अंतर्विषयक अनुसंधानों के लिए विज्ञान और टेक्नोलॉजी का समन्वय जरूरी
गाज़ियाबाद। एम. एम. एच. कॉलेज, ग़ाज़ियाबाद के भौतिक विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी “साइंस, टेक्नोलॉजी और इंटर-डिसिप्लिनरी रिसर्च” का दूसरा दिन भी विषय की गंभीरता और व्यापकता को प्रतिबिंबित करता रहा। देश के विभिन्न राज्यों से आए शोधार्थियों और प्राध्यापकों की सक्रिय सहभागिता ने कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया।
संगोष्ठी के सिम्पोजियम सत्र का शुभारंभ भौतिक विज्ञान विभाग के सी. वी. रमन हॉल में मुख्य आयोजक डॉ. मनोज कुमार के निर्देशन में हुआ। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. संजय सिंह ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि अंतर्विषयक शोध आज समय की मांग है। विभाग के प्रो. सत्येंद्र पाल ने वक्ताओं का परिचय कराया।
मुख्य अतिथि वक्ता के रूप में भटिंडा (पंजाब) से आए डॉ. विजय विश्वास ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के समकालीन महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नवाचार और बहुविषयी अनुसंधान ही भविष्य की दिशा तय करेंगे। उन्होंने बताया कि देशभर से 165 शोध-पत्रों का पंजीकरण इस बात का प्रमाण है कि विषय के प्रति अकादमिक जगत में व्यापक रुचि है।
विशिष्ट व्याख्यान में दिल्ली विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग के प्रो. उपदेश वर्मा ने विज्ञान, तकनीक और अंतर्विषयी अनुसंधान को सामाजिक-आर्थिक विकास का आधार बताया। उन्होंने ए.आई. के बढ़ते प्रभाव और स्वच्छ एवं ग्रीन ऊर्जा की आवश्यकता पर जोर दिया।
भगवंत विश्वविद्यालय, अजमेर से आए अशोक कुमार शर्मा ने 21वीं सदी को तकनीक की सदी बताते हुए अनुसंधान में आत्मनिर्भरता की आवश्यकता पर बल दिया और भूकंप अध्ययन पर विशेष चर्चा की। विभिन्न तकनीकी सत्रों में लगभग 125 प्रतिभागियों ने शोध-पत्र एवं पोस्टर प्रस्तुत किए। तीन समानांतर सत्रों का सफल संचालन किया गया तथा श्रेष्ठ शोध-पत्र, पोस्टर और थीसिस को सम्मानित किया गया।
जे. पी. यूनिवर्सिटी, नोएडा से डॉ. अनुराज पंवार ने आधुनिक युग में अंतर्विषयक अनुसंधान की आवश्यकता बताई। नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के डॉ. अनुराग गौड़ ने सामूहिक अनुसंधान और नवाचार पर जोर दिया। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के प्रो. वाई. के. गौतम ने शोध संस्कृति को विकसित करने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता बताई। वहीं दिल्ली एन.आई.टी. से प्रो. ज्ञानेंद्र श्योरान ने विभिन्न विषयों को एक मंच पर लाकर शोध की गुणवत्ता बढ़ाने की बात कही।
समापन सत्र में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के विभागाध्यक्ष प्रो. अनुज कुमार ने देश के विकास हेतु उच्च स्तरीय अनुसंधानों की श्रृंखला संचालित करने पर बल दिया और नई शिक्षा नीति में शोध को प्राथमिकता देने की सराहना की। विशेष अतिथि के रूप में राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला, अहमदाबाद (गुजरात) से आए प्रो. एच. ओ. वत्स ने भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए अनुसंधान में ऊर्जा निवेश की आवश्यकता बताई।
अंत में संगोष्ठी संयोजक डॉ. मनोज कुमार ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। संगोष्ठी ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब विज्ञान, तकनीक और विभिन्न विषयों का समन्वय होता है, तब शोध प्रयोगशालाओं से निकलकर समाज और राष्ट्र निर्माण का सशक्त आधार बनता है।
एम. एम. एच. कॉलेज, ग़ाज़ियाबाद में राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन














