शहादत के 50 साल: शहीदों की याद में बना पार्क बदहाल, नसबंदी कांड में जान गंवाने वालों को किया याद

कांग्रेस नेता सलमान सईद ने उठाए सफाई और बिजली सुरक्षा पर सवाल
मुजफ्फरनगर।
आपातकाल के दौरान नसबंदी अभियान के विरोध में 18 अक्टूबर 1976 को खालापार में हुए गोलीकांड को 50 साल पूरे हो गए हैं। इस घटना में जान गंवाने वालों की याद में रविवार को शहीदी दिवस मनाया गया। शहीद चौक पर शहीदों को याद करते हुए कांग्रेस नेता सलमान सईद ने श्रद्धांजलि दी, लेकिन इस दौरान शहीद पार्क की बदहाली का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने पार्क में गंदगी और अव्यवस्थाओं पर नाराजगी जताते हुए संबंधित विभागों से साफ-सफाई, रखरखाव और बिजली उपकरणों के आसपास सुरक्षा के इंतजाम दुरुस्त कराने की मांग की।

सलमान सईद ने कहा कि शहीदों की स्मृति में बने पार्क की हालत ऐसी है कि वहां श्रद्धांजलि देने आने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। पार्क में गंदगी के कारण न तो सम्मानपूर्वक कार्यक्रम आयोजित करना आसान है और न ही शहीदों के नाम अंकित शिलापट पर माल्यार्पण करने में सुविधा मिलती है। उन्होंने कहा कि शहीदों की याद से जुड़े इस स्थल का रखरखाव प्राथमिकता के आधार पर होना चाहिए।

शहीदों को नमन करने आएं या करंट का खतरा उठाएं?

कांग्रेस नेता ने शहीद चौक के बाहर बिजली विभाग की ओर से लगाए गए बड़े ट्रांसफार्मर और अन्य बिजली उपकरणों को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि श्रद्धांजलि देने आने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब लोग शहीदों को नमन करने पहुंचते हैं, तो उन्हें बिजली उपकरणों से जुड़े संभावित खतरे की चिंता क्यों करनी पड़े?
उन्होंने संबंधित विभागों से पार्क की नियमित सफाई, शहीदों के नाम वाले शिलापट की उचित देखरेख और बिजली उपकरणों के आसपास सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम कराने की मांग की, ताकि लोग बिना किसी परेशानी के शहीदों को श्रद्धांजलि दे सकें।

18 अक्टूबर 1976: आपातकाल का काला अध्याय

मुजफ्फरनगर के खालापार में 18 अक्टूबर 1976 को हुई घटना देश के आपातकाल के दौर से जुड़ी है। 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लागू किया गया था। इस दौरान नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंधों के साथ सरकारी नसबंदी अभियान को लेकर भी व्यापक असंतोष सामने आया। मुजफ्फरनगर में नसबंदी अभियान के विरोध ने उग्र रूप ले लिया और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की।
समाचार रिपोर्टों के अनुसार, इस गोलीकांड में मुजफ्फरनगर और आसपास के क्षेत्र में कुल 42 लोगों की मौत हुई थी। हालांकि, विभिन्न ऐतिहासिक विवरणों में मृतकों की संख्या और घटना के कुछ पहलुओं को लेकर अंतर मिलता है। खालापार के शहीद चौक पर 25 मृतकों के नाम अंकित हैं, जबकि फक्करशाह चौक पर भी मृतकों के नाम दर्ज बताए जाते हैं। घटना के बाद शहर में तीन दिन तक कर्फ्यू लगाए जाने का भी उल्लेख मिलता है। ।

आधी सदी बाद भी स्मारक के रखरखाव की जरुरत..
नसबंदी गोलीकांड में जान गंवाने वालों की स्मृति में स्थापित शहीद चौक उस दौर की पीड़ा और नागरिक अधिकारों के संघर्ष की याद दिलाता है। ऐसे ऐतिहासिक स्थल केवल स्मारक नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को इतिहास से परिचित कराने का माध्यम भी होते हैं।
शहीदी दिवस पर पार्क की बदहाली का मुद्दा उठने से एक बार फिर इसके रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हैं। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मांग पर कितना ध्यान देते हैं और शहीदों की याद से जुड़े इस स्थल को सम्मानजनक स्वरूप देने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।