‘ग्रीन इलेक्शन’ क्रांति से हरित लोकतंत्र की ओर… IAS हीरालाल की सफल मुहिम

जब देश की हवाओं में प्रदूषण की चिंता गूंज रही हो, जब नदियाँ अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही हों, तब लोकतंत्र की सबसे पवित्र प्रक्रिया—चुनाव—क्या प्रकृति से विमुख रह सकती है? इसी प्रश्न को अपनी सोच और कर्म से उत्तर देने निकले हैं IAS हीरा लाल, जिन्होंने ‘ग्रीन इलेक्शन’ की अवधारणा को न केवल जन्म दिया, बल्कि उसे ज़मीन पर उतारकर एक मिसाल भी कायम की।
प्रशासनिक कुशलता से परे एक पर्यावरण प्रहरी….
UP कैडर के 2009 बैच के IAS अधिकारी हीरा लाल वर्तमान में राष्ट्रीय एकता विभाग के सचिव हैं। लेकिन उनकी पहचान एक साधारण नौकरशाह की नहीं, बल्कि एक ऐसे संवेदनशील विचारक की है जो प्रशासन को जन-जागरण और पर्यावरणीय पुनर्जागरण का माध्यम मानते हैं।
2024 के आम चुनावों में जब उन्हें पंजाब के आनंदपुर साहिब में जनरल ऑब्जर्वर नियुक्त किया गया, तब उन्होंने एक ऐतिहासिक प्रयोग किया—एक ऐसा चुनाव जो प्रकृति के साथ कदमताल करता है।
‘ग्रीन इलेक्शन’ मॉडल: लोकतंत्र को हरियाली की सौगात..
22 जुलाई को चुनाव आयोग को भेजे गए अपने पत्र में हीरा लाल ने 90-पृष्ठीय ‘ग्रीन इलेक्शन बुकलेट’ प्रस्तुत की—एक ऐसा दस्तावेज़ जो न केवल विचारों का संग्रह है, बल्कि जमीनी अनुभवों, आंकड़ों और जन-सहभागिता की जीवंत तस्वीर भी।
खास बात…
– प्राकृतिक प्रचार सामग्री: प्लास्टिक के स्थान पर पुनः उपयोग योग्य और जैविक वस्तुओं का प्रयोग।
– कचरा प्रबंधन की जागरूकता: मतदान केंद्रों पर कचरा पृथक्करण की व्यवस्था।
– डिजिटल माध्यमों की प्राथमिकता: पर्यावरण को बचाने हेतु कागज़ रहित प्रचार।
– वृक्षारोपण का संदेश: हर वोट के साथ एक पौधा—एक नागरिक, एक जिम्मेदारी।
– साझा परिवहन का प्रोत्साहन: निजी वाहनों की जगह सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग।
🌍 सामाजिक चेतना और पर्यावरणीय प्रभाव..
IAS अफसर हीरा लाल का मानना है कि यह मॉडल न केवल चुनावी खर्च को घटाता है, बल्कि नागरिकों को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाता है। उनका कहना है की “हर वोट के साथ एक पौधा उगाना सिर्फ प्रतीक नहीं है, यह एक संदेश है—कि लोकतंत्र और प्रकृति साथ-साथ चल सकते हैं।” हीरा लाल का सपना है—एक ऐसा भारत जहाँ हर चुनाव प्रकृति के साथ संवाद करे, जहाँ हर मतदाता सिर्फ नेता नहीं चुनता, बल्कि पर्यावरण की रक्षा का संकल्प भी लेता है।
यह विचार न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि एक नई राजनीतिक संस्कृति की नींव रखता है—जहाँ सत्ता की दौड़ में प्रकृति की पुकार अनसुनी नहीं होती।
🗳️ चुनाव आयोग से अपेक्षाएं…
हीरा लाल चाहते हैं कि यह पहल सिर्फ एक प्रयोग न रहे, बल्कि एक नीति बने। उनके सुझाव है की राजनीतिक दलों में क्लाइमेट विंग की स्थापना।चुनावी अभियानों में पर्यावरणीय मानकों का पालन अनिवार्य। हर जिले में इको-कोऑर्डिनेटर की नियुक्ति।
📍 अन्य राज्यों में सफलता की कहानियाँ..
महाराष्ट्र के अनुषक्ति नगर और चेंबूर, तथा गुजरात के विसावदर उपचुनाव में इस मॉडल को अपनाया गया। परिणामस्वरूप न केवल प्रशासनिक सराहना मिली, बल्कि जनता ने भी इसे खुले दिल से स्वीकार किया।
डायनेमिक DM क़े नाम से प्रसिद्धि पाई...
हीरालाल को “डायनेमिक DM” कहे जाने का कारण सिर्फ उनका प्रशासनिक पद नहीं, बल्कि उनके ज़मीनी काम और समाज के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण हैं। आइए जानें उनके बारे में कुछ खास बातें:
उनकी किताब: डायनेमिक डीएम
– यह किताब सिर्फ एक अधिकारी की जीवनी नहीं, बल्कि शासन और जनसेवा की यात्रा है।
– तीन भागों में विभाजित है:
– सपनों की शुरुआत: बचपन, शिक्षा और विदेश में पढ़ाई।
– युवावस्था और तैयारी: कॉलेज जीवन और UPSC की तैयारी।
– प्रशासनिक अनुभव: बांदा ज़िले में DM रहते हुए किए गए नवाचार और सुधार कार्य।
– इसमें जल संरक्षण, जेल सुधार, कुपोषण, स्टार्टअप्स और मॉडल गाँव जैसी योजनाओं का ज़िक्र है।
– शायरी और ग़ज़ल के ज़रिए सामाजिक मुद्दों को समझाने की कोशिश की गई है, जो इसे अनोखा बनाती है।
🌱 बांदा में उनके उल्लेखनीय कार्य...
– जल बचाओ अभियान: पुराने तालाबों का पुनरुद्धार, 2200 नए तालाब, 7800 कुओं की सफाई।
– वोटिंग जागरूकता: 20,000 मतदाताओं को पत्र लिखे, मतदान प्रतिशत में 10% की वृद्धि।
– पर्यावरण संरक्षण: लाखों पौधे लगाए, प्लास्टिक मुक्त अभियान चलाया।
– शिक्षा सुधार: स्मार्ट क्लासरूम, पुस्तकालयों की स्थापना, बालिका शिक्षा पर ज़ोर।
– स्वास्थ्य सेवाएं: जिला अस्पतालों का आधुनिकीकरण, टीकाकरण और पोषण अभियान।
🎓 UPSC की तैयारी के लिए उनकी सलाह
– कक्षा 8 से ही तैयारी शुरू करें।
– रोज़ाना अखबार का संपादकीय पढ़ें।
– सफल अभ्यर्थियों के इंटरव्यू देखें।
– खुद की रणनीति बनाएं और उसका पालन करें।
संकलन : इरशाद राव
समाचार संपादक
ट्रू स्टोरी समाचार पत्र।