एम.एम.एच. कॉलेज में ‘साइंस, टेक्नोलॉजी और इंटर-डिस्सीप्लिनरी रिसर्च’ पर हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी

UP के गाजियाबाद स्थित एम.एम.एच. कॉलेज के भौतिक विज्ञान विभाग द्वारा ‘साइंस, टेक्नोलॉजी और इंटर-डिस्सीप्लिनरी रिसर्च’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। अकादमिक एवं सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस सेमिनार में देशभर से वैज्ञानिकों, प्राध्यापकों और शोधार्थियों ने भाग लिया।

संगोष्ठी का शुभारंभ मुख्य आयोजक एवं सेमिनार आयोजक डॉ. मनोज कुमार द्वारा केंद्रीय विषय की प्रस्तावना के साथ हुआ। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. संजय सिंह ने सभी अतिथियों, विद्वानों एवं सहभागियों का औपचारिक स्वागत किया। भौतिक विज्ञान विभाग के प्रो. सत्येंद्र पाल ने दो दिवसीय कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए संगोष्ठी के शैक्षणिक महत्व पर प्रकाश डाला।

मुख्य अतिथि के रूप में नेशनल साइंस लैबोरेटरी से पधारे प्रो. एच. ओ. वत्स ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के बढ़ते प्रभाव पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि अंतःविषयी अनुसंधान वर्तमान समय की आवश्यकता है, जो समाज और उद्योग दोनों को नई दिशा देता है।
यह राष्ट्रीय संगोष्ठी Defence Research and Development Organisation (डीआरडीओ), नई दिल्ली द्वारा वित्तपोषित रही। डीआरडीओ से आए श्री अजय कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि 21वीं सदी तकनीकी नवाचारों की सदी है और शोध को राष्ट्रीय विकास से जोड़ना समय की मांग है।
उद्घाटन सत्र में मुख्य व्याख्यान चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के रिसर्च हेड प्रो. बीरपाल द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने विस्तार से बताया कि विज्ञान, तकनीक और इंटर-डिस्सीप्लिनरी रिसर्च सामाजिक-आर्थिक उन्नति के लिए किस प्रकार महत्वपूर्ण हैं।
इसी क्रम में IIT (BHU) के प्रो. ए. के. श्रीवास्तव ने ‘नेचर’ जर्नल में प्रकाशित अपने शोध कार्यों के उदाहरणों से अनुसंधान के विविध आयामों पर चर्चा की।
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल मलिक ने संगोष्ठी विषय पर सहभागियों का मार्गदर्शन किया।
नेशनल साइंस लैबोरेटरी के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. भानु ने विज्ञान के सामाजिक एवं अकादमिक योगदान पर प्रकाश डाला।
वहीं All India Institute of Medical Sciences Gurugram से सहभागिता करने पहुंचीं युवा वैज्ञानिक डॉ. सुमन तँवर ने मेडिकल साइंस के संदर्भ में बहु-विषयक शोध की आवश्यकता पर विशेष व्याख्यान दिया।

उद्घाटन सत्र का संचालन जंतु विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. गार्गी द्वारा किया गया। मंचासीन सभी अतिथियों — डॉ. मनोज कुमार, प्रो. संजय सिंह, प्रो. सत्येंद्र पाल, प्रो. एच. ओ. वत्स, प्रो. बीरपाल, श्री अजय कुमार, प्रो. ए. के. श्रीवास्तव, प्रो. अनिल मलिक, प्रो. भानु एवं डॉ. सुमन तँवर — का स्वागत पुष्प-पौधे भेंट कर किया गया।
संगोष्ठी में प्राप्त शोध-पत्रों के सार को एब्स्ट्रैक्ट बुकलेट के रूप में प्रकाशित किया गया, जिसका विमोचन सभी मुख्य अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। प्रश्नोत्तर सत्र अत्यंत संवादात्मक रहा।
देशभर से कुल 165 प्रतिभागियों ने शोध-पत्र प्रस्तुतीकरण हेतु पंजीकरण कराया। इसके पश्चात तीन समानांतर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें लगभग 65 शोधार्थियों ने शोध-पत्र एवं पोस्टर प्रस्तुतीकरण किया।
समापन अवसर पर सेमिनार आयोजक डॉ. मनोज कुमार ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, सहभागियों एवं आयोजन समिति का आभार व्यक्त किया तथा आगामी तकनीकी सत्रों की जानकारी देते हुए कार्यक्रम का समापन किया।