आलमी यौमे उर्दू यादगार मजल्ला का हुआ विमोचन

मुज़फ्फरनगर। उर्दू भाषा और इसकी तहज़ीबी विरासत को संवारने के लिए काम कर रही संस्था उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गनाइज़ेशन (यू०डी०ओ०) के कैंप कार्यालय पर मंगलवार को एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे यू०डी०ओ० के क़ौमी सदर डाॅ. सय्यद अहमद ख़ान का पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी से स्वागत किया।

वरिष्ठ पत्रकार सय्यद आलिम नक़वी पर आधारित विशेषांक का विमोचन

इस अवसर पर यू०डी०ओ० दिल्ली द्वारा प्रकाशित “आलमी यौमे उर्दू यादगार मजल्ला” का विमोचन डाॅ. सय्यद अहमद ख़ान ने अपने हाथों से किया। यह विशेषांक उर्दू के वरिष्ठ व सम्मानित पत्रकार सय्यद आलिम नक़वी की जिंदगी, उनके सहाफ़ी सफर और उर्दू अदब की खिदमात पर केंद्रित है।
डाॅ. ख़ान ने कहा, “सय्यद आलिम नक़वी उर्दू सहाफ़त का वह उजला सितारा हैं, जिन्होंने पूरी जिंदगी क़लम और उर्दू अदब की बेपनाह सेवा की। वह कई बड़े उर्दू अख़बारों और इदारों से जुड़े रहे और उर्दू को नई बुलंदियाँ दीं।”

मुज़फ्फरनगर यूनिट की कार्यशैली की तारीफ़..

यू०डी०ओ० के क़ौमी सदर ने मुज़फ्फरनगर यूनिट की कार्यशैली और टीम वर्क की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि
“उर्दू के फ़रोग़ और नई नस्ल में इसके प्रचार-प्रसार के लिए मुज़फ्फरनगर यूनिट जिस लगन से काम कर रही है, उसकी मिसाल पूरे उत्तर प्रदेश में नहीं मिलती। यहाँ का हर सदस्य उर्दू रसमुल-ख़त की हिफ़ाज़त और उर्दू मोहब्बत के जज़्बे से सरशार है।”

साथ ही हकीम अताउर्रहमान अजमली ने भी मुज़फ्फरनगर टीम के सतत प्रयासों को सराहते हुए कहा कि यह यूनिट उर्दू के लिए एक मिसाल बनकर उभरी है।

शाहजबीं क़ाज़ी ने की उर्दू प्रेमियों से अपील..

समाजिक कार्यकर्ता एडवोकेट शाहजबीं क़ाज़ी ने कहा कि वह कई बार मुज़फ्फरनगर आ चुकी हैं और हर बार यहाँ के उर्दू-नवाज़ लोगों की लगन दिल को छू लेती है। उन्होंने कहा,
“अगर इसी तरह पूरे प्रदेश में लोग आगे आएं तो उर्दू का फ़रोग़ तेज़ी से हो सकता है।”
कार्यक्रम में डाॅ. सय्यद अहमद ख़ान, एडवोकेट शाहजबीं क़ाज़ी, हकीम मुर्तज़ा देहलवी, इक़रार उज्जैनी, हकीम अताउर्रहमान अजमली, कलीम त्यागी, तहसीन अली असारवी, हाजी सलामत राही, बदरुज़्ज़मां ख़ान, गुलफाम अहमद, शमीम क़स्सार और डाॅ. इरफ़ान अली असारवी समेत कई उर्दू प्रेमी उपस्थित रहे।

यूडीओ (U.D.O.) का उर्दू भाषा के विकास में योगदान…

उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गनाइज़ेशन (यूडीओ) पिछले कई वर्षों से उर्दू भाषा के संरक्षण, संवर्धन और उसके सांस्कृतिक वैभव को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहा है। संस्था का उद्देश्य सिर्फ उर्दू की शिक्षा या प्रचार तक सीमित नहीं, बल्कि उर्दू की तहज़ीब, इतिहास, साहित्य और रसमुल-ख़त की हिफ़ाज़त को भी शामिल करता है।

1. नई पीढ़ी में उर्दू के प्रति आकर्षण बढ़ाने की मुहिम..

यूडीओ स्कूलों, मदरसों, कोचिंग सेंटरों और सामाजिक मंचों पर बच्चों और युवाओं के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित करता है—

उर्दू सुलेख (क्लिग्राफी) प्रतियोगिताएँ

उर्दू दिवस पर विशेष क्लासेस

राइटिंग स्किल डेवलपमेंट सेशन
इन कार्यक्रमों का असर यह है कि नई पीढ़ी में उर्दू पढ़ने और लिखने का रुझान तेजी से बढ़ रहा है।

2. उर्दू रसमुल-ख़त की हिफ़ाज़त..

यूडीओ उन दुर्लभ संस्थाओं में से है जो उर्दू लिपि (नस्तालीक़) की सुरक्षा और मानकीकरण पर काम कर रही है।
संस्था इस बात का ख़ास ध्यान रखती है कि नई पीढ़ी उर्दू का सही और ख़ूबसूरत रसमुल-ख़त सीख सके।

3. भाषा को समाज से जोड़ने की कोशिश.

यूडीओ कोर्डिनेटर तहसीन अली असारवी का मानना है कि उर्दू सिर्फ भाषा नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक धरोहर है। इसलिए संस्था—मुशायरों साहित्यिक गोष्ठियों उर्दू पत्रकारिता कार्यशालाओं पुस्तक विमोचन कार्यक्रमों के माध्यम से उर्दू को आम लोगों के बीच फिर से जीवित और लोकप्रिय बना रही है।

4. उर्दू पत्रकारिता को बढ़ावा..

यूडीओ समय-समय पर स्मारिका और मजल्लों का प्रकाशन करता है, जिनमें उर्दू के पत्रकारों, कवियों और लेखकों की सेवाओं को सामने लाया जाता है।
इससे नई पीढ़ी को उर्दू की पत्रकाराना परंपरा और उसके योगदान का पता चलता है।

5. सामुदायिक एकता और सामाजिक भाईचारे को बढ़ावा..

उर्दू की ख़ासियत इसकी गंगा-जमुनी तहज़ीब है।
यूडीओ विभिन्न समुदायों को जोड़ने वाले कार्यक्रम आयोजित कर सामाजिक भाईचारा मजबूत करता है।

6. प्रदेश और देश में सक्रिय नेटवर्क…

यूडीओ की देशभर में सक्रिय यूनिटें हैं, जिनमें मुज़फ्फरनगर यूनिट सबसे सक्रिय और प्रेरणादायक मानी जाती है।
इस यूनिट ने उर्दू के प्रचार-प्रसार को जमीनी स्तर तक पहुँचाया है, जो पूरे प्रदेश के लिए एक मॉडल बन चुकी है।