सेना के बीच गूंजा ‘अनेकता में एकता’ का संदेश, हिज़ाब वाली कौसर बनीं मिसाल

नई दिल्ली/देहरादून। ‘अनेकता में एकता’ भारत की पहचान है। इसी भावना को साकार करती एक प्रेरक तस्वीर देहरादून से सामने आई है। भारतीय सेना के प्रतिष्ठित आर्मी स्किलिंग सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, देहरादून (उत्तराखंड) में आयोजित विशेष योग वेलनेस कार्यशाला में मुस्लिम महिला योग प्रशिक्षक कौसर ने वरिष्ठ सैनिकों को वैज्ञानिक योग तकनीकों का प्रशिक्षण देकर नई मिसाल कायम की।
कार्यशाला में अंतरराष्ट्रीय योग वैज्ञानिक डॉ. बी. इस्लाम किरानवी के शोध पर आधारित, 101 करोड़ रुपये की मार्केट वैल्यू और 51वें वर्जन वाली विश्व-मान्यता प्राप्त आधुनिक फिटनेस तकनीकों का प्रशिक्षण सेना के योग वेलनेस ट्रेनर्स को निःशुल्क दिया गया।
सैनिकों ने सराहा वैज्ञानिक योग अभ्यास
कौसर ने अपने सौ से अधिक कार्यशालाओं के अनुभव के आधार पर अनुकूल, लाभकारी और वैज्ञानिक योग साधनाएं सिखाईं। उन्होंने बताया कि प्रतिस्पर्धा, तनाव, अविश्वास, मिलावटी खानपान और असंतुलित जीवनशैली से जूझ रहे समाज के लिए योग प्रभावी समाधान है। व्यक्तित्व विकास, मानसिक मजबूती और सकारात्मक सोच को बढ़ाने वाली आधुनिक तकनीकों को सैनिकों ने बेहद सराहा।
स्वर्ण उपहार से किया सम्मानित
कार्यशाला के संयोजक मोहन, वरिष्ठ जवान जय रोशन कुमार और प्रशिक्षक चारु शर्मा ने कौसर को प्रोत्साहन स्वरूप स्वर्ण उपहार भेंट किया। उन्हें स्वतंत्र भारत में बुर्का पहनकर सेना के साथ प्रशिक्षण देने वाली पहली मुस्लिम महिला के रूप में भी सराहा गया।
महिला सशक्तिकरण का संदेश

वक्ताओं ने कहा कि समाज की 50 प्रतिशत महिला आबादी को हर क्षेत्र में आगे आकर जिम्मेदारी निभानी चाहिए। देश और समाज की बेहतरी, परिवार के सम्मान और मानवता की भावना के साथ सक्रिय सहभागिता ही सच्चे राष्ट्रनिर्माण का मार्ग है।
कार्यक्रम में ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना को मजबूत करने और सैनिकों के मनोबल को बढ़ाने पर जोर दिया गया।