विश्व कविता दिवस पर हुआ प्रेरणादायक आयोजन

गौतमबुद्ध नगर। शुक्रवार को दनकौर स्थित श्री द्रोणाचार्य पी.जी. कॉलेज में विश्व कविता दिवस के उपलक्ष्य में एक गरिमामय एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. गिरीश कुमार वत्स के मार्गदर्शन एवं देखरेख में संपन्न हुआ, जिसमें शिक्षकों और छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. देवानंद सिंह द्वारा प्रभावी एवं सुव्यवस्थित ढंग से किया गया। अपने संबोधन में डॉ. देवानंद सिंह ने विश्व कविता दिवस के महत्व पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि कविता केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि समाज की संवेदनाओं, विचारों और भावनाओं का सशक्त माध्यम है। उन्होंने बताया कि कविता व्यक्ति के भीतर संवेदनशीलता विकसित करती है और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देती है।

इस अवसर पर इतिहास विभाग की सहायक आचार्य डॉ. नाज परवीन ने अपनी भावपूर्ण कविता प्रस्तुति से उपस्थित सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम में साहित्यिक गरिमा और भावनात्मक गहराई जोड़ दी, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा।

कार्यक्रम में महाविद्यालय परिवार के अनेक वरिष्ठ एवं गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे। इनमें उपप्राचार्या डॉ. रश्मि गुप्ता, विज्ञान विभागाध्यक्ष अमित नागर, वाणिज्य विभागाध्यक्ष डॉ. प्रीति रानी सेन, बीबीए-बीसीए विभागाध्यक्ष शशि नागर, बी.एड. विभागाध्यक्ष डॉ. रश्मि जहाँ सहित डॉ. निशा शर्मा, डॉ. शिखा रानी, डॉ. कोकिल अग्रवाल, डॉ. संगीता रावल, डॉ. प्रशांत कनौजिया, डॉ. अजमत आरा, डॉ. सूर्य प्रताप राघव, डॉ. रेशा, कुमारी नगमा सलमानी, कुमारी चारू सिंह, कुमारी काजल कपासिया, सुनीता शर्मा, इंद्रजीत सिंह, डॉ. नीतू सिंह, कुमारी रुचि शर्मा, हनी शर्मा, प्रिंस त्यागी, अजय कुमार, मुकुल कुमार शर्मा, पुनीत गुप्ता, करन नागर, विनीत कुमार, विजेंद्र सिंह, अंकित नागर, राम किशन सिसोदिया सहित अन्य स्टाफ में राम कुमार शर्मा, बिल्लू, रनवीर, मीनू, ज्ञान प्रकाश, मोती, धनेश कुमार, रानी आदि की उपस्थिति रही। साथ ही बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने भी कविता के प्रति अपनी रुचि और उत्साह का प्रदर्शन किया। पूरे आयोजन का माहौल साहित्यिक ऊर्जा, रचनात्मकता और सकारात्मक विचारों से परिपूर्ण रहा।

अंत में सभी उपस्थित लोगों ने यह संकल्प लिया कि वे कविता और साहित्य के माध्यम से समाज में सकारात्मक संदेश फैलाने, संवेदनशीलता बढ़ाने और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने का कार्य करेंगे। यह कार्यक्रम न केवल साहित्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सफल रहा, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर रचनात्मक सोच को भी प्रेरित करने वाला साबित हुआ।