नई दिल्ली। यहाँ ए एंड एस फार्मेसी द्वारा 2026 का कैलेंडर जारी किया गया है। जिसमें अंग्रेजी और चांद की तारीखों दोनों की जानकारी दी गई है। यह कैलेंडर विशेष रूप से मुसलमानों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें धार्मिक और धार्मिक अवसरों के लिए जरूरी तारीखों का विवरण दिया गया है, जैसे कि شب برات (शब-ए-बरात), रमजान, ईद-उल-फितर, यम-हज, ईद-उल-अजहा और अन्य महत्वपूर्ण धार्मिक दिन शामिल है।
इस कैलेंडर के माध्यम से ए एंड एस फार्मेसी ने यह संदेश दिया कि केवल अंग्रेजी तिथि (जैसे जनवरी, फरवरी से लेकर दिसम्बर तक) ही नहीं, बल्कि चांद की तिथियों जैसे महुरम-हिजरी से लेकर हज के दिनों तक की जानकारी भी अनिवार्य होनी चाहिए। इससे धार्मिक कर्तव्यों को समय पर और सही तरीके से निभाने में मदद मिलेगी।
कैलेंडर के विमोचन के अवसर पर मौलाना मोहम्मद जावेद सिद्दीकी कासमी (दिल्ली), हकीम अता-उर-रहमान अजमली (एमडी ए एंड एस फार्मेसी), मुजम्मिल एडवोकेट व क़ारी मोहम्मद अफ़ान की उपस्थिति रही। इस आयोजन के जरिए फार्मेसी ने समाज में धार्मिक आयोजनों और कर्तव्यों को समय रहते पूरी करने के महत्व को भी उजागर किया।

मुसलमानों में उर्दू कैलेंडर की आवश्यकता: एक जरूरी पहल
नई दिल्ली। भारतीय समाज में विभिन्न धर्मों और समुदायों के बीच अपने धार्मिक कर्तव्यों को निभाने के लिए समय-समय पर विशेष कैलेंडर का इस्तेमाल किया जाता है। खासतौर पर मुस्लिम समुदाय के लिए उर्दू कैलेंडर एक अहम दस्तावेज है, जिसमें न केवल अंग्रेजी तिथियों का, बल्कि चांद की तिथियों का भी उल्लेख होता है। उर्दू कैलेंडर की जरूरत आज के समय में पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है, ताकि धार्मिक और सांस्कृतिक तिथियों की जानकारी एक स्थान पर सही तरीके से मिल सके।
इस्लामिक कैलेंडर: धार्मिक आवश्यकताओं का पूरक
भारत में मुस्लिम समाज की धार्मिक ज़िन्दगी का बड़ा हिस्सा चांद की तारीखों पर निर्भर करता है। जैसे रमजान का महीना, शब-ए-बरात, ईद-उल-फितर, ईद-उल-अजहा, हज और अन्य महत्वपूर्ण धार्मिक दिन चांद के अनुसार निर्धारित होते हैं। इन दिनों के समय पर पालन के लिए सही जानकारी की आवश्यकता होती है। यही वजह है कि उर्दू कैलेंडर की मांग लगातार बढ़ रही है, ताकि लोग धार्मिक तिथियों को सही समय पर जान सकें और अपने धार्मिक कर्तव्यों को पूरा कर सकें।
उर्दू कैलेंडर का महत्व
उर्दू कैलेंडर में धार्मिक तिथियों के अलावा, महत्वपूर्ण पारिवारिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए भी तारीखें दी जाती हैं। इससे न केवल मुसलमानों को अपनी धार्मिक जिम्मेदारियों को पूरा करने में आसानी होती है, बल्कि वे अपने पारंपरिक त्योहारों को भी सही समय पर मना सकते हैं। इसके अतिरिक्त, उर्दू कैलेंडर के माध्यम से मुस्लिम समाज में एकजुटता और सहकार्य की भावना भी पैदा होती है। जब सभी एक ही कैलेंडर के अनुसार अपने त्योहारों और धार्मिक गतिविधियों को मनाते हैं, तो इससे समुदाय के भीतर सामूहिकता का अहसास होता है।
मुस्लिम समाज में जागरूकता की कमी
हालांकि उर्दू कैलेंडर की अहमियत को लेकर समाज में जागरूकता है, लेकिन आज भी बहुत से लोग इसका सही उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों में और शिक्षा की कमी वाले क्षेत्रों में उर्दू कैलेंडर के बारे में जानकारी का अभाव है। इसके चलते, कई बार धार्मिक आयोजनों का सही समय पर पालन नहीं हो पाता। इससे न केवल धार्मिक कर्तव्यों में लापरवाही होती है, बल्कि समुदाय में असमंजस की स्थिति भी उत्पन्न होती है।
आधुनिक तकनीक और उर्दू कैलेंडर
आज के डिजिटल युग में, जहां स्मार्टफोन और इंटरनेट हर व्यक्ति की पहुँच में हैं, उर्दू कैलेंडर को डिजिटल रूप में उपलब्ध कराना बहुत ही जरूरी है। कई मुस्लिम संगठनों ने अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उर्दू कैलेंडर जारी करने की पहल शुरू की है, ताकि लोग इसे आसानी से अपने मोबाइल फोन या कंप्यूटर पर देख सकें। यह कदम उन लोगों के लिए वरदान साबित हो सकता है जो इंटरनेट के जरिए धार्मिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं। इसके अलावा, उर्दू कैलेंडर के मोबाइल एप्स भी अब मुस्लिम समुदाय के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं, जो हर साल के धार्मिक और चांद के दिनों की जानकारी प्रदान करते हैं।
समाज में सहयोग और जागरूकता की आवश्यकता
उर्दू कैलेंडर की व्यापक उपयोगिता के बावजूद, मुस्लिम समाज में इसकी जागरूकता और प्रचार-प्रसार को और बढ़ाने की आवश्यकता है। धार्मिक संगठनों, मस्जिदों और समुदाय के प्रमुख लोगों को इस दिशा में पहल करनी चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोग उर्दू कैलेंडर का इस्तेमाल कर सकें। साथ ही, स्कूलों और कॉलेजों में भी छात्रों को उर्दू कैलेंडर की अहमियत और उपयोगिता के बारे में बताया जाए, ताकि युवा पीढ़ी इसे सहज रूप से अपनाए।















