हिंदी दिवस की तर्ज पर उर्दू दिवस मनाने की मांग का स्वागत

उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सैयद अहमद ख़ाँ बोले- सरकार प्रस्ताव पर गंभीरता से करे विचार

नई दिल्ली। हिंदी दिवस की तर्ज पर देश में सरकारी स्तर पर उर्दू दिवस मनाने की मांग को लेकर उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (यूडीओ) ने समर्थन जताया है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सैयद अहमद ख़ाँ ने साहित्य अकादमी, नई दिल्ली में उर्दू भाषा के कन्वीनर तथा प्रसिद्ध पत्रकार एवं साहित्यकार चंद्रभान ख़याल की ओर से भारत सरकार के समक्ष रखे गए प्रस्ताव का स्वागत किया है।
डॉ. सैयद अहमद ख़ाँ ने कहा कि हिंदी की तरह उर्दू भाषा के लिए भी सरकारी स्तर पर एक विशेष दिवस निर्धारित किए जाने से भाषा के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि उर्दू केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय साहित्य, संस्कृति और साझा भाषाई विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में उर्दू दिवस को सरकारी स्तर पर मनाने की पहल भाषा के विकास और उसके संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।

उर्दू के अधिकारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला महत्वपूर्ण

डॉ. सैयद अहमद ख़ाँ ने कहा कि उर्दू भाषा के अधिकारों को लेकर उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन ने लगातार प्रयास किए हैं। उन्होंने बताया कि 4 सितंबर 2014 को हिंदी साहित्य सम्मेलन, इलाहाबाद के मामले के संदर्भ में संगठन ने सर्वोच्च न्यायालय में उर्दू के पक्ष में सफलता हासिल की थी।
उन्होंने कहा कि इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के परिणामस्वरूप देश के सात राज्यों में उर्दू को प्राप्त द्वितीय राजभाषा के दर्जे को बरकरार रखने की महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई। उनके अनुसार, संविधान के तहत भाषाई अधिकारों के संदर्भ में यह फैसला महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
डॉ. ख़ाँ ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में उर्दू को द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। ऐसे में उर्दू भाषा के संवैधानिक और भाषाई अधिकारों के संरक्षण के लिए लगातार प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।

1997 से मनाया जा रहा विश्व उर्दू दिवस

उन्होंने कहा कि वर्ष 1997 से 9 नवंबर को विश्व उर्दू दिवस मनाने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद से भारत सहित दुनिया के विभिन्न देशों में उर्दू भाषा और साहित्य से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं।
डॉ. सैयद अहमद ख़ाँ के मुताबिक, विश्व उर्दू दिवस मनाए जाने का सकारात्मक प्रभाव उन देशों में भी देखने को मिला है, जहां उर्दू भाषा को चाहने और समझने वाले लोग मौजूद हैं। इससे उर्दू साहित्य, शायरी, पत्रकारिता और भाषा के प्रति लोगों की रुचि को बढ़ावा मिला है।
उन्होंने कहा कि उर्दू से जुड़े साहित्यकार, शिक्षक, पत्रकार, बुद्धिजीवी और भाषा प्रेमी लंबे समय से उर्दू के विकास और प्रचार-प्रसार के लिए अपने स्तर पर काम कर रहे हैं। सरकारी स्तर पर भी यदि उर्दू दिवस मनाने की पहल होती है तो इससे इन प्रयासों को व्यापक मंच मिल सकता है।

सरकार से प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करने की अपील

डॉ. सैयद अहमद ख़ाँ ने कहा कि साहित्य अकादमी में उर्दू भाषा के कन्वीनर चंद्रभान ख़याल की ओर से हिंदी दिवस की तर्ज पर उर्दू दिवस मनाने की अपील स्वागत योग्य है। उन्होंने कहा कि यदि देश के प्रतिभाशाली चिंतक, बुद्धिजीवी, साहित्यकार और उर्दू भाषा से प्रेम करने वाले लोग इस दिशा में मांग उठा रहे हैं तो सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
उन्होंने भारत सरकार से अपील की कि उर्दू दिवस मनाने के प्रस्ताव को ध्यान में रखते हुए सरकारी स्तर पर विधिवत उर्दू दिवस मनाने की प्रक्रिया शुरू करने पर विचार किया जाए।
उन्होंने कहा कि इससे उर्दू भाषा के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ नई पीढ़ी को भी उर्दू साहित्य और उसकी समृद्ध परंपरा से जोड़ने में मदद मिलेगी। साथ ही, देश में मौजूद विभिन्न भाषाओं के बीच आपसी सम्मान और भाषाई विविधता की भावना को भी मजबूती मिल सकती है।
डॉ. ख़ाँ ने कहा कि भारत की पहचान उसकी बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक विरासत से है। ऐसे में उर्दू जैसी समृद्ध साहित्यिक परंपरा वाली भाषा के लिए सरकारी स्तर पर विशेष दिवस मनाने की पहल भाषा और साहित्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण संदेश देगी।