शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले… रामपुर तिराहा पर फिर गूंजा बलिदान का संदेश

32वीं बरसी पर शहीद स्थल पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, सात शहीदों के प्रतिमा स्थल का किया शिलान्यास; 27 लाख रुपये की स्वीकृति

मुजफ्फरनगर। ‘शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले…’ रामपुर तिराहा स्थित शहीद स्थल पर शुक्रवार को यह पंक्ति एक बार फिर भावुक कर गई। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के इतिहास के महत्वपूर्ण अध्याय रामपुर तिराहा कांड की 32वीं बरसी पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड किसी उपहार के रूप में नहीं मिला, बल्कि इसके लिए लंबे संघर्ष और बलिदान की कीमत चुकानी पड़ी है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आंदोलन के दौरान खटीमा, मसूरी और रामपुर तिराहा में आंदोलनकारियों ने बलिदान दिया। रामपुर तिराहा के सात शहीदों का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों ने जिस उत्तराखंड का सपना देखा था, उसे साकार करना सभी की जिम्मेदारी है।
सात नाम, जो हर बरसी पर फिर याद आते हैं
2 अक्टूबर 1994 को अलग उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर आंदोलनकारी दिल्ली जा रहे थे। रामपुर तिराहा पर उन्हें रोके जाने के बाद स्थिति बिगड़ी और पुलिस फायरिंग में आंदोलनकारी शहीद हुए। इस घटना में रविंद्र रावत, सत्येंद्र सिंह चौहान, गिरीश भदरी, राजेश लखेड़ा, सूर्य प्रकाश थपलियाल, राजेश नेगी और अशोक कुमार के नाम शहीदों में शामिल हैं। अशोक कुमार की बाद में उपचार के दौरान मृत्यु हुई थी।
हर वर्ष 2 अक्टूबर को रामपुर तिराहा स्थित शहीद स्थल पर इन बलिदानियों को श्रद्धांजलि दी जाती है। यह स्थल उत्तराखंड राज्य आंदोलन के संघर्ष और बलिदान की प्रमुख स्मृति के रूप में स्थापित है।
आरोपों से अदालत तक पहुंचा मामला
रामपुर तिराहा कांड के बाद पुलिस और पीएसी की कार्रवाई को लेकर आंदोलनकारियों और उनके परिजनों की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए। महिलाओं के साथ कथित अभद्रता, यौन हिंसा और लूटपाट से जुड़े मामले भी सामने आए। इन मामलों की जांच सीबीआई ने की और अलग-अलग मुकदमों में न्यायिक प्रक्रिया चली।
2024 में रामपुर तिराहा कांड से जुड़े दुष्कर्म और लूट के मामले में पूर्व पीएसी जवान मिलाप सिंह और वीरेंद्र प्रताप को अदालत ने दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
वहीं 2026 में फर्जी हथियार बरामदगी से जुड़े मामले में तत्कालीन थाना प्रभारी ब्रजकिशोर और पुलिसकर्मी अनिल कुमार व उमेश चंद को डेढ़-डेढ़ वर्ष के कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई गई। बाद में तीनों ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील की प्रक्रिया शुरू की।
सात शहीदों के प्रतिमा स्थल का शिलान्यास
32वीं बरसी के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री धामी ने सातों शहीदों के प्रतिमा स्थल का शिलान्यास किया। इसके लिए 27 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई। मुख्यमंत्री ने आंदोलन में शहीद हुए लोगों के घरों के पास भी उनकी प्रतिमाएं स्थापित करने की घोषणा की।
शहीद स्थल पर पहुंचे लोगों ने आंदोलनकारियों के बलिदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। रामपुर तिराहा एक बार फिर उस संघर्ष की गवाही देता नजर आया, जिसने अलग उत्तराखंड राज्य के आंदोलन को नई दिशा दी।

हर साल लौटती है 2 अक्टूबर की याद

रामपुर तिराहा पर हर वर्ष 2 अक्टूबर को श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित होता है। शहीद स्थल पर जुटने वाले लोग उत्तराखंड राज्य आंदोलन के शहीदों को नमन करते हैं और उनके संघर्ष एवं बलिदान को याद करते हैं। इस वर्ष 32वीं बरसी पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मौजूदगी और सात शहीदों के प्रतिमा स्थल के शिलान्यास ने कार्यक्रम को विशेष महत्व दिया।

कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ मंत्री कपिल देव अग्रवाल, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी परिषद के उपाध्यक्ष सुभाष बढ़थiवाल, संस्कृति परिषद के उपाध्यक्ष मधी भट्ट, ओमप्रकाश जंदगनी, हरिद्वार की जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, मुजफ्फरनगर के भाजपा जिलाध्यक्ष सुधीर सैनी, एमएलसी वंदना वर्मा, पूर्व विधायक अशोक कंसल, सदर ब्लॉक प्रमुख पति अमित चौधरी, रोहाना गन्ना समिति के चेयरमैन अनिल त्यागी, नरेश कुमार, स्मारक प्रभारी शुभम शर्मा, पप्पू शर्मा आदि मौजूद रहे।