बेटा कलेजा मां का तो पिता की जान है बेटी…

बेटा कलेजा मां का तो पिता की जान है बेटी
बेटा स्वप्न सलोना है तो हंसीं अरमान है बेटी

वो कांधे में उठाएगा वो पलकों पर बिठाएगी
बेटा सांझ का दीपक तम का प्रस्थान है बेटी

लाई भाग में भाई तो सबकी आंख का तारा
वरना कुलनाशिनी के नाम का इल्ज़ाम है बेटी

पीड़ा हृदय के उसकी न क्यों कोई पढ़ पाया
मां बाप की हतासाओं से कहां अंजान है बेटी

आजन्म देती अग्निपरीक्षा सेवा समर्पण की
मगर भूखी विरासत की यहां बदनाम है बेटी

एक दूसरे के पूरक हैं प्रतिद्वंद्वी नहीं हैं ये
बेटा आशीष ईश्वर का तो वरदान है बेटी

हंसकर के होते माफ सौ गुनाह बेटों के
एक भूल भी कर जाए तो अपराध है बेटी

न कोई भेद ममता में न कोई पालन में अंतर
कर रही ऐसे आंगन का अब निर्माण है बेटी

बेटा भी रसोई में हुनर अपना दिखाता है
खुले गगन में खुलकर उड़ा रही विमान है बेटी

रखती ताक पर अपने सब अरमान और सपने
खुशी से मां बाप की हर चाह पर कुर्बान है बेटी

जान को डाल जोख़िम मे वंश आगे बढ़ाती है
फिर भी वंशावलियो से सदा गुमनाम है बेटी…
बेटा स्वप्न सलोना है तो हंसीं अरमान है बेटी…

स्वरचित
सोनिया सिंह
उत्तर प्रदेश ,बांदा