवाओं में डर और जागरूकता दोनों पैदा हो सकते हैं।
असारा के तीन दोस्तों की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। अब सवाल यही है कि क्या इस हादसे के बाद युवा सबक लेंगे, या फिर सड़क पर लापरवाही का सिलसिला यूं ही जारी रहेगा।