नई दिल्ली। उर्दू भाषा के प्रचार-प्रसार से जुड़ी अहम संस्था राष्ट्रीय परिषद फॉर प्रमोशन ऑफ उर्दू लैंग्वेज (एनसीपीयूएल) की बॉडी के गठन में हो रही देरी को लेकर उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर जल्द हस्तक्षेप की मांग की है।
इस संबंध में जानकारी देते हुए उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सैयद अहमद खां ने कहा कि परिषद की संरचना लंबित रहने के कारण उर्दू भाषा के विकास और संवर्धन से जुड़े कार्य गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं। पत्र का मुख्य उद्देश्य एनसीपीयूएल की कार्यक्षमता को बेहतर बनाना और उर्दू भाषा के प्रचार से जुड़े कार्यक्रमों को तेज़ी से आगे बढ़ाना है।
डॉ. सैयद अहमद खां ने कहा कि उर्दू भाषा की उत्पत्ति भारत में ही हुई है और यहीं से इसे व्यापक पहचान मिली। समय के साथ इसकी लोकप्रियता में लगातार इज़ाफा हुआ है और आज भी उर्दू आम लोगों की पसंदीदा भाषा बनी हुई है। यह भाषा न केवल सरकारी स्तर पर बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी प्रेम, सौहार्द और गंगा-जमुनी तहज़ीब की पहचान रही है।
उन्होंने बताया कि उर्दू भाषा के विकास और प्रसार के उद्देश्य से राष्ट्रीय परिषद फॉर प्रमोशन ऑफ उर्दू लैंग्वेज की स्थापना की गई थी, जो शिक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करती है। लेकिन यह चिंताजनक है कि पिछले तीन वर्षों से न तो परिषद के वाइस चेयरमैन की नियुक्ति हो सकी है और न ही इसकी पूरी बॉडी का गठन किया गया है। इसके चलते परिषद अपने उद्देश्यों के अनुरूप काम नहीं कर पा रही है।
डॉ. सैयद अहमद खां ने प्रधानमंत्री से मांग की कि एनसीपीयूएल की बॉडी का जल्द गठन किया जाए, ताकि इसका प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह सक्रिय हो सके और उर्दू भाषा के प्रचार-प्रसार से जुड़े कार्यों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने कहा कि परिषद की पुनर्स्थापना से व्यापक जनहित में इसकी गतिविधियां दोबारा शुरू हो सकेंगी।
एनसीपीयूएल की जल्द गठन की मांग, उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन ने पीएम मोदी को लिखा पत्र















