लिटरेचर और जेन-ज़ी: समझ व चुनौतियाँ विषय पर प्रो. विकास शर्मा का विशेष व्याख्यान

गाज़ियाबाद। एम.एम.एच. कॉलेज, गाज़ियाबाद के अंग्रेज़ी विभाग द्वारा 25 मार्च 2026 को “साहित्य और जेन-ज़ी: समझ और चुनौतियाँ” विषय पर एक महत्वपूर्ण साहित्यिक व्याख्यान का आयोजन महाविद्यालय के ऑडिटोरियम में किया गया। कार्यक्रम में प्राध्यापकों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर विषय पर गंभीर चर्चा की।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रख्यात लेखक, उपन्यासकार एवं कवि प्रो. विकास शर्मा (चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ) ने अपने संबोधन में जेन-ज़ी और साहित्य के बदलते संबंधों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत की नई पीढ़ी अपनी जड़ों और पारिवारिक मूल्यों से गहराई से जुड़ी हुई है, जो भारतीय समाज की समृद्ध सामाजिक विरासत को दर्शाती है। उन्होंने युवाओं में राष्ट्र के प्रति दायित्वबोध और सामाजिक संवेदनशीलता को विशेष रूप से रेखांकित किया।
प्रो. शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में डिजिटल क्रांति के कारण साहित्य का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। आज साहित्य केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सोशल मीडिया, ब्लॉग्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से नए-नए रूपों में सामने आ रहा है। इससे युवा पीढ़ी के पढ़ने के तरीके, रुचियाँ और अभिव्यक्ति की शैली में भी व्यापक परिवर्तन देखने को मिल रहा है।
उन्होंने जेन-ज़ी के सामने मौजूद चुनौतियों—जैसे ध्यान की कमी, त्वरित संतुष्टि की प्रवृत्ति और गहराई से पढ़ने की घटती आदत—पर चिंता व्यक्त की। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि साहित्य व्यक्ति के भीतर संवेदनशीलता, चिंतनशीलता और सृजनात्मकता को विकसित करता है, इसलिए आधुनिक तकनीक के साथ संतुलन बनाते हुए साहित्य से जुड़े रहना अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में काशी विद्यापीठ, वाराणसी की प्रो. निशा ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि भारतीय युवा अपने राष्ट्र और समाज के प्रति अत्यंत संवेदनशील हैं। विशिष्ट अतिथि एल.आर. कॉलेज के प्राचार्य प्रो. उदयवीर सिंह ने युवाओं को पश्चिमी संस्कृति के अंधानुकरण और बाजारवाद के प्रभाव से बचते हुए भारतीय मूल्यों को अपनाने का संदेश दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. संजय सिंह ने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को न केवल साहित्य के प्रति जागरूक करते हैं, बल्कि उन्हें समकालीन चुनौतियों को समझने का नया दृष्टिकोण भी प्रदान करते हैं।
इस अवसर पर वी.एम.एल.जी. कॉलेज की सहायक प्रोफेसर डॉ. कनक तथा लखावठी कॉलेज की डॉ. दिव्या पाठक ने भी अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन डॉ. रिया देशवाल ने किया, जबकि अंग्रेज़ी विभाग की अध्यक्षा प्रो. सुरेखा अहलावत ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के दौरान विभागाध्यक्ष डॉ. सुता कुमारी ने शोधार्थी जितेंद्र कुमार को पी-एच.डी. फाइनल वायवा सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर बधाई दी। साथ ही प्रो. गौतम बनर्जी के निर्देशन में शोध कर रहे शोधार्थी अजय और पुष्पेंद्र के प्री-पीएच.डी. सेमिनार की सराहना की गई।
कार्यक्रम के मुख्य आयोजक प्रो. गौतम बनर्जी ने सभी सहभागियों को धन्यवाद देते हुए जलपान के लिए आमंत्रित किया। इस अवसर पर प्रो. भारती गुप्ता, डॉ. स्वर्निल डे, छाया रानी, मनोज कुमार, प्रो. राकेश राणा, मूलचंद वर्मा, डॉ. सीमा रानी, मीनाक्षी, प्रो. रविंद्र यादव (चीफ प्रॉक्टर) तथा डीन डॉ. प्रकाश चौधरी सहित महाविद्यालय के अनेक शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक सिद्ध हुआ, जिसने साहित्य और आधुनिक पीढ़ी के संबंधों पर एक नई सोच विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।














