मेरी बोली, मेरी पहचान: लोकभाषाओं ने बिखेरी हिन्दी उत्सव में रंगत
गाजियाबाद। हिन्दी दिवस के अवसर पर 14 सितंबर को एमएमएच कॉलेज, गाजियाबाद के लिटरेरी क्लब की ओर से महाविद्यालय सभागार में ‘मेरी बोली, मेरी पहचान : हिन्दी की लोकधाराएं’ विषय पर साहित्यिक उत्सव का आयोजन किया गया। दोपहर एक से ढाई बजे तक चले कार्यक्रम में विभिन्न महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने काव्य पाठ, लोककथा, निबंध लेखन और पुस्तक समीक्षा जैसी प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग किया।

कार्यक्रम में एलआर कॉलेज, केआईईटी यूनिवर्सिटी और आरसीसीवी गर्ल्स कॉलेज के विद्यार्थियों ने भी हिस्सा लिया। मुख्य अतिथि प्रख्यात कवयित्री एवं साहित्यिक साधिका डॉ. सीता सागर रहीं। कॉलेज के प्राचार्य प्रो. संजय कुमार सिंह, संयोजिका प्रो. सुरेखा अहलावत तथा निर्णायक मंडल के सदस्य डॉ. परितोष मणि, प्रो. शुभाषिणी, प्रो. बीना शर्मा, प्रो. संध्या शर्मा और डॉ. राजेश कुमार शर्मा मौजूद रहे। संचालन साक्षी ने किया।
काव्य पाठ में प्रियांशु सिंह प्रथम…
काव्य पाठ प्रतियोगिता में प्रियांशु सिंह ने प्रथम, हर्ष शर्मा ने द्वितीय और कृष्णा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। सृष्टि को सांत्वना पुरस्कार दिया गया।
‘मेरी बोली, मेरी बात’ में आदित्य राज अव्वल
लोककथाओं और एकल प्रस्तुतियों पर आधारित ‘मेरी बोली, मेरी बात’ प्रतियोगिता में आदित्य राज प्रथम, महक द्वितीय और तुलिका श्रीवास्तव तृतीय रहीं। पलक कुमारी को सांत्वना पुरस्कार मिला।
निबंध और पुस्तक समीक्षा में भी दिखी प्रतिभा
निबंध लेखन प्रतियोगिता में नीतू वर्मा प्रथम, अनुष्का राज द्वितीय और अजय सिंह तृतीय रहे। आदित्य गहलोत, रमेश और साक्षी को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए।
पुस्तक समीक्षा प्रतियोगिता में दिव्यांश शर्मा ने पहला, अदिति चौहान ने दूसरा और हर्षित ने तीसरा स्थान हासिल किया। वंश सहरावत को सांत्वना पुरस्कार मिला।
डॉ. सीता सागर का काव्य पाठ रहा आकर्षण
मुख्य अतिथि डॉ. सीता सागर ने हिन्दी की साहित्यिक परंपरा के साथ लोकभाषाओं और बोलियों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बोली केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी स्मृतियों, संवेदनाओं और सांस्कृतिक पहचान की जीवंत धरोहर है। इसके बाद उनके काव्य पाठ ने सभागार में मौजूद श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम के अंत में विजेताओं और प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। अतिथियों, निर्णायकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने समूह चित्र भी कराया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
कार्यक्रम ने हिन्दी के साथ उसकी विविध लोकभाषाओं और बोलियों को सम्मान देने का संदेश दिया।














