देश के सुधी नागरिकों के नाम DR रेशा का पैगाम…

देशवासियो के नाम डॉ. रेशा का पत्र….

सभी देशवासियों को मेरा नमन। हमने देश का 77वाँ गणतंत्र मनाया। यह बड़े ही खुशी का पर्व है। हमारे महापुरुषों के लिखे कथ्य सत्य समर्पण से भरे हैं। यह शौर्य नदी बहती है। देश के लिए खुशी का पर्व है और हमें इस दिन देश के इतिहास को याद करना चाहिए।

हमें सदैव सत्य बोलना चाहिए। खेल, शिक्षा और हमारे देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए हमें अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। हमें अपने स्वार्थ को त्याग कर देशहित में कार्य करना चाहिए।

आज भी हम देखते हैं कि लोग अपने स्वार्थ के कारण गलत मार्ग पर चल पड़ते हैं। हमें इससे बचना चाहिए और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। देश की सेवा ही सच्ची सेवा है।

हमें अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों का भी पालन करना चाहिए। स्वतंत्रता हमें अपने पूर्वजों के बलिदान से मिली है। हमें इसे व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए।

अतः आइए, हम सब मिलकर अपने देश को आगे बढ़ाने का संकल्प लें और सच्चे नागरिक बनें। यही हमारे गणतंत्र का वास्तविक अर्थ है.. मोदी जी और सभी देश के सम्मानित व्यक्तियों को जो देश को चला रहे हैं, जो हमें सशक्त दिशा देते हैं। जिनके अथक परिश्रम, कठिन नीतियों और दृढ़ संकल्प के कारण देश निरंतर प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है।

तकनीक, विज्ञान और उद्योग के क्षेत्र में देश ने नई ऊँचाइयाँ प्राप्त की हैं। हमें डरकर नहीं, बल्कि साहस के साथ आगे बढ़ना चाहिए, तभी हम अपने देश को सशक्त बना सकते हैं।

हम सभी को देश की सुरक्षा, एकता और अखंडता की रक्षा करनी चाहिए और यह देश माता का कर्ज उतारने का समय है। हमें अपने देश की कल्पना एक विकसित राष्ट्र के रूप में करनी चाहिए।

स्वच्छता, अनुशासन, ईमानदारी और राष्ट्रप्रेम—ये सभी देशवासियों के आवश्यक गुण हैं। हमें मिल-जुलकर देश को आगे बढ़ाना चाहिए।

जब देश के प्रत्येक नागरिक देशहित में कार्य करेगा, तभी देश प्रगति के पथ पर निरंतर आगे बढ़ेगा। हमें अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों को भी समझना चाहिए।

अंत में, मैं यही कहना चाहता/चाहती हूँ कि हम सभी नागरिक मिलकर अपने देश को एक मजबूत, विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाएं।

मैं सभी देशवासियों से कहना चाहता/चाहती हूँ कि देश चलता रहे, जो हमें अपने कर्तव्यों का सही दिशा में पालन करना सिखाता है। जो पवित्र नदियाँ हैं, वे हमारी मातृ नदियाँ हैं। हमें अपने आसपास की नदियों को मातृ स्वरूप मानकर उनकी रक्षा करनी चाहिए।

हमारे परिवार और पूरे विश्व के प्रति हमारा दायित्व है कि हम स्वच्छ हवा, शुद्ध जल, शुद्ध भोजन और धरती माता को शुद्ध रखें। इन कर्तव्यों से ही हम अपने देश को विकसित बना सकते हैं।

आज शिक्षा और ज्ञान के माध्यम से हमें देशवासियों को जागरूक करना चाहिए। जातिवाद, पाखंड और भेदभाव को समाप्त कर सभी को समान अवसर देना चाहिए।

दिन-प्रतिदिन बढ़ती हुई समस्याओं का समाधान तभी संभव है, जब हम मिलकर कार्य करें। यह सत्य है कि शिक्षित व्यक्ति ही समाज को जागरूक करने के लिए बेहतर भूमिका निभा सकता है।

अतः हम सभी का कर्तव्य है कि देश की प्रगति के लिए एकजुट होकर कार्य करें और भारत माता की सेवा करें।

डॉ. रेशा
सहायक आचार्या श्री द्रोणाचार्य स्नातकोत्तर महाविद्यालय दनकौर।