बेटी की मौत का सदमा नहीं सह सका पिता, एक घंटे बाद तोड़ दिया दम

“जिस घर में बेटी की हंसी से उजाला रहता था,
उसी घर में उसकी विदाई का गम छा गया।
बेटी के जाने का सदमा पिता सह न सका,
एक घंटे में ही वह भी दुनिया से चला गया।”

मुजफ्फरनगर…

रिश्तों की दुनिया में पिता और बेटी का रिश्ता बेहद अनमोल होता है। पिता अपनी संतान की खुशियों के लिए जिंदगी भर संघर्ष करता है और उसकी तकलीफ को खुद पर लेने की दुआ करता है। लेकिन जब उसी संतान के बिछड़ने का गम सामने आ जाए तो कभी-कभी यह दर्द असहनीय हो जाता है। ऐसी ही एक हृदयविदारक घटना चरथावल थाना क्षेत्र के गांव चौकड़ा में सामने आई, जहां बेटी की मौत की खबर सुनने के करीब एक घंटे बाद ही उसके पिता ने भी दम तोड़ दिया। इस घटना ने परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र को गमगीन कर दिया।
जानकारी के अनुसार गांव चौकड़ा निवासी मुस्तजाब की पत्नी खुर्शीदा (48) की देर रात मौत हो गई। खुर्शीदा की शादी कई वर्ष पहले गांव चौकड़ा में हुई थी। उसकी मौत की खबर से परिवार में कोहराम मच गया। परिजन और रिश्तेदार इस दुखद घटना से पहले ही सदमे में थे। इसी बीच जब खुर्शीदा के मायके छपार निवासी उसके पिता रियासत को बेटी के इंतकाल की सूचना मिली तो उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

बताया जाता है कि बेटी की मौत की खबर सुनकर रियासत गहरे सदमे में आ गए। वह अपनी लाडली के बिछड़ने का दर्द बर्दाश्त नहीं कर सके और बेटी की मौत के करीब एक घंटे बाद ही उन्होंने भी दुनिया को अलविदा कह दिया। एक ही परिवार में कुछ ही समय के अंतराल पर हुई दो मौतों से खुशियां मातम में बदल गईं।
पिता और बेटी की एक के बाद एक हुई मौत ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। गांव और आसपास के क्षेत्र में इस घटना को लेकर शोक की लहर दौड़ गई। लोग इस मार्मिक घटना को पिता और बेटी के बीच अटूट स्नेह की मिसाल के रूप में याद कर रहे हैं।
गांव चौकड़ा निवासी भाजपा अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ से जुड़े नेता प्रवेज त्यागी के परिवार में ही खुर्शीदा की शादी मुस्तजाब के साथ हुई थी। प्रवेज त्यागी ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि आज के दौर में जब लोग दुनियावी भागदौड़ में व्यस्त हैं, तब भी माता-पिता का अपनी संतान के प्रति प्रेम सबसे अनमोल है। पिता अपनी औलाद को हमेशा खुश और आगे बढ़ता देखना चाहता है। बेटी के बिछड़ने का सदमा एक पिता के लिए कितना गहरा हो सकता है, यह घटना उसका बेहद मार्मिक उदाहरण है।

इस दुखद घटना ने एक बार फिर यह एहसास करा दिया कि माता-पिता और संतान के बीच का रिश्ता किसी शब्द या उदाहरण का मोहताज नहीं है। बेटी भले ही शादी के बाद दूसरे घर चली जाए, लेकिन पिता के दिल में उसका स्थान कभी कम नहीं होता।