UP मे वाराणसी कैंट क्षेत्र में रोडवेज बस स्टैंड के पास स्थित होटल सिटी इन में उस समय सनसनी फैल गई, जब एक बंद कमरे से भाई-बहन के शव बरामद हुए। मृतकों की पहचान सिकंदराबाद, हैदराबाद निवासी गणेश गौड गुनालापल्ली और उसकी बहन लक्ष्मी गुनालापल्ली के रूप में हुई है। प्रथम दृष्टया दोनों की मौत जहर के असर से होना सामने आया है।
जानकारी के मुताबिक दोनों चार दिन से होटल में ठहरे थे और काशी विश्वनाथ के दर्शन के लिए वाराणसी आए थे। शुरू में उन्होंने शहर का भ्रमण किया और उनका व्यवहार भी सामान्य रहा। किसी तरह की अनहोनी की आशंका किसी को नहीं हुई।
चेकआउट के दिन दोपहर बाद तक जब कमरा नहीं खुला तो होटल स्टाफ को शक हुआ। कर्मचारियों ने कई बार दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मास्टर चाबी से दरवाजा खोला तो अंदर का नजारा देख सभी सन्न रह गए।
कमरे में दोनों शव पड़े थे और मुंह से झाग निकल रहा था। टेबल पर जहर का पैकेट भी मिला है। पुलिस का मानना है कि दोनों ने जहर खाकर जान दी है।
होटल रजिस्टर में दर्ज पता करीब 12 साल पुराना निकला। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दोनों पहले उसी पते पर किराये पर रहते थे। मृतकों के पास से आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस भी मिले हैं। पुलिस परिजनों से संपर्क करने के साथ ही मामले की हर पहलू से जांच कर रही है।
चार दिन तक साथ, फिर खामोशी
हैदराबाद से वाराणसी पहुंचे गणेश और लक्ष्मी गुनालापल्ली चार दिन तक होटल सिटी इन में ठहरे रहे। इन दिनों में उन्होंने काशी विश्वनाथ के दर्शन किए, बाजार घूमे और होटल स्टाफ से सामान्य बातचीत भी करते रहे। किसी को अंदाजा नहीं था कि बंद कमरे के भीतर ऐसा फैसला छिपा है।
चेकआउट के दिन अचानक कमरे से खामोशी छा गई। दोपहर बीतने के बाद भी दरवाजा नहीं खुला तो शक गहराया। पुलिस ने मास्टर चाबी से कमरा खोला और अंदर का मंजर सबको सन्न कर गया।
कमरे में जहर का पैकेट मिलना कहानी को आत्महत्या की ओर मोड़ रहा है, लेकिन सवाल अब भी खड़े हैं—दोनों ने एक साथ ऐसा कदम क्यों उठाया? क्या कोई पारिवारिक तनाव था, आर्थिक संकट था या कोई और वजह?
पुलिस मोबाइल फोन, यात्रा रिकॉर्ड और संपर्कों की जांच कर रही है। परिजनों से बात के बाद ही इस रहस्य से पर्दा उठने की उम्मीद है।














