दोपहर में चचेरी बहन से राखी बंधवाई.. रात में रेप क़े बाद गला दबाकर जान ले ली

UP क़े औरैया में रक्षाबंधन क़े दिन ताऊ क़े घर राखी बाँधने गई नाबालिग लड़की की हुई हत्या क़े मामले में उसका चचेरा भाई ही क़ातिल निकला।रात क़े समय चचेरे भाई ने बहन क़े साथ रेप किया। जब ज्यादा ब्लीडिंग हुई तो आरोपी घबरा गया और उसने बदनामी क़े डर से अपनी बहन की गला दबाकर हत्या कर दी। फिर फांसी क़े फंदे पर लटका दिया। ताकि सुसाइड लगे।अब आरोपी सुरजीत सक्सेना पकड़ा गया। इस मामले में फॅमिली की भूमिका पर भी सवाल है। हत्या क़े बाद परिवार ने केस को दबाया.. ऐसे में और लोग भी कानूनी कार्यवाही की जद में है।
स्थान: बिधूना थाना क्षेत्र, औरैया, उत्तर प्रदेश
तारीख: 10 अगस्त 2025
पीड़िता: 14 वर्षीय नाबालिग लड़की
आरोपी: सुरजीत सक्सेना (ताऊ का बेटा)
🔍 रक्षाबंधन के दिन दोपहर में नाबालिग लड़की ने अपने चचेरे भाई सुरजीत सक्सेना को राखी बांधी थी। रात में जब घर में कोई नहीं था, सुरजीत ने शराब के नशे में लड़की के साथ दुष्कर्म किया। जब लड़की की हालत बिगड़ने लगी और ज्यादा ब्लीडिंग हुई, तो आरोपी घबरा गया। बदनामी के डर से उसने लड़की का गला दबाकर हत्या कर दी।
हत्या को आत्महत्या दिखाने के लिए सुरजीत ने शव को फांसी के फंदे पर लटका दिया। लेकिन जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो शव के कपड़ों पर खून के धब्बे और गला दबाने के निशान मिले। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म और गला दबाकर हत्या की पुष्टि हुई।
👮♂️ पुलिस की कार्रवाई....
पुलिस अधीक्षक अभिजीत आर. शंकर ने विशेष जांच टीम गठित की। पूछताछ में सुरजीत ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि वह क्राइम पेट्रोल जैसे अपराध आधारित टीवी शो देखने का शौकीन है और उसी से प्रेरित होकर उसने हत्या को आत्महत्या जैसा दिखाने की कोशिश की।
⚠️ परिवार की भूमिका पर सवाल…
घटना के बाद परिवार ने मामले को दबाने की कोशिश की। पुलिस को सूचना देर से दी गई और शुरुआत में आत्महत्या का दावा किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ परिजन आरोपी को बचाने की कोशिश कर रहे थे। ऐसे में पुलिस अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है और कुछ परिजन भी कानूनी कार्रवाई की जद में आ सकते हैं।
राखी की डोरी टूटी नहीं, बल्कि जला दी गई — रिश्तों की पवित्रता पर सवाल
रक्षाबंधन का दिन था। घर में मिठाइयाँ थीं, हँसी थी, और एक नाबालिग लड़की ने अपने चचेरे भाई सुरजीत सक्सेना को राखी बांधी थी। उस डोरी में भरोसा था, सुरक्षा की उम्मीद थी। लेकिन उसी रात, वही भाई उस भरोसे को कुचल देगा—किसी ने सोचा भी नहीं था।
🧵 राखी का प्रतीक और उसका टूटना..
राखी सिर्फ एक धागा नहीं होती, वह एक वादा होती है—कि भाई बहन की रक्षा करेगा। लेकिन जब वही भाई उस वादे को तोड़ता नहीं, बल्कि उसे जला देता है, तो सवाल सिर्फ अपराध का नहीं रह जाता, बल्कि पूरे सामाजिक ढांचे पर उठता है।
🏠 परिवार की चुप्पी: अपराध की सह-भागीदारी?
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल परिवार की भूमिका पर है। क्यों नहीं किसी ने लड़की की चीखें सुनीं? क्यों नहीं किसी ने पुलिस को तुरंत सूचना दी? क्यों हत्या को आत्महत्या दिखाने की कोशिश की गई?
क्या परिवार ने रिश्तों की मर्यादा बचाने के नाम पर न्याय को दबाने की कोशिश की? अगर हाँ, तो यह सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि सामूहिक नैतिक पतन है।
🧠 समाज की जिम्मेदारी: क्या हम सिर्फ दर्शक हैं?
इस घटना ने यह भी दिखाया कि हम सोशल मीडिया पर ‘जस्टिस फॉर’ ट्रेंड तो चला सकते हैं, लेकिन अपने आस-पास के रिश्तों की निगरानी नहीं कर पाते। क्या हमें बच्चों को रिश्तों की पवित्रता के साथ-साथ उनकी सीमाओं के बारे में भी सिखाना चाहिए?
यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि समाज के उस अंधेरे कोने की झलक है जहां रिश्तों की पवित्रता को दरिंदगी से कुचला गया।